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VIDEO: सीकर में स्विफ्ट व फॉर्च्यूनर कार में जबरदस्त भिड़ंत, तीन लोगों की मौत, दो गंभीर घायल

VIDEO: सीकर में स्विफ्ट व फॉर्च्यूनर कार में जबरदस्त भिड़ंत, तीन लोगों की मौत, दो गंभीर घायल

फतेहपुर(सीकर): जिले के फतेहपुर के हरसावा गांव के पास आज अल सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया. स्विफ्ट और फॉर्च्यूनर गाड़ी में टक्कर होने से तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. हादसे की जानकारी मिलने पर पुलिस ने घटना स्थल पर पहुंच कर दो घायलों को अस्पताल पहुंचाया जिनकी हालत भी गंभीर बनी हुई है. हादसे में स्विफ्ट सवार दो व फॉर्च्यूनर सवार एक व्यक्ति मौत हुई है. स्थानीय लोगों के अनुसार ये गाड़ियां जयपुर व बीकानेर से आ रही थी. हालांकि दुर्घटना होने के कारणों का अभी पता नहीं लग पाया है. 
 

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फतेहपुर(सीकर): कस्बे के दो चचेरे भाइयों का अमेरिका के सबसे बड़े रियलिटी शो अमरीकाज गॉट टेलेंट में चयन हुआ है. दोनों भाइयों के डांस से प्रभावित होकर शो प्रबन्धकों ने अपने खर्चे पर दोनों को अमरीका बुलाया है. पहले राउंड में सलेक्ट होने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये दूसरा राउंड हुआ था उसमें भी सलेस्ट होने के बाद दोनों भाइयों के डांस का अमरीका में शूट किया गया. वीडियो अमरीकाज गॉट टैलेंट ने सोशल मीडिया पर डाला तो 24 घंटे के भीतर ही करीब 2 मिलियन लोगों ने देख लिया.

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पिछले 4 वर्षों से दोनों डांस कर रहे:
जानकारी के अनुसार कस्बे में धोबियो के मोहल्ले में के रहने वाले शाकिर व रेहान दोनों चचेरे भाई हैं. पिछले 4 वर्षों से दोनों डांस कर रहे हैं. दोनों भाई हाल ही में डांस प्लस में तीसरे राउंड तक सलेक्ट हुए थे. इसी दौरान अमेरिकाज गॉट टैलेंट में अपना वीडियो भेजा. वहां के प्रबंधकों व जज को यह वीडियो पसंद आया तो उन्होंने अपने खर्चे पर दोनों को अमरीका बुलाया. शो के बुलावे पर दोनों भाई 2 मार्च को अमरीका के केलिफोर्निया गए. वहां पर आयोजित हुए रियलिटी शो में दोनों ने प्रस्तुति दी तो लोग मंत्र मुग्ध हो गए. इसके बाद 9 मार्च को दोनों भाई मुम्बई लौट गए. बीते 2 सालों से मुंबई की एक डांस अकेडमी में दोनों तैयारी करते हैं. लॉकडाउन के चलते अमरीकाज गॉट टेलेंट का दूसरा राउंड नहीं हो पाया. मई के आखिरी सप्ताह में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये दूसरा राउंड हुआ. दूसरे राउंड में सलेस्ट होने के बाद पहले राउंड का वीडियो जारी किया गया.  

तीसरे राउंड के लिए जायेंगे अमरीका:
शाकिर ने बताया कि अभी वह टॉप 16 में शामिल हैं. पहले राउंड में 40 लोग थे. उसके बाद यह संख्या कम होती गई. इस शो में दुनिया के कई देशों से प्रतियोगी शामिल होते हैं. लॉक डाउन के चलते दूसरा राउंड वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुआ. अब हालात सामान्य होने पर तीसरा राउंड अमरीका में होगा. इसके लिए उन्हें बुलावा मिल गया हैं.  अब क्वार्टर फाइनल होगा उसके बाद सेमीफाइनल व उसके बाद फाइनल होगा. फाइनल में 5 ही टीम हिस्सा लेंगी.  

