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सुल्ताना के युवाओं की अनूठी पहल, रक्तदान कर मनाया ईद का पर्व

सुल्ताना के युवाओं की अनूठी पहल, रक्तदान कर मनाया ईद का पर्व

सुल्ताना: कोरोना काल में अस्पतालों को रक्त की कमी से जूझना ना पड़े, इसके लिए सुल्ताना के युवाओं ने इस बार अनूठे अंदाज में रक्तदान कर ईद मनाई. आपको बता दें कि देशभर में लॉकडाउन है, ऐसे में लोग रक्तदान कम कर रहे है. इसलिए सुल्तान के युवाओं ने ईद के मौके पर रक्तदान किया, ताकि किसी जरूरतमंद को रक्त काम आ सके. उन्होंने न केवल पूरे माह रोजे किए, बल्कि घर में ईद की नमाज अदा करने के बाद जरूरतमंदों के लिए रक्तदान शिविर में रक्त देने भी पहुंचे गए.

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कोरोना काल में रक्तदान कर मनाई ईद:
सामाजिक क्षेत्र में  काम कर रहे संगठन युवा जागरूकता समिति के माध्यम से सोमवार को 87 युवाओं ने कोरोना काल में रक्तदान कर ईद मनाई. एक माह के रोजे और कुरआन ए पाक की तिलावत करने के बाद गरीबों को खैरात और जकात देना दायित्वों में शामिल है. ऐसे में   कस्बे के युवाओं ने अपने युवा जागरूकता समिति के तत्वाधान में बीडीके अस्पताल की टीम द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर में पहुंचकर रक्तदान किया. 

नमाज पढने के बाद सीधे पहुंचे रक्तदान शिविर:
ईद की नमाज अता करने के बाद लोग अपने घर पहुंचकर परिवार और रिश्तेदारों के साथ त्योहार मनाते हैं, लेकिन इन युवाओं को कोरोना काल में लॉक डाउन के चलते अस्पतालों में रक्त की कमी ना हो, इसके लिए सीधे घर से नवाज अदा करने के बाद सीधे रक्तदान शिविर पहुंचे. जहां 87 युवाओं ने युवा जागरूकता समिति के माध्यम से बारी बारी से रक्तदान किया.

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गुढ़ागौड़जी (झुंझुनूं): झुंझुनूं का एक और जाबांज देश की सेवा और सुरक्षा करते हुए शहादत को प्राप्त हुआ हैं. झुंझुनूं के हुकुमपुरा निवासी शहीद नायब सूबेदार शमशेर अली को आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ नम आंखों से अंतिम विदाई दी. हर किसी आंख नम थी, तो देश के लिए जान कुर्बान करने का गर्व भी. शहीद के पिता रिटायर्ड नायब सूबेदार सलीम अली ने तो जोश भरे लहजे में चीन को चेतावनी भी दे डाली की यदि उन्हें मौका मिला तो वे हड्डियां तोड़ देंगे. 

शहीद शमशेर अली अमर रहे:
झुंझुनूं जिले का एक और जाबांज आज देश के लिए कुर्बान हो गया. अपने इस लाडले को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचे और नम आंखों से भारत मां के नारों के बीच विदाई दी. हुकुमपुरा गांव में शहीद शमशेर अली को सुपुर्द ए खाक किया गया. इससे पहले टोडी गांव से शहीद के घर तक करीब पांच किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा भी निकाली गई. वहीं इस दौरान भारत मां और शहीद शमशेर अली अमर रहे के नारे भी लगाए गए. जिला कलेक्टर यूडी खान, एसपी जेसी शर्मा, सांसद नरेंद्रकुमार, विधायक राजेंद्र गुढ़ा, पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, फतेहपुर निवासी हाकम अली, सीकर सभापति जीवण खां सहित अन्य जनप्रतिधियों तथा अधिकारियों ने अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए. वहीं उदयपुरवाटी विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि पूरे प्रदेश के लिए शायद गाजी खां का परिवार ही मिसाल है. जिनकी चार पीढियों के 17 लोग या तो सेना में रहकर देश सेवा कर चुके है या फिर कर रहे है. अभी भी पांचवीं पीढी दुश्मनों को जवाब देने के लिए देश सेवा में जाने को तैयार है.

