आफत बने आवारा मवेशी, अब तक दो दर्जन लोगों की हो चुकी है मौत

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/08/20 12:37

नैनवां (बूंदी)। आवारा मवेशी इन दिनों हाईवे पर चलने वाले राहगीरों के लिए मुसीबत बन चुके है। नैनवां बाईपास एनएच- 148 डी में आए दिन आवारा मवेशियों से टकराने से बड़े हादसे हो रहे है। आवारा मवेशियों के हाईवे पर विचरण करने से वाहन चालकों को भारी परेशानी होने लगी है, हालांकि बूंदी जिले एवं नैनवां ट्रैफिक पुलिस ने दुर्घटना की रोकथाम को लेकर आवारा मवेशियों के सींगों पर रिफ्लेक्टर लगाने का प्रयास किया था, लेकिन बीच में ही इस अभियान को बंद कर दिया गया। 

आपको बता दें कि उनियारा से जहाजपुर को जोड़ने वाला एनएच-148 डी पर एक वर्ष में करीब दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश मौतें आवारा मवेशियों के टकराने से हो हुई है। हाईवे पर रोज आवारा मवेशी वाहनों से टकराने से मर रहे है। ग्रामीण लोगों की माने तो उनका कहना है कि, "बरसात के मौसम में जहां चारों और मच्छरों की भरमार होती है,आवारा मवेशियों को बैठने की जगह नहीं होती है। ऐसे में आवारा मवेशी सड़क पर बैठते है।" दूसरी ओर हाईवे पर चलने वाले अधिकांश वाहनों की गति तेज होती है। आवारा मवेशी के अचानक सामने आने से वाहन चालक जैसे ही अपने वाहन पर ब्रेक लगाते है, पीछे से आने वाले वाहन आगे वाले वाहन से टकरा जाते है। गोवंश प्रेमियों का कहना है कि, "आवारा मवेशियों से आए दिन होने वाली मौतों को लेकर हाईवे पर ट्रैफिक पुलिस की गश्त होना चाहिए। ट्रैफिक पुलिस द्वारा जहां-जहां पर भी आवारा मवेशी सड़कों पर विचरण करते है। उनको आसपास की गौशालाओं में भेजा जाना चाहिए ।जिससे आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।"

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