656 वर्ष पुराने मंशा माता मंदिर की अनोखी है गाथा, देशभर से आते हैं श्रद्धालु

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/08 04:44

बहरोड़। बहरोड़ में दिल्ली-जयपुर हाईवे पर बसे गांव दहमी में स्थित मांशा माता का मंदिर आस्था का केन्द्र है। वर्ष में दो बार यहां मेला आयोजित होता है। ग्रीष्म एवं शारदीय नवरात्रों में आयोजित मेले में लाखों श्रद्धालु पहुंचकर माता के दरबार में मनौती मांगते हैं। माता के दरबार में जो भी श्रृद्धाभाव एवं आस्था के साथ मनोकमना करता है, माता उसकी मनोकामना पूरी करती है। नवविवाहित जोड़े यहां पहुंचकर गठ़जोड़े की जात लगाते हैं। वहीं नवजात शिशुओं को मुंडन करवाया जाता है। 

आस्था एवं विश्वास के करीब 656 वर्ष पुराने इस केन्द्र की अनोखी कहानी है। बताते हैं एक पैर से विकलांग रत्ना ब्राह्मण नामक ग्वाला गायों को चराने जाया करता। सुनसान जगह पर बनी जोहडी में नहाकर मां भगवती की आराधना करता। एक दिन झाड़ की छांया में बैठक वह ध्यान कर हा था, तो आवाज आई मैं तुम्हें दर्शन देना चाहती हूंं। उसका ध्यान हट गया, लेकिन फिर ध्यान लगाया तो फिर आवाज आई। उसने कहा कि कौन हो दर्शन दो। मां मंशा झाड़ को फाड़कर प्रकट हुई और दर्शन देते हुए कहा कि मैं वही मंशा माता हूं, जिसकी तुम आराधना करते हो और वह चली गई। इस वाकये की जानकारी ग्वाला ने परिजनों को दी। 

मंदिर बनाने के पीछे भी रोचक कहानी है। हरियाणा के नारनौल के रहने वाले व्यापारी शौभाराम मां भगवती का भगत था। जिसके कोई संतान नहीं हो रही थी। मंशा माता के एक दिन उसे दर्शन दिए और मनोकामना पूर्ण होने का आर्शिवाद दिया। संतान होने के बाद उसने मंदिर का निर्माण करवाया और कांस्य-ताम्र का घंटा भी चढ़ाया। जो आज तक लटका हुआ है। जिस पर सन् 1437 अंकित है। मंदिर के सामने बावड़ी बनी हुई है। जिसमें महिलाओं के स्नान करने से उनके दोष दूर हो जाते हैं। वहीं मंदिर परिसर में पीपल के पेड़ों पर मन्नत का धागा बांधा जाता है।

मंदिर पर लगने वाले मेले में बिजली, पानी, छांया, ठंडी, हवा, वाहन पार्किंग की व्यवस्था श्रीकृष्ण नवयुवक मंडल द्वारा की जाती है। मंदिर पर जो चढ़ावा आता है, उससे मंशा माता विकास समिति विकास कार्य करती है। मूलभूत सुविधाओं को अंजाम देने में ग्राम पंचायत का भी अहम योगदान रहता है। वहीं सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस जाप्ता तैनात रहता है।
   
इस मंदिर पर हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, दिल्ली, कोलकाता सहित प्रदेश के विभिन्न जिलाें से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। माता के दरबार पर कोई भी खाली हाथ नहीं गया। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी जनसंवाद के दौरान इस मंदिर पर पहुंचकर मंशा माता के दर्शन कर चूकी हैं। यहां देश के विभिन्न क्षेत्रों के नौकरशाह आकर मनौती मांगते हैं। मां उनकी हर अरदास पूरी करती है। जिसका परिणाम है कि माता के एक भक्त ने मेला शुरु होने से पहले सौ किलो चांदी से मां के दरबार को सजवाया है। जिसमें करीब चालिस लाख रुपए का खर्च आया है।

... संवाददाता जितेन्द्र नरुका की रिपोर्ट 

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