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चीन को ललकारा और पाकिस्तान को चेताया:
शहीद के पिता रिटायर्ड नायब सूबेदार सलीम अली इस दौरान अपने बेटे के खोने के गम में टूट गए हो. चाहे उनको सेना से रिटायर हुए भी 23 साल हो गए हो. लेकिन उन्होंने पूरे जोश के साथ चीन को ललकारा और पाकिस्तान को चेताया. उन्होंने कहा कि उनका बेटा गया है. उसका दर्द तो है. लेकिन उनके परिवार की पांचवीं पीढी भी सेना को जाने को तैयार है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन को वे बता देना चाहते है कि उनका दूसरा बेटा भी अभी फौज में है और पोता जाने को तैयार है. इसलिए वे देश के लिए तरफ आंख उठाकर भी देखेंगे तो उनको जवाब दिया जाएगा. साथ ही कहा कि उन्हें सेना से रिटायर हुए 23 साल हो गए है. लेकिन आज भी उन्हें मौका मिला तो वे चीन की ह​ड्डियां तोड़ सकते है.

शहीद के पिता ने भी लड़ी थी 1965 की लड़ाई:
शहीद के पिता रिटायर्ड नायब सूबेदार सलीम अली ने बताया कि उनके बेटे ने आज उनका सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है. इतने हजारों लोगों ने आकर उनके बेटे को विदा किया है और देश की सुरक्षा में उनकी जान गई है. इससे बड़ी बात उसके लिए कुछ नहीं हो सकती. उसने केवल परिवार, फैज नगर, हुकुमपुरा या फिर ग्राम पंचायत बामलास का नहीं. ​बल्कि देश का नाम रोशन किया है. उन्होंने बताया कि उनकी चार पीढिया फौज में है. उनके पिता ने 1965 की लड़ाई लड़ी थी. उनका बेटा चीन से लोहा लेते वक्त देश के लिए शहीद हो गया. वैसे भी शहीद मरते नहीं, अमर हो जाते है. गांव के रामावतार धींवा ने बताया कि हुकुमपुरा गांव का नायब सूबेदार शमशेर अली पहला शहीद है. जिसने चाइना बॉर्डर पर चीन से लोहा लेते समय अपनी जान गंवाई है.

भारत-चीन सीमा पर पेट्रोलिंग के दौरान हुए शहीद:
आपको बता दें कि 42 वर्षीय शमशेर अली वर्तमान में अरूणाचल प्रदेश के टेंगा में 24 ग्रेनेडियर यूनिट में तैनात थे. वे 9 अप्रैल 1997 को जबलपुर में सेना में भर्ती हुए थे. वे भारत-चीन सीमा पर पेट्रोलिंग के दौरान शहीद हुए. वे उनकी प्रार्थिव देह शनिवार को उनके पैतृक गांव पंहुची, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनको सुपुर्द ए खाक किया गया. परिवार में शहीद के पिता सलीम अली, मां नथी बानो, पत्नी सलमा बानो, दो बेटे एक 16 वर्षीय आलम शेर व दूसरा 12 वर्षीय गुलशेर तथा आठ साल की बेटी शाहीन है, तीनों बच्चे अभी पढाई कर रहे है. शमशेर अली अपने तीन भाईयों में सबसे बडे थे. उनसे छोटा भाई जंगशेर अली भी सेना में सेवारत है. शहीद के परिवार की चार पीढियों सहित कुल 17 जने देश सेवा में है. इनमें से तीन रिटायर्ड हो चुके है. समशेर अली के पिता सलीम अली भी सेना में नायब सुबेदार के पद से रिटायर्ड है. सलीम के पिता फैज मोहम्मद भी फौज में सेवा दे चुके है व उनके पिता बागी खां भी देश सेवा में रहे.

