अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही टोंक की सुनहरी कोठी, जानिए क्या है इस कोठी की कहानी?

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/10/16 06:22

टोंक| टोंक मे पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद यहां पर विरासतों को सहेजने और उनका प्रचार-प्रसार करने मे जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का उदासीन रवैया ही है जिसकी वजह से यहां पर पर्यटन के रूप मे आने वाला राजस्व शून्य है| कुछ ऐसे ही पर्यटन संभावनाओं को समेटे टोंक सुनहरी कोठी जहां वह अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है| वहीं दूसरी और इस कोठी की सुरक्षा दीवार के लिये किया जा रहा काम इसे पर्यटकों से और भी दूर कर सकता है|

टोंक के नजरबाग क्षेत्र मे स्थित सुनहरी कोठी का निर्माण जिस शानों-शौकत से करवाया गया था उसका एक उद्देश्य यह भी जरूर रहा है कि भविष्य में इसे देखकर नवाबी काल की याद सुनहरी हो जाए, लेकिन आज यहां पर हालात बद से बदतर हो चले है, यही कारण है इसके आस-पास जहां गदंगी के ढेर लगे रहते है तो असामाजिक तत्वों की मौजूदगी हमेशा ही इसकी सुरक्षा के प्रति संदेह पैदा करती है, लेकिन पिछले 15 सालों मे तीन बार इसकी सुरक्षा दीवार को लेकर लाखों का बजट खपाने वाली बात स्थानीय लोगो को खटकती रहती है|

दरअसल पिछले तीन दिनों से इसकी सुरक्षा दीवार को लेकर काम करवाया जा रहा है, जिसमें दीवार की ऊंचाई पांच फीट बढाकर 10-12 फीट की जाएगी और उसके ऊपर जालीदार लोहे की फैंसिंग की जाएगी, जिस पर स्थानीय निवासियों ने एतराज जताया है कि पहले ही पर्यटन और पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते इस विश्वस्तरीय कोठी के लिये कोई पर्यटक नहीं जुटा पाये और दीवार ऊंची करवाने के बाद स्थानीय पर्यटक और यहां वाशिंदे इसे देख नहीं पाएंगे|

दअरसल राजस्थान के लखनऊ कहलाने वाले टोंक नगर के पहले नवाब अमीरूद्दोला के शासन काल मे शुरू हुआ सुनहरी कोठी का निर्माण 1824 मे जाकर पूरा हुआ, जिसकी दीवारों और मेहराबों पर सोने की नक्काशी से लेकर बेशकीमती रत्न जडित काम उसकी शोभा बढाते रहे, लेकिन जितना सुनहरा इस सुनहरी कोठी के निर्माण का इतिहास रहा है उससे कई बुरा हाल शासन और प्रशासन की लापरवाही के चलते आज है| यही कारण है विश्वस्तरीय पहचान होने के बावजूद यह बदहाली का शिकार हो रही है| 

जानकारों की माने तो इस कोठी की मरम्मत के लिए कई बार बजट स्वीकृत भी हुआ है, लेकिन सुरक्षा दीवार के निर्माण में ही पूरा बजट खपा दिया जाता रहा है| वही इस बार किया जा रहा है निर्माण इसलिये संदेह के घेरे में है कि आखिर कोठी के आस-पास इतनी ऊंची दीवार के माईने है क्योंकि लगभग 20 फीट की कोठी की सुरक्षा के लिये 10-12 फीट की दीवार और उसपर जालीदार फैंसिंग उस पूरी तरह छिपा देंगे, ऐसे मे यहां आने वाले स्थानीय पर्यटकों को बाहर से भी उसका दीदार नहीं हो पाएगा जबकि इससे पूर्व का बजट भी सुरक्षा दीवार की मरम्मत मे ही खपा दिया गया था, जिसके बाद मरम्मत कार्य पर सवालिया निशान खड़े होना स्वाभाविक है।

प्रधानमंत्री मोदी से लेकर सूबे की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जहां विदेश नीति के जरिए देश-प्रदेश में रोजगार और पर्यटन को बढावा देने का प्रयास कर रहे है वहीं टोंक मे नवाबी काल के सुनहरे पन्नों की गवाह वर्तमान में जीर्ण-शीर्ण हालत में खड़ी सुनहरी कोठी उपेक्षा आजकल से नही बल्कि कई दशकों से चली आ रही है| सरकारे और प्रशासन बदलते रहे लेकिन नहीं बदली इस कोठी की दुर्दशा की कहानी| वही पिछले 15 सालों मे लाखों का बजट स्वीकृत खर्च होने के बावजूद आज कोठी की हालत मे रत्तीभर भी सुधार नहीं हुआ है जबकि सारा बजट सुरक्षा दीवार पर खर्च करना भ्रष्टाचार की कहानी बयां कर रहा है।

 

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