लोकसभा में आज सरोगेसी नियमन विधेयक-2019 पेश, जानें क्या है प्रावधान 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/15 04:53

नई दिल्ली: स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉक्‍टर हर्षवर्धन ने आज लोकसभा में सरोगेसी नियमन विधेयक 2019 पेश किया. हालांकि पिछली लोकसभा से यह विधेयक पारित हो चुका था, लेकिन लोकसभा भंग होने के कारण यह रद्द हो गया. इसके माध्‍यम से भारत में कमर्शियल सरोगेसी को प्रतिबंधित किया जाना और नैतिक सरोगेसी की अनुमति देना है.

केन्‍द्र और प्रदेश स्तर पर सरोगेसी बोर्ड:
दरअसल यह विधेयक केन्‍द्र स्‍तर पर नेशनल सरोगेसी बोर्ड तथा राज्‍यों और केन्‍द्रशासित प्रदेशों में राज्‍य सरोगेसी बोर्ड और समुचित प्राधिकरण गठित कर सरोगेसी पर नियमन का प्रावधान करता है. इसका उद्देश्‍य सरोगेसी पर प्रभावी नियमन के साथ-साथ कमर्शियल सरोगेसी पर पाबंदी लगाना और संतान पैदा करने में असमर्थ विवाहित भारतीय दंपति को नैतिक सरोगेसी के इस्तेमाल की अनुमति देना है. 

नैतिक सरोगेसी:
नैतिक सरोगेसी के अंतर्गत महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष की के बीच और पुरुष की 26 से 55 वर्ष के बीच होनी चाहिये. उनके विवाह को कम से कम पाँच साल बीत जाने के बाद ही वे किराये की कोख का इस्तेमाल कर सकेंगे. इस विधेयक में सरोगेट माँ का शोषण रोकने और उनका तथा सरोगेट बच्चों के  अधिकार तय करने का भी प्रावधान है. इसमें सरोगेसी के लिए मानव भ्रूण की  बिक्री या आयात पर कम से कम 10 साल की सजा और अधिकतम 10 लाख रुपये के  जुर्माने की व्यवस्था की गई है. जिस महिला को सरोगेट मां बनाया जायेगा उसका भारतीय नागरिक तथा संतान चाहने वाले दंपति का निकट संबंधी होना अनिवार्य होगा. साथ ही यह भी जरूरी किया गया है कि वह कभी न कभी शादीशुदा रही हो और उसकी अपनी संतान हो चुकी हो. उसकी उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होना जरूरी होगा. 

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