शहीद की बेटी ने शहीद पिता की प्रतिमा पर बांधी राखी...कहा- याद तो बहुत आती है, लेकिन गर्व तुम पर

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सुल्ताना(झुंझुनूं): रक्षाबंधन…भाई-बहन की पवित्र रिश्ते का त्यौहार. इस हिन्दू पर्व पर बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासुत्र (राखी)बांधकर अपने भाई की लम्बी आयु की कामना करती है. लेकिन जब एक भाई वीरगति को प्राप्त हो जाता है और जब उसकी बहन उसकी कलाई पर राखी बन्धवाने की मनुहार करती है और उसकी वेदना को समझा जा सकता है. 

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आज हम आपको एक ऐसी ही बेटी के बारे में बता रहे हैं जिसके पिता वीरगति को प्राप्त हो चुके है. फिर भी बेटी अपने पिता के बहन नहीं होने पर हर रक्षाबंधन के त्यौहार पर अपने शहीद पिता की प्रतिमा स्मारक पर पहुंचकर अपने पिता की प्रतिमा की कलाई पर राखी बांधती है. मन में वेदना भी होती है और गर्व भी. हम बात कर रहे है सैनिकों के गांव ढाणी बाढ़ान की जहां हर घर जवान सेना में अपनी सेवाएं दे रहा हैं. 

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शहीद की बेटी रजनी कंवर का कहना है कि उन्हें अपने पिता की कलाई पर राखी बांधकर हमेशा गर्व महसूस होता है. चाहे वो अब उनके बीच न हो, लेकिन फिर भी वे रक्षाबंधन के पर्व पर हर बार उनकी प्रतिमा स्मारक पर पहुंचकर उन्हें राखी बांधती है. रजनी बताती है कि शहीद मुंशी हमेशा ही उन्हें सपोर्ट किया. सेना में जाने से पहले भी वे सदैव लड़कियों को आगे बढ़ने की सोच रही. बेटियों को हमेशा सपोर्ट किया. रजनी कंवर अपने शहीद पिता मुंशी सिंह को याद करती है और उनकी यादे आज भी आती है. लेकिन देश के लिए वीरगति को प्राप्त होने पर उन्हें अपने पिता पर गर्व भी है. 

झुंझुनूं का जांबाज लाड़ला हुआ देश के लिए शहीद, कालिंडा गांव के मोहसिन खान हुए शहीद

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बिसाऊ (झुंझुनूं): झुंझुनूं जिला देश की सेवा में सरहद पर अपनी एक अलग ही पहचान के नाम से विख्यात वीरो की भूमि झुंझुंनू जिले के शेखावाटी का एक और जांबाज लाडला देश सेवा करते समय वीरगति को प्राप्त हो गया. 16 ग्रेनिडियर में कार्यरत मोहसिन जम्मु कश्मीर के क्षेत्र नौशेरा में अपनी ड्यूटी करते समय पाकिस्तान की और से की गई सीज फायर का उल्लंघन में हुई मुठभेड में वीरगति को प्राप्त हो गए.

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एक माह पूर्व ही छुट्टी काटकर गए थे ड्यूटी पर:
शहिद मोहसिन खान एक माह पूर्व ही छुट्टी काटकर अपनी ड्यूटी पर गये थे.परिजनों के मुताबिक मोहसिन खान अविवाहित था जिसका रिश्ता कुछ दिन पूुर्व ही तय हुआ था. शहिद होने की सुचना घर पर आते ही कोहराम मच गया। चार भाई बहिनों में मोहसीन खान सबसे छोटा सदस्य था. शहिद के पिता सरवर अली खान भी सेना के सुबेदार से सेवानिवृत हुए है. वहीं उनके परिवार में 12 सदस्यों में से चाचा और ताऊ भी सेना में अपनी सेवाए दे चुके है. वहीं एक छोटा भाई सेना में जाईनिग करने के इतेजार में है जिसका कोरोना के चलते जोइनिग नही हुई है. शहिद मोहसीन ने सितम्बर 2017 में जबलपुर में टेनिंग करने के बाद पठान कोट में ड्यूटी करने के बाद वर्तमान में जम्मू कश्मीर के नौशेरा में तैनात था.