24 घंटे में ही 2 मिलियन व्यू मिले:
शाकिर व रेहान के डांस का वीडियो अमेरिका गॉट टैलेंट की ओर से अपने यू ट्यूब एकाउंट पर 10 जून की रात को डाला. दोनों का डांस इतना शानदार था कि 24 घंटे से ही कम समय मे 2 मिलियन लोगो ने वीडियो देखा. 

इंडिया से दूसरी बार पहुंचा कोई उस रियलिटी शो में:
अमरीकाज गॉट टेलेंट का यह 15 वा सीजन हैं. 15 वर्षो में भारत से भाग लेने वाले यह दूसरी टीम हैं. इससे पहले इस शो में एक टीम भाग ले चुकी हैं. शाकिर व रेहान बताते हैं कि उन्हें बहुत अच्छा लगा कि उनका यहां तक जाना हुआ. 

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सामान्य परिवार से है दोनों:
शाकिर व रेहान चचेरे भाई हैं. दोनों ही सामान्य परिवार से है. 2 वर्ष पहले शाकिर रेहान को डांस क्लास के लिये मुम्बई ले गया था. वहां पर कई शो में गये लेकिन सलेस्ट नही हुए तो घर वालो ने उन्हें वापस घर आने के लिए कह दिया. रेहान के घर वालो ने तो यहां वहा से पैसे का बंदोबस्त करके उन्हें वहा रखा. वहीं शाकिर के पिता की सीकर में टायर पंचर की दुकान है. 

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टाइम पास के लिए युवाओं ने शुरू की पहल बनी मिसाल, कोई भूखा न सोये की मुहिम पर अब तक बांटे 78 हजार से ज्यादा टिफिन

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फतेहपुर(सीकर): लॉक डाउन के कारण घरों में बैठे बैठे परेशान नहीं हो इसको लेकर चार दोस्तों ने असहाय लोगों के एक दिन का खाना बनाकर छह सौ टिफिन बांटे. सेवा कार्य में ऐसा मजा आया कि युवाओं की एक टीम बन गई और पिछले 40 दिनों से रोजाना हजारों लोगों को खाना बनाकर मुहैया करवा रही है. हम बात कर रहे है फतेहपुर के उन युवाओं की टीम की जो सबके लिए प्ररेणा से कम नहीं है. सिर्फ एक दिन छह सौ टिफिन बांटे थे उसके बाद ऐसी मुहीम बनी की अब तक 78 हजार से यादा टिफिन बांट कर कोई भूखा ना सोएं की पहल सार्थक होने लग गई. कस्बे के चार दोस्त पंकज पारीक, मगन प्रजापत, भवानी चोटिया व योगेश ने 24 मार्च को गरीबो के लिए एक दिन का भोजन तैयार किया. पंकज ने बताया कि जनता कर्फ्यू के दौरान पूरे दिन घर रहे तो बहुत परेशान हुए. अक्सर दिनभर बाहर घूमते रहते थे ऐसे में अब घर कैसे रहा जाएगा. अगले ही दिन राजस्थान सरकार ने लॉकडाउन कर दिया तो घर बैठे बैठे परेशान होने लगे. ऐसे में सोचा कि क्यों ना समाज के लिए इस कोरोना महामारी के बीच कुछ किया जाएं. ऐसे में 24 मार्च को रेलवे स्टेशन के पास एक घर में छह सौ लोगों के लिए खाने के पैकेट तैयार किए. इसके बाद प्रशासन की देखरेख में जरूरतमंद लोगों तक पहुचाएं. पूरा दिन कैसे बीता मानो पता ही नहीं चला. असहाय लोगों की सेवा में जो सुकून मिला उसके आगे सबकुछ फीका था. इसके बाद सोशल मीडिया पर फोटो डाली तो लोगों का अपार स्नेह मिला तो मुहीम को आगे बढ़ाने की सोची. ऐसे में सोचा की पहले दिन का खर्चा तो दोस्तों ने मिलकर दे दिया लेकिन आगे कैसे चलेगा. लेकिन कस्बे के लोगों का ऐसा सहयोग मिला कि मुहीम अपने आप आगे बढ़ गई. छह सौ टिफिन से यह संख्या ढाई हजार तक पहुंच गई. 

