RJS-2018 में निशक्तजनों की आयु सीमा को लेकर हाईकोर्ट ने दी राहत

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/23 06:35

जोधपुर (राकेश भारद्वाज)। राजस्थान न्यायिक सेवा भर्ती परीक्षा 2018 में निःशक्तजनों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा का लाभ नहीं दिए जाने पर दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने निःशक्तजन अभ्यर्थी विनोद सिंह भाटी को राहत दी है। वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश दिनेश मेहता की खण्डपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्रार (परीक्षा) को याचिकाकर्ता को प्रारम्भिक परीक्षा में शामिल करने का अंतरिम आदेश दिया है। 

विनोद सिंह भाटी की ओर से अधिवक्ता रजाक के. हैदर ने हाईकोर्ट की खण्डपीठ में याचिका दायर कर कहा कि, उच्च न्यायालय प्रशासन ने सिविल न्यायाधीश संवर्ग में 197 पदों पर सीधी भर्ती के लिए 15 नवम्बर को विज्ञप्ति जारी की है। जिसमें सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित की गई है। इसमें विभिन्न वर्गों के अभ्यर्थियों को शिथिलता प्रदान करते हुए अधिकतम आयु सीमा में छूट दी गई है, लेकिन नि:शक्तजन अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में छूट नहीं दी गई है। जबकि राजस्थान नि:शक्तजन (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) नियम, 2011 के अनुसार नि:शक्तजन अभ्यर्थियों को अधिकतम आयु सीमा में दस वर्ष की छूट दी जानी चाहिए। 

प्रारम्भिक सुनवाई के बाद न्यायालय ने रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रार (परीक्षा) और राज्य सरकार के विधि एवं विधिक कार्य विभाग को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने और याचिकाकर्ता को प्रारम्भिक परीक्षा में शामिल करने का अंतरिम आदेश दिये है।
 

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