पार्थिव देह को किया सुपुर्द ए खाक: 
पार्थिव देह शाम 5 बजे कोलिण्डा गांव उनके निवास पर पहुंची, जंहा सेना की टुकड़ी द्वारा गार्ड आफ आनर दिया गया. हजारों की संख्या में युवाओं ने देशभक्ति के नारे लगाते हुए भारत माता के जयकारों के साथ कब्रिस्तान पहुंचे. कब्रिस्तान पहुंचने के पश्चात सलामी दी. वहीं सांसद नरेन्द्र खीचड़, प्यारेलाल ढुकिया, गिरधारी लाल प्रधान, सेना के जवानों ने पुष्प चक्र अर्पित किये. तिरंगे को शहिद के पिता सुबेदार सरवर अली खान को सौंपा. कब्रिस्तान में नमाज अदा कर पुष्प चक्र अर्पित कर शहिद की पार्थिव देह को सुपुर्द ए खाक किया गया.

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टिड्डियों के हमले को लेकर कृषि विभाग अलर्ट

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बिसाऊ(झुंझुनू): बिसाऊ क्षेत्र में टिड्डयों का नियंत्रण जब तक किसान सहयोग नहीं करेगे तब तक विभाग अकेला कुछ नहीं कर सकता है. इस लिये किसान टिड्‌डी नियंत्रण टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करे. सुबह क्षेत्र में विभाग द्वारा चलाये जा रहे टिड्‌डी नियंत्रण कार्य का निरक्षण करने आये कृषी विभाग के आयुक्त डॉ ओमप्रकाश ने किसान गोष्टी में कही. यह किसान गोष्टी कस्बे के राणासर रोड पर स्थीत अरविंद आश्रम फार्म हाउस पर पालिकाध्यक्ष मुस्ताक खान की अध्यक्षता में हुई जिसमें क्षेत्र के निराधनू, टांई, बाडेट, श्यामपुरा, पूनीया का बास सहित एक दर्जन गांवों से आये किसानों ने भाग लिया. 

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टिड्‌डी नियंत्रण कार्य के बारे में जानकारी ली:  
आयुक्त ने किसानों से टीम द्वारा किये जा रहे टिड्‌डी नियंत्रण कार्य के बारे में जानकारी ली व सुझाव भी मांगे. आयुक्त ने किसानों को फसल पर होने वाले टिड्डीयों के हमले से कैसे बचा जाऐ उसके बारे में जानकारी दी और कहा की टिड्डियों के हमले के समय धुआं व आवाज करें. यह टिड्डियां 150 से 200 किलो मिटर की रफतार से उड़ती है. यह समय इनके मेटिंग का है जहां भी पड़ाव डालेगी वहां अंडे देगी. इन अंडो से निकलने वाला फाका 8 से 10 दिन में चलने लग जाता है. इन से फसलों को बचाने के लिये पारम्परिक तरिके अपनाये. टिडिडयों के नियंत्रण के लिये विभाग ट्रेक्टर, पानी के टेंकर, हेलिकाप्टर भी लगा रखे हैं. सर्वे के लिये अधिकारियों को गाडियां उपलब्ध करवा रखी है. गौष्टी में विभाग के संयुक्त सचिव डॉ एसपी सिंह ने भी किसानो को टिड्‌डी दल व फाके से फसलों के बचाव हेतू कई जानकारिया दी.