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घर किए चिन्हित, अब रोज पहुंचा रहे हैं खाना:
एक ओर पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी की चपेट में है. लॉक डाउन के चलते असहाय व जरूरतमंद लोगों पर जबरदस्त संकट आ गया. कामकाजी लोग भटक रहे हैं. कोई पहले कचरा बीनता था ,कोई कुली हमाल था कोई रिक्शा चलाता था. उन स्थानों तक भोजन पैकेट जरुरतमंदों को पहुंचाए जा रहे हैं जहाँ मेहनतकशों का बसेरा है. अस्पतालों के बाहर ,कोई कच्ची बस्ती ,फुटपाथ ,बंजारों की बस्ती ऐसे स्थान है जहां ये लोग रोज पहुंच रहे हैं. रसोई टीम के संदीप हुड्डा व अभिषेक जोशी ने बताया कि पहले दिन खाना देने के बाद से सोशल मीडिया पर संदेश डाला कि कस्बे में कोई भूखा न सोये कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति या परिवार है तो उसकी जानकारी हमे दे. जब लोगों ने जानकारी मुहैया करवाई तो टीम के सदस्य जाके देख कर आये की इस परिवार को वास्तव में जरूरत है या फिर नही. वास्तविक जरूरत वाले परिवार एक दो दिन भर चिन्हित हो गए. 

चार लोगों से संख्या 20 से अधिक हुई, सब अपने आप जुड़े किसी को नहीं बुलाया:
राम रसोई चार दोस्तों ने मिलकर शुरू की. उसके बाद कार्यकर्त्ताओं की फ़ौज अपने आप जुड़ गई. एक भी कार्यकर्ता को फोन करके नहीं बुलाया. सब अपने आप जुड़े. इसके बाद सबने अपनी रुचि से कार्य निर्धारित कर लिया. तब से लेकर आज तक वैसे ही सभी लोग लगे हुए है. कोई पैकिंग में लगा है तो खाना सप्लाई में लग गया. उसके बाद आने वाले लोगों को वापस भेजा गया. 

शहरवासियों का मिला अतुलनीय सहयोग:
राम रसोई शुरू होने के साथ ही शहर वासियों का अतुलनीय सहयोग रहा. मनोज पीपलवा व गोविंद पारीक ने बताया कि कास्बे के लोगो ने दिल खोल कर सहयोग किया. किसी ने राशन सामग्री भेजी तो किसी ने नकद राशि दी. इसके बाद किसी ने अपनी गाड़ी दी तो किसी ने सब्जी मुहैया करवाई. कस्बे के लोगों व लायंस क्लब के सदस्यों से मिले सहयोग के काऱण 78 हजार से ज्यादा टिफ़िन वितरण किये गए. राम रसोई के कार्य से लोग अभिभूत हुए. बंधेज का काम करने वाली एक महिला ने भी नाम नहीं बताने की शर्त पर अपने घर से सहयोग दिया. जबकि वो खुद गरीब परिवार से थी. 

यह है राम रसोई की टीम:
कार्यकर्ताओं की टीम में योगेश पारीक, मनोज पीपलवा, अजमद खां, सद्दाम हुसैन, किशोर ढाढ़णियां, गोविन्द पारीक, पंकज पारीक, मगन प्रजापत, संदीप हुड्डा, भवानी शंकर चोटिया, अभिषेक जोशी, मोहित सिलावट, रितिक पिपलवा, रमेश दर्जी, राहुल वर्मा, राहुल रॉय, अतुल ढण्ड, मीनू शर्मा, राकेश प्रजापत, ललित सैनी, बबलू सांखला कार्य कर रहे हैं. 

