स्वामी विवेकानंद की 156वीं जयतिं पर जानिए उनसे जुड़ी कुछ रोचक बातें...

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/12 11:22

नई दिल्ली। शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले और दुनियाभर में भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाने वाले युवा संत स्वामी विवेकानंद की आज 156वीं जयंती है। स्वामी जी के जन्म दिन को युवा दिवस के रुप में भी मनाया जाता है। स्वामी विवेकानंद का मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त था, उनका जन्म  12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था।

बतादें 126 साल पहले स्वामी विवेकानंद ने अमरीका के शिकागो की धर्म संसद में साल 1893 में भाषण दिया था। उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 'मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनों' कहकर की थी। आइए जानते हैं उनके उस यादगार भाषण के बारे में....

विवेकानंद ने कहा, भाइयों, मैं आपको एक श्लोक की कुछ पंक्तियां सुनाना चाहूंगा, जिन्हें मैंने बचपन से स्मरण किया और दोहराया है और जो रोज़ करोड़ों लोगों द्वारा हर दिन दोहराया जाता है - 'रुचिनां वैचित्र्यादृजुकुटिलनानापथजुषाम... नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव...' इसका अर्थ है - जिस तरह अलग-अलग स्रोतों से निकली विभिन्न नदियां अंत में समुद्र में जाकर मिल जाती हैं, उसी तरह मनुष्य अपनी इच्छा के अनुरूप अलग-अलग मार्ग चुनता है, जो देखने में भले ही सीधे या टेढ़े-मेढ़े लगें, परंतु सभी भगवान तक ही जाते हैं। इसके बाद हॉल तालियों से गूंज उठा। 

मालूम हो, विवेकानंद चाय के बड़े शौकीन थे। उन दिनों जब हिंदू पंडित चाय के विरोधी थे, उन्होंने अपने मठ में चाय को प्रवेश दिया। एक बार बेलूर मठ में टैक्स बढ़ा दिया गया था। कारण बताया गया था कि यह एक प्राइवेट गार्डन हाउस है। बाद में ब्रिटिश मजिस्ट्रेट की जांच के बाद टैक्स हटा दिए गए।
 

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