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90 प्रतिशत टिड्‌डी दल पर नियत्रंण कर लिया: 
सिंह ने बताया की विभाग ने नई टेक्नोलोजी अपना कर 90 प्रतिशत टिड्‌डी दल पर नियत्रंण कर लिया है. किसान ध्यान रखे फसलों व सब्जियों में स्प्रे के 10 दिन बाद ही काम करे. फाके को मारने के लिये खेतों में एक से डेढ फुट गहरी व एक फुट चोडी खाई खोदे जिसमें फाका खाई में गिरकर मर जाएगा. सिंह ने बताया की टिड्‌डी दल को हवा से एनर्जी पावर मिलता है. पड़ाव के समय इन्हे मारने के लिये नीम व उनकी निबोंली को पानी में उबाल उसका छीड़काव भी कारगर है. पालिकाध्यक्ष खान ने टिड्‌डी दल नियंत्रण में विभाग को पालिका की और से सहयोग देने का आश्वासन दिया है. गोष्टी से पूर्व आयुक्त व संयुक्त सचिव ने सहायक निदेशक डॉ विजयपाल कंस्वा व अन्य अधिकारियों के साथ आश्रम के फार्म हाउस पर टिड्‌डयों द्वारा दिये गये अंडो को व उनमें से निकलने वाले जीवो को देखा. इस मौके पर सीकर के कृषी संयुक्त निदेशक प्रमोद कुमार, उपनिदेशक कृषी डॉ. राजेद्र लांबा, सहायक निदेशक विजयपाल कंस्वा, सीकर के कृषी अधिकारी सर्जनसिंह व फार्म हाउस की देखरेख करने वाले मैनेजर ओमप्रकाश जोशी व आश्रम के पदाधिकारी भी मोजूद रहे. 

झुंझुनूं में चौथी बार टिड्डी दल का हमला, फसलों को हुआ नुकसान, किसान परेशान 

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सुल्ताना: झुंझुनूं में इस समय टिड्डियां किसानों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनी हुई है. कोरोना की पहले से मार झेल रहे किसानों की फसलों पर इस समय आसमान में उड़ते आतंकि लगातार कहर बरपा रहे है. जिसकी वजह से किसानों की की नींद उड़ी हुई है. जिले में बीते सात दिन में टिड्डियों ने तीसरी बार हमला बोला है.

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फसलों और बगीचों को पहुंचाया नुकसान:
मंगलवार दोपहर को करीब एक किलोमीटर लंबे टिड्डी दल ने सोलाना, क्यामसर, किशोरपुरा, श्री अमरपुरा,किठाना,घरडाना,मानोता, चिड़ासन ,लोयल और आसपास के गांवों में खेतों में खड़ी फसल पर हमला बोला. टिड्डियों ने खेतों में खड़ी बाजरे,मूंगफली,कपास ,चारे की फसल और बगीचों में नुकसान पहुंचाया हैं.

फसलों को बचाने के लिए किसानों का प्रयत्न जारी:
टिड्डियों से फसलों को बचाने के लिए किसान खेतों में पीपा,परात, थाली और पटाखे बजाकर ध्वनि करते हुए फसलों को बचाने की जद्दोजहद करते नजर आए. जिले में लगातार टिड्डी दल के हमले से किसान चिंतित है. एक सप्ताह में तीन बार टिड्डी दल के हमले की सूचना के बावजूद कृषि विभाग द्वारा टिड्डियों के नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए जिसके कारण किसानों को अपने स्तर पर ही फसलों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

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सुल्ताना में एक खेत में अधेड़ ने की आत्महत्या, थानाधिकारी के नाम छोड़ा सुसाइड नोट

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सुल्ताना: झुंझुनूं के सुल्ताना कस्बे में किठाना रोड पर एक खेत में अधेड़ के शव की सूचना के बाद सनसनी फैल गई. पास के खेत में काम करने वाले लोगों ने सुल्ताना चौकी को इसकी सूचना दी जिसके बाद सुल्ताना चौकी से एएसआई ओमप्रकाश भांबू मौके पर पहुंचे. पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट और एक बोतल मिली. जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया.