बिना संगठन बड़ा काम, संभवत शेखावाटी की सबसे बड़ी रसोई:
फतेहपुर की युवाओं की टीम का ना ही तो कोई संगठन है ना ही कोई संस्था. सिर्फ अपने बलबूते पर शुरू हुआ यह काम अब बड़े स्तर तक पहुंच गया. रोजाना 25 सौ लोगों को पिछले 38 दिनों से खाना पहुंचाने में यह शेखावाटी की सबसे बड़ी रसोई है. यह संदेश है कि अच्छे काम के लिए संस्थान व एनजीओ के बिना भी कार्य किया जा सकता है. 

- रोज 150 किलो आटे की बन रही है रोटियां, 70 किलो चावल व 200 किलो से अधिक सब्जी की हो रही है रोजाना खपत

- 2100 से लेकर 2500 तक टिफिन रोजाना भेज रहे है असहाय व जरूरतमंद लोगों तक

जरूरतमंद लोगों तक खाना पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं की टीम सुबह चार बजे से ही खाना बनाने के काम में जुट जाती है. हलवाई सुबह चार बजे आते है इसके बाद खाना बनाने का काम शुरू होता है. सुबह नौ बजे पैकिंग शुरू की जाती है. इसके बाद दूर के इलाको में गाड़ी भेजना शुरू किया जाता है. रोजाना दोपहर को 1300 से लेकर 1450 तक टिफिन तैयार किए जाते है. ऐसे में रोजाना डेढ़ क्विंटल आटे की रोटियां व दो क्विंटल से ज्यादा की सब्जी तैयार की जाती है. शाम को हल्का खाना व हेल्दी फूड देने के उद्देश्य को लेकर कभी वेज पुलाव तो कभी नमकीन खीचड़ी व कभी राजमा चावल दिए जा रहे हैं. शाम को खाने के एक हजार टिफिन तैयार किये जाते हैं. अब तक 78 हजार से ज्यादा टिफिन वितरित कर दिये गए है. इसके लिए भामाशाहों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है. कोई सामान देता है तो कोई नकद पैसे दे रहा है. लायंस क्लब के द्वारा भी भामाशाहों को प्रेरित किया गया तो कई भामाशाह भी जुड़ गए. नगर पालिका की टीम भी कार्य की पूरी मॉनीटरिंग कर रही है. 

सुरक्षा का रहा जा रहा है पूरा ख्याल: 
कार्यकर्ताओं की टीम के द्वारा रेलवे स्टेशन के पास एक मकान में खाना बनाने का कार्य किया जा रहा है. यहां पर खाना बनाने से लेकर पैकिंग व खाना वितरण में पूरी सावधानियां बरती जा रही है. सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है. खाना पैकिंग करते समय मुहं पर मास्क व हाथों में दस्ताने पहने जा रहे हैं. यह लोग कोरोना की जंग में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं.

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कोई हलवाई है कोई दुकानदार, कोई फोटोग्राफर तो कोई मजदूर:
रेलवे स्टेशन के पास चल रही राम रसोई में काम कर रहे युवाओं की कहानी भी अलग है. कोई पेशे से हलवाई है तो कोई मजदूरी करता है. कोई विदेश रहता है तो किसी के कैटरिंग का काम है तो कोई व्यापारी है. लेकिन लॉक डाउन के बाद सबका एक ही मकसद है फतेहपुर क्षेत्र में कोई भूखा ना सोएं. किसी भी कार्यकर्ता को फोन करके नहीं बुलाया गया. चार दोस्तों के द्वारा शुरू करने के बाद कारवां अपने आप बनता गया. अब कार्यकर्ताओं की भी कमी नहीं है. खाना पैक करने से लेकर वितरण करने वाली टीमें भी अलग अलग है. 

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