close ads


हरिद्वार में चार अवैध धार्मिक ढांचे ध्वस्त करने के लिए न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को दिए आदेश

हरिद्वार में चार अवैध धार्मिक ढांचे ध्वस्त करने के लिए न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को दिए आदेश

नई दिल्लीः उच्चतम न्यायालय ने 2021 के ‘कुम्भ मेले’ के मद्देनजर गुरुवार को उत्तराखंड सरकार को आदेश दिया कि हरिद्वार में सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से निर्मित चार धार्मिक ढांचे 31 मई तक ढहा दिए जाने चाहिए.

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि आवेदन में बताए गए कारणों और खासकर 2021 के ‘कुम्भ मेले’ जो 15 अप्रैल, 2021 को खत्म होगा, हमारा मानना है कि राज्य सरकार को 31 मई, 2021 तक इन अवैध ढांचों को गिरने की अनुमति दी जानी चाहिए. 

इस मामले में हस्तक्षेप करने वाले संगठन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अधिवक्ता का कहना था कि इन ढांचों को गिराया नहीं जाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि ये धार्मिक ढांचे राज्य के सिंचाई विभाग की जमीन पर बनाए गए हैं लेकिन यह जमीन ‘कुम्भ’ के दौरान परिषद को आवंटित की गई थी.

पीठ ने कहा कि जैसा भी है, आवंटन, अगर कोई है, तो अस्थाई है और कोई स्थाई ढांचा निर्मित नहीं किया जा सकता है और उसे गिराया जाएगा. हरिद्वार के बैरागी शिविर पर बने जिन चार धार्मिक ढांचों को गिराया जाना है उनमें ‘निर्मोही अखाड़ा’, ‘निर्माणी आदि अखाड़ा’, ‘भैयादास दिगम्बर अखाड़ा’ और ‘निरंजनी अखाड़ा’ शामिल हैं.

राज्य सरकार ने उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आठ अक्टूबर के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत में अपील दायर की थी. उच्च न्यायालय ने हरिद्वार में निर्मित इन अवैध ढांचों को ढहाने की अवधि ‘कुम्भ मेला 2021’ संपन्न होने तक बढ़ाने से इंकार कर दिया था. राज्य सरकार ने इससे पहले उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि देहरादून सहित विभिन्न जिलों में सार्वजनिक भूमि पर निर्मित लगभग सभी धार्मिक ढांचे हटा दिए गए हैं लेकिन उसे हरिद्वार में ऐसे ढांचों को हटाने के लिए समय चाहिए क्योंकि इनमें से अधिकांश का इस्तेमाल ‘कुम्भ मेला’ आयोजित करने के लिए होगा.

उच्च न्यायलाय ने शीर्ष अदालत के सात दिसंबर, 2009 के आदेश के बाद इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था. शीर्ष अदालत ने इस आदेश में कहा था कि मंदिर, मस्जिद, गिरिजाघर या गुरूद्वारे आदि के नाम पर किसी भी सार्वजनिक मार्ग, सार्वजनिक पार्क या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी अनधिकृत निर्माण नहीं किया जाएगा. शीर्ष अदालत ने राज्य सरकारों को धार्मिक किस्म के ऐसे अनधिकृत निर्माणों के बारे में एक नीति तैयार करने का भी निर्देश दिया था. शीर्ष अदालत ने 31 जनवरी, 2018 को कहा था कि 2009 के आदेश पर अमल की निगरानी संबंधित उच्च न्यायालयों को करनी चाहिए और इसके साथ ही उसने प्रभावी तरीके से आदेश पर अमल सुनिश्चित करने के लिए इस मामले को उच्च न्यायालयों के पास भेज दिया था.

न्यायालय के 2009 के आदेश का अनुपालन करते हुए राज्य सरकार ने 17 मई, 2016 को ‘सार्वजनिक मार्गों, सार्वजनिक पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर अनधिकृत धार्मिक ढांचों को हटाने, अन्यत्र ले जाने और उन्हें नियमित करने के लिए उत्तराखंड नीति, 2016 तैयार की थी. उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दो जनवरी, 2020 को इस मामले की स्वत: सुनवाई के दौरान पाया कि उत्तराखंड सरकार की 17 मई, 2016 की नीति पर पिछले साढ़े तीन साल से भी ज्यादा समय से अमल ही नहीं हुआ है.
सोर्स भाषा

और पढ़ें