खेतड़ी के राजा अजीत सिंह की देन है स्वामी का विवेकानंद नाम, जानिए पूरी खबर...

खेतड़ी के राजा अजीत सिंह की देन है स्वामी का विवेकानंद नाम, जानिए पूरी खबर...

खेतड़ी के राजा अजीत सिंह की देन है स्वामी का विवेकानंद नाम, जानिए पूरी खबर...

खेतड़ी(झुंझुनूं): आज पूरा विश्व स्वामी विवेकानंद को युग पुरुष के रूप में जानता और पहचानता है. लेकिन स्वामी विवेकानंद को पहचान दी राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी के राजा अजीतसिंह ने. जब स्वामी विवेकानंद को कोई जानता और पहचानता नहीं था. तब राजा अजीतसिंह ने माउंट आबू में स्वामीजी को देखा और उनका पहचानते हुए अपने साथ अपने आतिथ्य में खेतड़ी ले आए. जहां से ही स्वामी विवेकानंद शिकागो के धर्म सम्मेलन में गए और उन्हें नरेंद्रनाथदत्त और विविदिशानंद से स्वामी विवेकानंद का नाम मिला. साथ ही वो ड्रेस भी मिली. जिसे आज विश्व का हर युवा एक आदर्श के रूप में देखता है. आज ऐसे ही राजा अजीतसिंह का 160वां जन्मदिन है. 

रियासतकाल में खेतड़ी रियासत रखती थी अपनी अलग पहचान:

ये है राजा अजीतसिंह. रियासतकाल में खेतड़ी रियासत अपनी अलग पहचान रखती थी. जिसके राजा अजीतसिंह ना केवल विद्वान, बल्कि आध्यात्म के तौर पर भी अपनी पहचान रखते थे. स्वामी विवेकानंद को नाम से लेकर उन्हें आगे बढाने में यदि किसी एक शख्श का सहयोग था तो वो भी कोई और नहीं, बल्कि खेतड़ी के राजा अजीतसिंह थे. राजा अजीतसिंह ने माउंट आबू में पहली बार स्वामी विवेकानंद से मुलाकात की. तब स्वामी विवेकानंद भारत भ्रमण पर निकले थे, वो भी पैदल. लेकिन उन्होंने स्वामी विवेकानंद में वो उर्जा और आध्यात्म का प्रेम देखा और उन्हें अपने आतिथ्य में खेतड़ी ले आए. जहां से ही उन्होंने शिकागो के धर्म सम्मेलन के लिए स्वामी विवेकानंद को पूरा सहयोग दिया और उन्हें उत्साहित किया. स्वामी विवेकानंद ने कई दफा अपने जीवन में इस बात को स्वीकार किया कि यदि उन्हें राजा अजीतसिंह जैसे दोस्त नहीं मिलते तो वो वे कुछ नहीं कर पाते. जो उन्होंने किया है. यही कारण है कि दोनों के बीच दोस्ती के साथ-साथ गुरू-शिष्य का संबंध भी आजीवन रहा. 

अजीतसिंह के आतिथ्य से स्वामी विवेकानंद को पहचान मिली:

रामकृष्ण मिशन के सचिव आत्मानिष्ठानंद महाराज ने बताया कि इस साल राजा अजीतसिंह की 160वीं जन्म वार्षिकी है. राजा अजीतसिंह के आतिथ्य से स्वामी विवेकानंद को पहचान मिली. वहीं राजा अजीतसिंह के आतिथ्य में कई संत, महात्मा खेतड़ी आए. इसलिए अब रामकृष्ण मिशन द्वारा राजा अजीतसिंह बहादुर के नाम से अतिथि निवास बनाया जा रहा है. जिसका काम अगले साल मार्च तक पूरा हो जाएगा. राजा अजीतसिंह का महल इतिहास के सुनहरे पन्नों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इसी महल में करीब तीन बार स्वामी विवेकानंद आए और उन्होंने यहां पर आतिथ्य स्वीकार किया. ऐसे में इसे और अधिक जीर्णोद्धार करने का काम लगातार जारी है. दोनों की दोस्ती और आपस में गुरू-शिष्य के संबंधों को हाल ही में बनाए गए अजीत विवेक म्यूजियम में भी काफी आकर्षक ढंग से बताया गया गया है.

माउंट आबू की मुलाकात के बाद राजा अजीत सिंह विवेकानंद से हो गए थे इतने प्रभावित:

आपको बता दें कि माउंट आबू की मुलाकात के बाद राजा अजीत सिंह विवेकानंद से इतने प्रभावित हो गए थे कि उन्हें खेतड़ी आने का निमंत्रण दे दिया. उसके बाद जो हुआ वह सर्वविदित है कि यह दो व्यक्तियों का मिलन नहीं था यह दो आत्माओं का मिलन था. दोनों के बीच मित्रवत और गुरु शिष्य का रिश्ता बन गया. दोनों गुरु शिष्य रात रात भर फतेह विलास महल की छत पर खगोल विज्ञान का अध्ययन करते थे तो कभी दोनों संगीत में डूब जाया करते थे एक हारमोनियम बताता था तो दूसरा ठुमरी व शास्त्रीय संगीत गाया करता था एक वीणा वादन करता था तो दूसरा संगत दिया करता था, दोनों अक्सर घोड़े पर बैठकर आखेट पर चले जाते थे तो कभी जीण माता के दर्शन के लिए चले जाते थे देखते ही देखते दोनों का रिश्ता इतना मजबूत हो गया की स्वामी विवेकानंद जो नरेंद्रनाथ दत्त या  विविदिशानंद हुआ करते थे उनको स्वामी विवेकानंद का नाम दिया और उनकी इच्छा पर अमेरिका के शिकागो में हुए विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने के लिए भेज दिया गया. खेतड़ी जयपुर स्टेट की एक रियासत थी जिसको प्रिंसली वेल स्टेट का दर्जा दिया गया छोटी रियासत के राजा होने के बावजूद स्वामी विवेकानंद अपने पत्रों में राजा अजीत सिंह को महाराजा खेतड़ी लिखा करते थे.

और पढ़ें