किशोरों के तनाव का सबसे बड़ा कारण बना सोशल मीडिया

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/08/24 05:27

कैलिफोर्निया। हाल ही में एक शोध में पाया गया कि जो किशोर दिन में अपना ज्यादा समय सोशल मीडिया का उपयोग करने लगा रहा है जिससे उनमें एडीएचडी (एटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर) नामक मानसिक विकार का खतरा अधिक दिखाई दिया। सोशल मीडिया के साथ-साथ ही मोबाइल फोन या अन्य डिजीटल उपकरण इस्तेमाल करना भी किशोरों के लिए बेहद ही गंभीर हो सकता है। 

क्या है यह एडीएचडी
कई बार स्कूली बच्चे अपने दैनिक कार्यों और अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह से ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाते हैं। यह एक प्रकार का मानसिक विकार है, जिसे एडीएचडी कहा जाता है। एडीएचडी का यही मतलब है कि यह एक मानसिक समस्या है, जिसमें व्यक्ति को किसी विषय या वस्तु पर ध्यान लगाने में परेशानी महसूस करता है, जिसमें उसका ध्यान बार-बार भटकने लगता है। 

इस तरह का मानसिक विकार, बच्चों और किशोरों में सामान्य तौर पर पाया जाता है। भारत में इस विकार से पीड़ित बच्चों, किशोरों और वयस्कों की संख्या प्रति वर्ष 10 मिलियन के करीब देखने को मिलती हैं। इस विकार में किशोर को अपनी भावनाओं पर कंट्रोल नही रख पाता है, जिसके कारण वह परिस्थिति के अनुसार अपने भावों को व्यक्त नहीं कर पाता। जैसे-बहुत ज्यादा हँसने लगना, काफी ज्यादा बोलते रहना आदि तरह के लक्षण किशोर में देखने को मिलते हैं।

दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय शोध टीम ने 15 से 16 साल तक के 2,600 किशोरों पर दो साल तक अध्ययन किया। इस अध्ययन में उन्होनें मोबाइल फोन और अन्य डिजीटल डिवाइस चेक करने की गतिविधियों की देखरेख की गई। इस अध्ययन के दो साल बाद पाया गया कि जो किशोर ज्यादा मोबाइल फोन या अन्य डिजीटल डिवाइस का उपयोग ज्यादा करते है उनमें एडीएचडी की संभावना अधिक देखने को मिल रही है। जिसमें मोबाइल का फोन उपयोग करने की मुख्य वजह सोशल मीडिया पर पोस्ट करना, मैसेज भेजना, फोटो अपलोड करना आदि था।

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