मुंबई: मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी कामयाबी: भारतीय नौसेना में शामिल हुई सबमरीन INS करंज, दुश्मन ​के इलाके में होने के बाद भी रडार पर नही देगी दिखाई

मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी कामयाबी: भारतीय नौसेना में शामिल हुई सबमरीन INS करंज, दुश्मन ​के इलाके में होने के बाद भी रडार पर नही देगी दिखाई

मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी कामयाबी: भारतीय नौसेना में शामिल हुई सबमरीन INS करंज, दुश्मन ​के इलाके में होने के बाद भी रडार पर नही देगी दिखाई

 

मुंबई: स्कॉर्पियन क्लास की सबमरीन INS करंज आज इंडियन नेवी के बेड़े में शामिल हो गई है. मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में एक कार्यक्रम के दौरान INS करंज को शामिल किया गया है. इस दौरान नेवी स्टाफ के प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और एडमिरल (सेवानिवृत्त) वीएस शेखावत भी मौजूद थे. इसे मेक इन इंडिया अभियान की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. कलवरी क्लास की इस तीसरी सबमरीन की खासियत है कि मिशन के दौरान दुश्मन के इलाके होने के बावजूद उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगेगी.

नाम की अलग खासियत:
INS करंज के नाम के पीछे का किस्सा भी दिलचस्प है. इसके नाम के हर अक्षर का एक मतलब है. K से किलर इंसटिंक्ट, A से आत्मनिर्भर भारत, R से रेडी, A से एग्रेसिव, N से निम्बल और J से जोश.

ये है INS करंज मुख्य की खासियत:
INS करंज की लंबाई करीब 70 मी. और ऊंचाई 12 मी. है. इसका वजन करीब 1600 टन है.

सबमरीन मिसाइल, टॉरपीडो से लैस है. इसमें समुद्र के भीतर ही माइन्स बिछाकर दुश्मन को तबाह करने की क्षमता है.

सबमरीन की ताकत यह भी है कि बिना आवाज किए हुए, बिना रडार की पकड़ में आए ये दुश्मन को नुकसान पहुंचा सकती है.

यह लंबे वक्त तक पानी में रहकर भारतीय नौसेना को समुद्र में मजबूत करेगी.

INS करंज एक डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन है. छोटा साइज होने के कारण इसे समुद्र के नीचे ढूंढ पाना मुश्किल है.

कलवरी क्लास की इस तीसरी सबमरीन की खासियत है कि मिशन के दौरान दुश्मन के इलाके होने के बावजूद उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगेगी.
कलवरी क्लास की इस तीसरी सबमरीन की खासियत है कि मिशन के दौरान दुश्मन के इलाके होने के बावजूद उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगेगी.

INS कलवेरी, INS खंडेरी पहले ही हो चुकीं है शामिल:
INS करंज से पहले INS कलवेरी, INS खंडेरी भी भारतीय नौसेना में शामिल हो चुकी हैं. ये सभी कलवेरी क्लास की 6 सबरीमन का हिस्सा हैं. INS करंज के आने के साथ ही तीन सबमरीन नौ सेना को मिल चुकी हैं जबकि अभी भी तीन बाकी हैं. करंज को मजगांव डॉक लिमिटेड ने बनाया है. 

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