देश का ऐसा अनूठा मंदिर जहां प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है प्याज 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/24 06:24

सादुलपुर: भारत में अनेकों चमत्कारी मंदिर है, जहां भक्तों की भीड़ हमेशा देखने को मिलती है. आज हम आपको एक ऐसे चमत्कारी मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां प्रसाद के रूप में प्याज चढ़ाया जाता है. जी हां, हम बात कर रहे हैं सादुलपुर इलाके में स्थित ददरेवा धाम की, जहां गोगाजी और गुरु गोरखनाथ मंदिर में प्रसाद के रूप में प्याज चढ़ाया जाता है. प्याज चढ़ाने की ये परंपरा वर्षों साल पुरानी है. 

प्याज का ढेर:
सादुलपुर इलाके में स्थित ददरेवा धाम में पिछले आठ दिन से मेला चल रहा है. भक्तों द्वारा प्याज चढ़ाए जाने की वजह से यहां के गोगाजी और गुरु गोरखनाथ मंदिर में प्याज का ढेर लगा हुआ है. रक्षाबंधन के दूसरे दिन से मेला शुरु होता है और पूरे एक माह चलता है. इसमें सर्वाधिक भीड़ कृष्ण पक्ष की छठ, सप्तमी और अष्टमी तथा शुक्ल पक्ष की छठ, सप्तमी और अष्टमी को लगती है. मेले में करीब चार से पांच लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं. अधिकांश श्रद्धालु यूपी व बिहार के होते हैं. शुक्ल पक्ष में पंजाब से ज्यादा श्रद्धालु यहां आते हैं. यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु खील के साथ प्याज चढ़ाता है. इससे यहां करीब 50 से 60 क्विंटल प्याज इकट्ठा हो जाता है. 

पहले सस्ता होता था प्याज, इसलिए चढ़ाते थे:
करीब एक हजार साल पहले हनुमानगढ़ के गोगामेड़ी के पास गोगाजी और आक्रमणकारी महमूद गजनवी के बीच युद्ध हुआ था. तब गोगाजी ने विभिन्न स्थानों से सेनाएं बुलाई थीं. लड़ाई के लिए यहां आए सैनिक, अपने साथ रसद के तौर पर प्याज और दाल व खाने की सामग्री लेकर आए थे. इसके अलावा दूसरा कारण ये भी बताया जाता है कि खील, प्याज व दाल सस्ती होती है. 

गोगाजी का महल था ददरेवा में :
बताया जाता है कि गोगाजी की जन्मस्थली ददरेवा में गोगाजी का महल हुआ करता था. यहीं पर जाहरवीर गोगाजी का मंदिर भी है. मंदिर एवं गुरु गोरक्षनाथ टीले में धोक लगाने के बाद इस महल में धोक लगाकर जातरु अपनी यात्रा पूर्ण मानते हैं. वे गढ़ के अंदर दिल खोलकर चढ़ावा भी चढ़ाते हैं. नकदी के अलावा खील, बताशे एवं प्याज का विशेष तौर पर प्रसाद चढ़ाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि ददरेवा में आने वाला हर भक्त सबसे पहले गोरख गंगा में स्नान करता है. फिर उसी के पानी से खीर बना खाते हैं. यहां से वे गोगाजी मंदिर व गोरख टीला जाकर प्याज का प्रसाद चढ़ाते हैं. 

पुख्ता पुलिस सुरक्षा व्यवस्था:
मेले अन्तर्गत पर्याप्त पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की गई है. पुलिस उपाधीक्षक महावीर प्रसाद शर्मा तथा थानाधिकारी नरेश निर्वाण पुलिस दल के साथ सुरक्षा व्यवस्थाओं की देखरेख में जुटे हैं. 

ढ़ोल-नगाड़ों से गूंजा धाम:
ददरेवा गांव में हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, दिल्ली आदि से आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. हाथों में निशान लिए एवं ढ़ोल-नगाड़ेे बजाते हुए गोगाजी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की दुआ कर रहे हैं. वहीं ददरेवा में जगह-जगह ग्रामीणों की टोलियां लोकगीत गाते हुए परम्परागत संस्कृति का निर्वहन कर रहे थे. बांसुरी और अलगोजे की थाप पर नाचते-गाते गोगा भक्त अलग-अलग टोलियां बनाकर लोकगीत गाते नजर आए. वहीं लोकगीतों के रसिया लोग भी टोलियों में शामिल होकर गीतों का आनंद ले रहे थे. 

गोगाजी में आस्था:
यूपी, बिहार, दिल्ली आदि स्थानों से आने वाले श्रद्धालुओं में लोकदेवता गोगाजी के प्रति गहरी आस्था और लगाव है. ददरेवा में पहुंचने पर सबसे पहले ढ़ाब तालाब में स्नान कर ढ़ाब किनारे हिन्दू रीति-रिवाजों अनुसार गोगाजी की ज्योत लेकर पूजा करते है. बाद में गोरक्षनाथ के दर्शन करने के बाद गोगाजी के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते है. 

आज होगी अष्टमी की पूजा:
मेले अन्तर्गत आने वाले श्रद्धालु शनिवार को अष्टमी के दिन लोक देवता गोगाजी की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे तथा अष्टमी की पूजा के साथ ही प्रथम चरण का मेला समाप्त हो जायेगा. श्रद्धालु अष्टमी की पूजा के बाद गोगाजी समाधि-स्थल गोगामेड़ी पहुंचकर गोगानवमी की पूजा-अर्चना कर मन्नोतियां मांगेंगे. 

... सादुलपुर से नवीन जांगिड़ की रिपोर्ट 


 

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