जून माह में 25 हजार किसानों को उपज रहन ऋण योजना से जोड़ने का लक्ष्य, फसल रहन ऋण के लिए 5500 ग्राम सेवा सहकारी समितियां को दी पात्रता

जून माह में 25 हजार किसानों को उपज रहन ऋण योजना से जोड़ने का लक्ष्य, फसल रहन ऋण के लिए 5500 ग्राम सेवा सहकारी समितियां को दी पात्रता

जून माह में 25 हजार किसानों को उपज रहन ऋण योजना से जोड़ने का लक्ष्य, फसल रहन ऋण के लिए 5500 ग्राम सेवा सहकारी समितियां को दी पात्रता

जयपुर: 1 जून से शुरू हो रही उपज रहन ऋण योजना के तहत जून माह में राज्य के 25 हजार किसानों को जोड़कर लाभ प्रदान किया जायेगा. राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से किसानों के उपज बेचान से जुड़े हितों की सुरक्षा सम्भव हो सके. उन्होंने कहा कि योजना में पात्र समितियों का दायरा बढ़ाकर इसे 5500 से अधिक किया गया है ताकि अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सके. 

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किसान को उसकी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा:
आज सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव और रजिस्ट्रार नरेश पाल गंगवार पंत कृषि भवन में उपज रहन ऋण योजना, फसली ऋण वितरण एवं अन्य संबंधित बिन्दुओं पर जिलों में पदस्थापित सहकारिता के अधिकारियों एवं व्यवस्थापकों को विडियों काफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि लघु एवं सीमान्त किसानों को 1.50 लाख रूपये एवं बड़े किसानों को 3 लाख रूपये रहन ऋण के रूप में देने के लिए योजना जारी की है. इसमें किसान को उसकी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा. किसान बाजार में अच्छे भाव आने पर अपनी फसल को बेच सकता है. यह योजना किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकता को पूरी करने तथा कम दामों में फसल बेचने की मजबूरी में मददगार साबित होगी. 

कार्मिकों के लिए आयेगी प्रोत्साहन स्कीम:
प्रमुख सचिव ने कहा कि राजस्थान की यह योजना भारत में सबसे कम ब्याज दर 3 प्रतिशत पर किसान को रहन ऋण देने की विशेष पहल है. जो किसानों एवं समितियों की आय में वृद्धि करेगी. उन्होंने निर्देश दिये कि सहकारी समितियां अपने आस-पास के गोदामों को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक किसानों को उपज रहन ऋण देकर उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करें. योजना में अच्छे कार्य करने वाली समितियों के कार्मिकों के लिए शीघ्र ही एपेक्स बैंक द्वारा प्रोत्साहन स्कीम जारी की जायेगी. 

4.44 लाख मै.टन सरसों एवं चना की हुई खरीद: 
गंगवार ने कहा कि कोविड-19 महामारी में केवीएसएस एवं जीएसएस घोषित गौण मण्डियां बहुत अच्छे से कार्य कर रही है और 427 गौण मण्डियां ओपरेशनल होकर किसानों को अपने खेत के नजदीक ही उपज बेचान की सुविधा दे रही है. उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीद में जीएसएस को जोड़ने से किसानों को अपने नजदीकी उपज बेचान की सुविधा मिलने से खरीद कार्य में गति आयी है. जो खरीद पहले 58 दिन में होती थी, आज वह 26 दिन में ही पूरी हो रही है तथा किसानों के खाते में तीन से चार दिन में भुगतान भी हो रहा है. 27 मई तक 1 लाख 76 हजार 434 किसानों से 4 लाख 44 हजार 628 मै.टन सरसों एवं चना की खरीद हो चुकी है, जिसकी राशि 2 हजार 64 करोड़ रूपये है. इसमें से 1 हजार 723 करोड़ रूपये का भुगतान किसानों को हो चुका है. 

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4295 करोड़ रूपये फसली ऋण का हुआ वितरण: 
राज्य के 13 लाख 18 हजार 177 किसानों को 4 हजार 295 करोड़ रूपये का सहकारी फसली ऋण का वितरण हो चुका है. उन्होंने भरतपुर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, बारां एवं जालौर जिलों में ऋण वितरण की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि संबंधित जिले इस कार्य में गति लाये और शीघ्र फसली ऋण वितरण करे. गंगवार ने कहा कि हमारी मंशा है कि ग्राम सेवा सहकारी समिति को किसान की समस्या समाधान एवं सुविधाओं के लिए सिंगल विड़ों के रूप में विकसित किया जाये. 
 

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