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शव का कराया पोस्टमार्टम:
सुसाइड नोट के आधार पर अधेड़ की पहचान सुल्ताना निवासी उम्मेद सिंह राजपूत के रूप में हुई. सुल्ताना पुलिस ने परिजनों को इसकी सूचना दी. पुलिस की सूचना के बाद परिजन मौके पर पहुंचे. पुलिस ने परिजनों को सुसाइड नोट की जानकारी दी. मामले की गंभीरता को देखते हुए चिड़ावा थानाधिकारी लक्ष्मीनारायण सैनी घटनास्थल पहुंचे और जानकारी ली. परिजनों ने बताया कि उम्मेद सिंह एक कम्पनी में गार्ड का काम करता है और मार्च माह में अपने पुत्र की शादी में सुल्ताना आया था. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया है.

सुसाइड नोट खोलेगा राज:
मृतक ने थानाधिकारी के नाम एक सुसाइड नोट छोड़ा है. मृतक हिंडाल्को कंपनी में गार्ड का काम करता था. पुलिस को एक अन्य सुसाइड नोट में किस दवा का सेवन किया गया है उसकी जानकारी मिली है.

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बिसाऊ(झुंझुनूं): जिले के बिरमी गांव में मारपीट की घटना की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस को पत्थरबाजी का सामना करना पड़ा. घटना में सात लोगों सहित एक सिपाई के भी चोट आई. थानाधिकारी रिया चोधरी ने बताया कि गांव बिरमी में दो जनों के बिच किसी बात को लेकर विवाद था देर शाम को पारपीट के लिये बाहर से लोगों को भी बुलाया गया. टेलीफोन से सूचना मिली कि बिरमी गांव में आपसी दो पक्षों में झगड़ा हो रहा है और बाहर से भी 15 से 20 लोग बुला रखे हैं और गांव में रह रहे एक बिहारी के साथ मारपीट कर रहे हैं. सूचना पर जाप्ते के साथ मौके पर पहुंची वहां देखा तो गांव के चोक में 50 से 60 लोग इकट्ठे हो रहे थे उनसे बात की तो उन्होंने बताया की बाहर से लोग 15 से 20 आए हैं और मारपीट कर रहे हैं और बिहारी के हाथ पाव तोड़ दिए हैं और खेतों की तरफ चले गए हैं.

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थाने के सिपाई के चोट आई और गाड़ियों को पत्थर मारकर तोड़ दिया: 
वहां देखा तो तीन चार गाड़ियों में 15 से 20 लोग इकट्ठे हो रहे थे उनसे जानकारी ली और 151 में गिरफ्तार कर थाने लाते समय वापसी आने पर गांव में बनी चरणों की ढाणी के चोक में लोगों ने पिकअप गाड़ी लगाकर रास्ता बंद कर रखा था. थाने की गाड़ी के बीच में दूसरी गाड़ी में बैठे लोगों पर पत्थर फेंकने चालू कर दिए. जिस पर थाने के सिपाई के चोट आई और गाड़ियों को पत्थर मारकर तोड़ दिया जैसे तैसे बीच-बचाव कर वहां से निकले तो आगे एक स्कॉर्पियो गाड़ी टूटी हुई मिली. जिसमें 4-5 लोग घायल अवस्था में मिले. उनको वहां से बिसाऊ के जटिया हॉस्पिटल ने प्राथमिक उपचार करवाया जो 2 लोगों के ज्यादा चोट लगने पर उन्हें झुंझुनू रेफर कर दिया. अभी तक दोनों पक्षों ने किसी भी प्रकार की रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई है. लेकिन इसी बीच थाने के सिपाहियों पर मारपीट करने पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है जिसकी हम जांच कर रहे हैं. इसमे कुछ लोग नामजद है कुछ बिना नामजद भी है अनुसंधान कर रहे हैं.

