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VIDEO: टीम गहलोत के जज्बे की दास्तां, Corona को हराने में जुटे सूबे के 'कर्णधार'

जयपुर: पूरा प्रदेश जब कोरोना संकट से जूझ रहा है, तो कुछ ऐसे योद्धा भी है, जो अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर प्रदेश की जनता की रक्षा के लिए इस वायरस से जंग लड़ रहे हैं. इन योद्धा में सबसे आगे सेनापति की तरह डटे हैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जिनका न अब सोने का ठिकाना है और न खाने का. बस मन में एक ही संकल्प, प्रदेश को कोराना महामारी से जंग जिताकर ही दम लें. 

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गहलोत घबराए नहीं, बल्कि इस वायरस से जंग में सबसे आगे आकर खड़े हो गए:
प्रदेश में जब विकास का खाका खिंचा जा रहा था और विधानसभा में बजट पास हुआ था, तब ही एक चिंता भरी खबर आई कि इटली का एक नागरिक कोराना पॉजिटिव पाया गया है. चिंता इसलिए गहरी थी क्योंकि यह नागरिक राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के कई इलाकों में रुका था. अब इस घटना के बाद प्रदेश में सबकुछ बदल गया. सीएम गहलोत जहां बजट के अनुसार प्रदेश के विकास का सपना देख रहे थे, अचानक सेनापति की भूमिका में आकर खड़े हो गए, क्योंकि अब जंग ऐसे अद्श्य दुश्मन से होनी थी, जिसने पूरी द़ुनिया में हाहाकर मचा रखा था. गहलोत घबराए नहीं, बल्कि इस वायरस से जंग में सबसे आगे आकर खड़े हो गए. तुरंत फैसले लिए और साथ ही एक ऐसी टीम बनाई, जो दिन रात कोराना से जंग में लड़ाइ लड़ सके. सेनापति की भांति खुद गहलोत मोर्चे पर डटे है. एक तरफ लोगों से बीमारी से बचाने का जिम्मा है, तो दूसरी तरह गरीब, बेसहारा व जरूरतमंदो को भूखा न सोने देने का दृढसंकल्प. कोराना से जंग में प्रदेश के इस योद्धा न अब तक क्या क्या किया इस पर एक नजर डाल लेते हैं. 

- 18 मार्च को पूरे प्रदेश में धारा 144 लगाने की घोषणा की
- 21 मार्च को पूरे प्रदेश में लॉकडाउन करने का फैसला
- लॉकडाउन करने वाला देश का पहला राज्य बना राजस्थान
- राजस्थान का अनुसरण फिर अन्य राज्यों व केंद्र ने किया
- जनता के जीवन का सर्वापरि मानकर कुछ जगह कर्फ्यू लगाया
- लॉकडाउन के कारण प्रदेश की जनता की चिंता भी सताने लगे
- मजदूरों, गरीबों व असहायों के लिए विशेष प्रबंध किए गहलोत ने
- पहले 1000 फिर 1500  रुपए की नकद सहायता राशि देने का फैसला
- 'प्रदेश में कोई भूखा न सोए' अभियान का आगाज किया गहलोत ने
- सभी राजनीतिक दलों से बैठक करके कोरोना से लड़ाई में मदद मांगी
- धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के प्रमुख से मीटिंग की मुख्यमंत्री ने
- विधायक व मंत्रियों के साथ अपना वेतन स्थगित किया गहलोत ने
- बिजली व पानी के बिल स्थगित करके जनता को बड़ी राहत दी
- चिकित्सा कर्मियों के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की

प्रदेश में धारा 144 लगाने के बाद से लेकर अब तक कोई ऐसा दिन नहीं गया हो, जब मुख्यमंत्री ने दिन में दो से तीन मीटिंग न ली हो. वरिष्ठ अधिकारियों का कोर ग्रुप बनाया, जो तुरंत फैसले ले. अब तो सीएम ने दो टास्क फोर्स का भी गठन कर दिया है. भीलवाड़ा में तो कोराना को नाकों चने चबाकर ऐसा मॉडल स्थापित किया कि आज पूरे देश में सीएम के इस भीलवाड़ा मॉडल की तारीफ हो रही है. प्रदेश की जनता भूखी न सोए इसके लिए ऐसा अभियान छेड़ा कि आज हर कोई मदद के लिए आगे बढ़कर आ रहा है. मुख्यमंत्री ने कोविड 19 विशेष कोष भी स्थापित किया है, जिसमें लोगों ने खुले हाथों से मदद की. अब तक इस कोष में 170 करोड़ रुपए से अधिक आ गए हैं.

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रांका मुख्यमंत्री की कोर टीम के प्रमुख सदस्य:
कोराना से इस जंग में मुख्यमंत्री का कंधे से कंधे मिलाकर साथ दिया एक और योद्धा ने. यह योद्धा है मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव कुलदीप रांका. प्रशासन में 100 फीसदी डिलीवरी के लिए पहचान रखने वाले रांका मुख्यमंत्री की कोर टीम के प्रमुख सदस्य है. मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए फैसलों को तुरंत पूरे प्रदेश में लागू कराना और उनकी मॉनिटरिंग करके मुखिया को रिपोर्ट देने का काम रांका ने बखूबी किया है. न दिन का चैन न रात का सुकुन. ब्यूरोक्रेसी के माध्यम से इस जंग को जीतने में अहम भूमिका निभाई है कुलदीप रांका ने. मुख्यमंत्री व रांका की प्रेरणा से ही अधिकारियों व कर्मचारियों ने आगे बढ़कर अपने वेतन में से सहयोग दिया. जब सरकार ने वेतन स्थगित करने का फैसला किया, तो कर्मचारियों ने इसका भी समर्थन किया. यह संभव हो पाया कुलदीप रांका के कारण. 

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