VIDEO: तरावीह की नमाज : दुनियाभर में एक साथ होती है इबादत 

Nizam Kantaliya Published Date 2019/05/13 09:34

जयपुर: इस्लाम के पवित्र माहे रमजान में इबादत का दौर जारी है। सोमवार को आज रमजान का 7वां रोजा और 8वीं तरावीह की नमाज है। रमजान का चांद दिखाई देने के साथ ही सबसे पहली चांद तारीख से तरावीह की नमाज शुरू हो जाती है. यही कारण है कि पहली तरावीह की नमाज की दूसरी सुबह पहला रोजा होता है. पहले असरे की समाप्ति की ओर बढ रहे रमजान की हर रात मस्जिदों में तरावीह की नमाज जारी है. 

क्या है तरावीह की नमाज:
नमाज ए तरावीह और तहज्जुद रात की नमाज असल में एक ही इबादत के दो नाम हैं. रात की नमाज अगर गैर-रमजान में सोकर उठने के बाद पढ़ी जाए तो तहज्ज़ुद कहलाती है और अगर रमजान में सोने से पहले ईशा के साथ पढ़ ली जाए तो इसको तरावीह कहते है. रमजान शरीफ में रोजे की वजह से कमजोरी और परेशानी सी हो जाती है और इफ्तार में खाने के बाद सोने से आधी रात गए जाग कर तहज्ज़ुद के लिए लम्बा क़याम करना बहुत मुश्किल है, इसलिए रसूलुल्लाह ने रात की नमाज (तहज्ज़ुद) को रमजान शरीफ में ईशा के साथ पढ़ कर लोगों के लिए आसानी पैदा कर दी. ताकि वे तरावीह के बाद पूरी तरह आराम की नींद सो सके और फिर सुबह सादिक से कुछ पहले उठ कर सहरी खा कर रोजे के लिए तैयार हो जायें.

क्या है तरीका:
तरावीह का वक्त ईशा की नमाज़ पढ़ने के बाद से शुरू होता है और सुबह सादिक़ तक रहता है. वित्र की नमाज़ तरावीह से पहले भी पढ़ सकते और बाद में भी, लेकिन बाद में पढ़ना बेहतर है. तरावीह की नमाज़ दो-दो रकअत करके पढ़नी चाहिए। हर चार रकअत के बाद कुछ देर ठहर कर आराम कर लेना मुस्तहब है. उस आराम लेने के दरम्यान अहिस्ता आहिस्ता क़ुरान जीद और तस्वीह पढ़ते रहे. पूरे महीने में एक क़ुरान शरीफ तरावीह के अंदर पढ़ना-सुनना सुन्नत माना गया है. क़ुरान शरीफ पूरे महिने में दो मर्तबा अफ़ज़ल है उस से ज्यादा हो तो क्या कहना। तरावीह पढ़ना और तरावीह में एक क़ुरान मजीद खत्म करना ये दोनों अलग अलग सुन्नते हैं. तरावीह में नमाज पुरा होने के बाद भी नमाज पूरे माह अदा करना जरूरी.

तरावीह की नमाज से जुड़ा एक ओर वाक्या:
तरावीह की नमाज से जुड़ा एक ओर वाक्या है. हजरत ज़ैद बिन साबित रजिउल्लाहो के नबी ने मस्जिदे नबवी में चटाई से घेर कर एक हुजरा बना लिया और रमजान की रातों में इसके अंदर नमाज पढ़ने लगे. धीरे-धीरे और लोग भी जमा हो गए, तो एक रात हजरत की आवाज नहीं आई, लोगों ने समझा के हजरत सो गए हैं. इसलिए इन में से बाज खंगारने लगे ताके आप बाहर तशरीफ़ लाएं. फिर हजरत ने फ़र्माया कि मैं तुम लोगों के काम से वाकिफ हूं. मुझे डर हुआ कि कहीं तुम पर यह नमाज तरावीह फर्ज न कर दी जाए और अगर फर्ज कर दी जाये तो तुम इसे कायम नहीं रख सकोगे. इसलिए ए लोगो ! अपने घरो में यह नमाज पढ़ो क्योंकि फर्ज नमाज के सिवा इंसान की सबसे अफजल नमाज है. तो तहज्जुद वित्र के साथ रमजान में नमाज तरावीह बन गई. याद रहे की तरावीह का असल नाम 'कयामे रमजान' है. 

माहे रमजान में मस्जिदों में तरावीह की नमाज जारी है. यह नमाज जयपुर शहर में 300 से अधिक मस्जिदो में होती है. विशेष तरावीह की नमाज जयपुर की जामा मस्जिद में होती है. वहीं कई मस्जिदों में ये नमाज 2 घण्टे की होती है. एक तरावीह में ही कुरान के दो—दो पारे किये जाते हैं. नमाज के दौरान कई जगह खास दुआ भी होती है.

... संवाददाता निजाम कण्टालिया की रिपोर्ट

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