Covid 19 को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीरः वैक्सीन के अलग-अलग रेट पर केंद्र को किया तलब, 28 अप्रैल तक मांगा जवाब

Covid 19 को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीरः वैक्सीन के अलग-अलग रेट पर केंद्र को किया तलब, 28 अप्रैल तक मांगा जवाब

Covid 19 को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीरः वैक्सीन के अलग-अलग रेट पर केंद्र को किया तलब, 28 अप्रैल तक मांगा जवाब

नई दिल्ली: कोरोना की दूसरी लहर से पूरा विश्व त्रस्त है ऐसे में भारत में भी कोरोना ने जमकर कोहराम मचा रखा है. संक्रमण से लोग अकाल मर रहे है. देश में ऑक्सीजन की किल्लत लगातार जारी है. ऐसे के देश की सबसे बड़ी न्यायपालिका सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) भी आमजन और कोरोना को लेकर गंभीर है. कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन की किल्लत (Oxygen Shortage) और दूसरी परेशानियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई. कोर्ट ने केंद्र से  वैक्सीनेशन  को लेकर भी सवाल किया है.  कोर्ट ने पुछा कि अभी कोवीशील्ड और कोवैक्सिन जैसी दो वैक्सीन उपलब्ध हैं. सभी को वैक्सीन लगाने के लिए कितनी वैक्सीन की जरूरत होगी? इन वैक्सीन के अलग-अलग दाम तय करने के पीछे क्या तर्क और आधार हैं? कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि संकट से निपटने के लिए आपका नेशनल प्लान क्या है? क्या वैक्सीनेशन ही मुख्य विकल्प है.

हमें लोगों की जिंदगियां बचाने की जरूरत है: कोर्ट 
सुनवाई की शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि हमें लोगों की जिंदगियां बचाने (Save Lives) की जरूरत है. जब भी हमें जरूरत महसूस होगी, हम दखल देंगे.  राष्ट्रीय आपदा के समय हम मूकदर्शक नहीं बने रह सकते हैं. हम हाईकोर्ट्स की मदद की जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं. इस मामले में उन अदालतों (High Courts) को भी अहम रोल निभाना है. सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 30 अप्रैल को सुनवाई करेगी. . 

केंद्र ऑक्सीजन को लेकर मौजूदा  स्थिति स्पष्ट करे: 
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को पांच मुख्य निर्देश देते हुए जल्द जवाब मांगा है. SC ने केंद्र से पूछा है कि ऑक्सीजन की सप्लाई (Suplly Oxygen) को लेकर केंद्र को मौजूदा स्थिति स्पष्ट करनी होगी. कितनी ऑक्सीजन है? राज्यों की जरूरत कितनी है? केंद्र से राज्यों को ऑक्सीजन के अलॉटमेंट का आधार (Allotment Basis) क्या है? राज्यों को कितनी जरूरत है, ये तेजी से जानने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई गई है?

वैक्सीन के रेट पर भी कोर्ट का कड़ा रुख:
कोर्ट ने केंद्र से  वैक्सीनेशन  को लेकर भी सवाल किया है. कोर्ट ने पुछा कि अभी कोवीशील्ड और कोवैक्सिन (Covishield and Covaxin) जैसी दो वैक्सीन उपलब्ध हैं. सभी को वैक्सीन लगाने के लिए कितनी वैक्सीन की जरूरत होगी? इन वैक्सीन के अलग-अलग दाम तय करने के पीछे क्या तर्क और आधार हैं? गंभीर होती स्वास्थ्य जरूरतों को बढ़ाया जाए. कोविड बेड्स भी बढ़ाए जाएं. वो कदम बताइए जो रेमडेसिविर और फेवीप्रिविर (Remadecivir and Faviprivir) जैसी जरूरी दवाओं की कमी को पूरा करने के लिए उठाए गए. 28 अप्रैल तक जवाब दें कि युव आबादी के वैक्सीनेशन के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्या मामले हैं.

केंद्र ने कहा- प्रधानमंत्री खुद समस्याओं पर ध्यान दे रहे हैं:
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार हाई लेवल (High Leval) पर इस मसले पर काम कर रही है. परेशानियां दूर करने के लिए प्रधानमंत्री खुद इसे देख रहे हैं. हम हालात को बहुत सावधानी से संभाल रहे हैं.

अदालत ने पिछली सुनवाई में मांगा था 4 पॉइंट्स पर नेशनल प्लान:
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में ही कहा था कि कोरोना और ऑक्सीजन जैसे मुद्दों पर छह अलग-अलग हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. इससे कन्फ्यूजन पैदा हो सकता है. कोर्ट ने ये भी स्पष्ट किया था कि हाईकोर्ट के मामलों पर सुनवाई का मतलब केस ट्रांसफर (Case Transfor) करना नहीं है. हाईकोर्ट्स आगे बढ़ें और फैसले लें. 


सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कोरोना के बिगड़ते हालात पर 4 पॉइंट में  मांगा था नेशनल प्लान:
सुप्रीम कोर्ट ने हाल में हुई सुनवाई में केंद्र से 4 बिंदुओं पर नाशना प्लान मांगा था. कोर्ट ने पूछा था कि राजधानी दिल्ली सहित कई राज्यों में ऑक्सीजन सप्लाई की कमी बनी हुई है और मरीजों की जान जा रही है.  पूरे देश में 1 मई से वैक्सीनेशन का तीसरा फेज शुरू हो रहा है, लेकिन राज्यों में वैक्सीन की किल्लत बनी हुई है. कोरोना के इलाज में उपयोग होने वाली दवाओं की हर राज्य में कमी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि लॉकडाउन (Lockdown) लगाने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं होना चाहिए. ये राज्य सरकार के अधीन हो. 

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