वरिष्ठ अध्यापक भर्ती 2018 की विसंगति को टीएसपी बेरोजगारों ने बताया अभिशाप

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/22 12:21

सराडा: वरिष्ठ अध्यापक भर्ती 2018 का प्रोविजन परिणाम टीएसपी और नॉन टीएसपी का अलग-अलग घोषित किया था, जिसमें टीएसपी क्षेत्र संशोधन के तहत नये एरिये को शामिल तो किया गया, लेकिन बढे हुए क्षेत्र के हिसाब से पदों की संख्या नही बढाने से अभ्यार्थियों ने नाराजगी जताते हुए सरकार के फैसले का विरोध किया है.

आरपीएस के फैसले पर विरोध:
वरिष्ठ अध्यापक भर्ती के सैंकडों अभ्यर्थियों ने सलूम्बर में रैली निकाल कर सरकार और आरपीएस के फैसले पर विरोध जताया. साथ ही पुनर्विचार करने की मांग की. अभ्यर्थियों ने बताया कि आरपीएससी सचिव का कहना है कि जो वरीयता टीएससी और नॉन टीएसपी का भरा है, उसके हिसाब से परिणाम घोषित किया गया. जबकि वरीयता प्रभाव चयन के समय ना होकर नियुक्ति के समय किया गया. आरपीएससी के ऐसा करने से अधिक प्राप्तांक वाले व्यक्ति कैटेगरी वाइज नॉन टीएसपी में माइग्रेट नहीं हो रहे हैं. इससे उनकी कट ऑफ अधिक जा सकती है, जिससे टीएसपी के आरक्षण का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. जबकि पूर्व में इसका लाभ मिल रहा था.

इस भर्ती में टीएसपी का लाभ नहीं मिलना चाहिए था:
अभ्यर्थियों का कहना है कि टीएसपी के विस्तारित क्षेत्र को इस भर्ती में टीएसपी का लाभ नहीं मिलना चाहिए था. 19 मई 2018 की अधिसूचना के तहत आगामी भर्ती में उन्हें डीएसपी का लाभ मिलना चाहिए था, जबकि इस भर्ती की विज्ञप्ति 9 अप्रैल 18 को प्रकाशित हो चुकी थी. आरपीएससी में शुद्धि पत्र के द्वारा विस्तारित क्षेत्र के अभ्यर्थियों को वरीयता दी, लेकिन पदों का वर्गीकरण पूर्व की तरह रखा. विस्तारित क्षेत्र के पद वर्तमान में नॉन टीएसपी में है, शुद्धि पत्र के द्वारा उन पदों को भी टीएसपी में सम्मिलित किया जाए.

टीएसपी के सभी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस भर्ती को पूर्व के वरिष्ठ अध्यापक भर्ती की तरह सुचारू रूप से आरक्षण का लाभ लेते हुए कार्रवाई करवाएं. इस दौरान उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाडा तथा प्रतापगढ जिलों से अभ्यर्थी शामिल हुए.

... सराडा से अनिल वैष्णव की रिपोर्ट 
 

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