प्रतिबंध के बावजूद पहुंच रहे है संदिग्ध, सरहदी क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने की दरकार

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/10/21 09:10

जैसलमेर: सीमावर्ती जैसलमेर जिले के पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज में गत दिनों एक संदिग्ध व्यक्ति के पकड़े जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए. जांच में वह व्यक्ति हालांकि मानसिक विक्षिप्त निकला, लेकिन पूरी तरह से प्रतिबंधित क्षेत्र में आए दिन संदिग्ध व्यक्तियों के प्रवेश कर जाने से सुरक्षा व्यवस्था में सेंध अवश्य लग रही है. हालांकि पुलिस, सेना व सुरक्षा एजेंसियों की ओर से चौकसी करते हुए प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करते ही संदिग्धों को दस्तयाब कर लिया जाता है, लेकिन ये लोग सीमावर्ती जिले में किस प्रकार आते हैं और किस तरह इतने सुरक्षा बंदोबस्तों वाले प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश कर जाते हैं, यह एक पहेली बन गया है.  

सीमावर्ती जिले में पूर्व में भी संदिग्ध गतिविधियां हो चुकी: 
गौरतलब है कि जिलेभर में सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इन दावों की पोल ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों के प्रवेश से खुलती नजर आ रही है. जिन पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है. पोकरण फिल्ड फायरिंग के साथ जिले के नाचना, नोख, मोहनगढ़, रामगढ़ सहित सीमावर्ती थानाक्षेत्र बाहरी लोगों के लिए प्रतिबंधित है. यहां बाहरी व्यक्ति को प्रवेश से पूर्व इलाके के उपखण्ड मजिस्ट्रेट से इजाजत लेनी पड़ती है. बिना इजाजत प्रवेश करने पर उन्हें गिरफ्तार करने की कार्रवाई के लिए कानून बने हुए हैं. नियमों, कानून व प्रतिबंध के बावजूद आए दिन क्षेत्र में संदिग्ध लोगों का आगमन होता है और वे बिना किसी रोकटोक क्षेत्र में घूमते हैं. सीमावर्ती जिले में पूर्व में भी संदिग्ध गतिविधियां हो चुकी हैं. कई बार जासूसी प्रकरणों में लिप्त लोगों को पकड़ा गया है, तो कुछ लोगों को प्रतिबंधित सेटेलाइट फोन के साथ भी पकड़ा गया है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां सतर्कता के साथ कार्य करती है. बावजूद इसके आए दिन संदिग्ध गतिविधियों, व्यक्तियों के प्रतिबंधित क्षेत्रों में आने की घटनाएं हो रही है. हालांकि पुलिस का कहना है की हम हर समय अलर्ट है. सभी सुरक्षा एजेंसियों से हमारा तालमेल रहता है.  

निवासी को भी लेनी होगी अनुमति: 
जैसलमेर जिले के कई गांव ऐसे भी है जो प्रतिबंधित क्षेत्र में शामिल है. यहां आने के लिए बाहरी व्यक्ति ही नहीं, बल्कि जैसलमेर जिले के नागरिकों को भी आने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है. क्षेत्र में जैसलमेर जिले के आठ थाना क्षेत्रों के करीब तीन सौ गांव आते हैं. एसडीएम, संबंधित थाना, पुलिस अधीक्षक व तहसीलदार से सत्यापन होने के बाद उस शख्स को प्रतिबंधित थाना क्षेत्र में जाने की अनुमति मिलती है, जो अधिकतम 15 दिन तक के लिए होती है. अवधि बढ़ाने पर फिर अनुमति लेनी पड़ती है. 

प्रमुख वारदातें-
- चांधन के सोजियो की ढाणी में पकड़ा गया जासूस
- पोकरण में खेतोलाई के पटवारी को जासूसी के आरोप में किया गिरफ्तार
- पोकरण में सेटेलाइट फोन के साथ तीन विदेशी नागरिक पकड़े

प्रतिबंधों का यह बंधन: 
- क्रिमिनल संशोधन एक्ट 1996 के तहत अधिसूचित थाना क्षेत्रों में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश के लिए अनुमति लेना अनिवार्य है.
- जैसलमेर में 2008 में बोर्डर को बेचने के मामले के बाद इस कानून को सख्त किया गया है.
- बिना परमिशन मिलने पर व्यक्ति के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर सकती है. 

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