निशुल्क टीकाकरण की मांग स्वीकार होने पर प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्रों ने धरना किया खत्म

निशुल्क टीकाकरण की मांग स्वीकार होने पर प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्रों ने धरना किया खत्म

निशुल्क टीकाकरण की मांग स्वीकार होने पर प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के छात्रों ने धरना किया खत्म

कोलकाता: प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी छात्रों का नि:शुल्क कोविड-19 रोधी टीकाकरण करने पर सहमति जताने के बाद विश्वविद्यालय छात्र परिषद (पीयूएससी) ने 96 घंटे बाद धरना वापस ले लिया. 

पीयूएससी की पदाधिकारी अद्रिजा अदक ने शनिवार को बताया कि अधिकारियों ने राज्य सरकार के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के लिए नि:शुल्क टीकाकरण जल्द से जल्द शुरू करने का वादा करते हुए एक नोटिस जारी किया है. अदक ने कहा कि चूंकि विश्वविद्यालय में किसी भी प्रकार की शैक्षणिक गतिविधि शुरू करने के लिए प्रत्येक छात्र का नि:शुल्क टीकाकरण आंदोलनकारी छात्रों की प्रमुख मांग थी जिसे विश्वविद्यालय के प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है, इसीलिए छात्रों ने 96 घंटे तक चला धरना शुक्रवार शाम को वापस ले लिया था. 

अदक ने बताया कि नोटिस में एक तालिका संलग्न की गई है, जिसमें कोविड-19 रोधी टीके की पहली और दूसरी खुराक प्राप्त करने वाले छात्रों की सूची होगी. विश्वविद्यालय तय तारीख के भीतर उच्च शिक्षा विभाग को इस बारे में विस्तृत जानकारी देगा. अदक ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ से टीकाकरण के लिए आंकड़े जुटाने में मदद करने को कहा है.  अदक ने कहा कि हम इस प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में विश्वविद्यालय प्रशासन का सहयोग और मदद करेंगे.  छात्र संघ अपनी अन्य मांगों को मनवाने में भी सफल रहा है, जिसमें पुस्तकालयों को छात्रों के लिए दोबारा खोला जाना एक प्रमुख मांग है.

विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक नोटिस जारी किया है जिसमें उस प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है जिसके माध्यम से छात्र विश्वविद्यालय में आ सकते हैं और सप्ताह के कुछ विशेष दिनों में पुस्तकालयों से आवश्यक पुस्तकें जारी करवा सकते हैं. छात्र संघ ने कहा कि वह विश्वविद्यालय परिसर को दोबारा खोलने की मांग को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेंगे. विश्वविद्यालय की कुलपति अनुराधा लोहिया ने छात्रों के आंदोलन को लेकर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है. प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि हमें खुशी है कि छात्रों ने धरना वापस ले लिया है जो महामारी की स्थिति में जोखिमभरा हो सकता था. सोर्स-भाषा
 

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