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पर्यावरण संरक्षण के लिए कर ली पौधों से दोस्ती, 9 सालों में लगाए पैंतालीस हजार पौधे

पर्यावरण संरक्षण के लिए कर ली पौधों से दोस्ती,  9 सालों में लगाए पैंतालीस हजार पौधे

सुल्ताना: आज विश्व पर्यावरण दिवस है. ये हर साल दुनिया भर में 5 जून को मनाया जाता है. इस मौके पर एक शख्स के बारे में आपको बताते है, जिन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधों से दोस्ती कर ली. ये शख्स राजस्थान के झुंझुनूं जिले के सुल्ताना के सोलाना गांव का रहने वाला है. इनका पर्यावरण संरक्षण के प्रति ऐसा समर्पण की सालाना लाखों रुपये खर्च कर झुंझुनूं जिले के सार्वजनिक जगहों पर छायादार पौधें लगा रहे हैं. आपको बता दे कि सोलाना के होशियार सिंह पिछले 9 साल से ग्लोबल वार्मिंग को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण संरक्षण का काम कर रहे हैं. उन्होंने अपने खेत की चार बीघा जमीन पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कर रखी हैं. इस जगह से हर साल हजारों पौधे तैयार कर उनको सार्वजनिक जगहों पर लगाया जाता है.

दूर दूर फैले रेतीले धोरे हो जाये हरे भरे: 
होशियार सिंह चाहते है कि दूर दूर फैले रेतीले धोरे हरे भरे हो जाए. जब भी श्मशान भूमि में अंतिम संस्कार में जाते तो वहाँ बैठने के लिए छायादार जगह नही होने से विचार आया क्यों न इन जगहों पर छायादार पौधे लगाए जाए. फिर ग्लोबल वार्मिंग के बारे में पढ़ा तो जहन में इस समस्या से निपटने का एक मात्र उपाय हरियाली ही सूझा. फिर क्या था. इन्होंने अपने खेत की चार बीघा जमीन में पौधे तैयार कर गांव गांव ढाणियों के सार्वजनिक जगहों पर स्वयं के साधनों से पहुंचाने और लगाने लगे.

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हर साल पौधे लगाने में लाखों रुपए खर्च:
दूर दराज लगाए गए इन पौधों पर जब किट या रोग लग जाता है तो उसकी सार संभाल भी करने भी स्वयं जाते है. उनके इसी पर्यावरण संरक्षण प्रेम की वजह से हर साल पौधे लगाने में लाखों रुपए खर्च हो जाते है. इस बार उनके यहां बरगद,पीपल, नीम, पापड़ी, बकाण जैसे छायादार पौधे निशुल्क वितरण के लिए तैयार हो रहे हैं.

पौधे से किया बेटी का कन्यादान:
सोलाना के होशियारसिंह ने अपनी पुत्री दीपिका की शादी में भी अनूठी पहल की. बेटी की शादी में कन्यादान में पौधा दिया था. इसके साथ साथ गांव में होने वाले मांगलिक कार्यों में भी पौधारोपण करवा कर ये इसे गांव की परम्परा बनना चाहते हैं.

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जिलेभर में 9 सालों में लगाए पैंतालीस हजार पौधे:
जिलेभर के गांवों में युवाओं की मदद 9 सालों से स्कूल, उप स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन, मुक्तिधाम, कब्रिस्तान,खेल मैदान के साथ साथ आम रास्तों और खेतों की मेड़ो में  करीब पैंतालीस हजार से अधिक पौधे लगावा चुके हैं. किसान बताते हैं कि उत्तर दिशा की मेड़ों में पौधे लगने से उनकी फसल सर्दी और पाले से बची रहती है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुल्ताना से कृष्ण सिंह शेखावत की रिपोर्ट

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