रेगिस्तान में पनप रहा है मादक पदार्थों का काला धंधा, नशे की गिरफ्त में सरहदी जिले के कई युवा

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/07/12 10:07

जैसलमेर: शांत के साथ संस्कारित माने जाने वाले जैसलमेर की आबोहवा में नशे का जहर अब पूरी तरह से घुलने लगा है. पिछले कुछ अर्से के दौरान जैसलमेर के कई युवा गांजे जैसे अत्यंत नशीले पदार्थ का सेवन करने के आदी हो चुके हैं. नशे की गिरफ्त में आकर महीने के हजारों रुपए लुटाने के साथ अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. जिले में अवैध रूप से नशीले पदार्थों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है और चिंतनीय बात यह है कि पुलिस के लम्बे हाथ नशे के इन कारोबारियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं.  

मादक पदार्थों के काले धंधे ने जड़ें जमा ली: 
फर्स्ट इंडिया के पड़ताल में यह बात सामने आई है कि स्वर्णनगरी में गत तीन दशकों के दौरान फले-फूले पर्यटन व्यवसाय के साथ-साथ मादक पदार्थों के काले धंधे ने पुख्ता जड़ें जमा ली हैं. रातों रात दौलतमंद बनने का युवाओं का लालच उन्हें इस धंधे की गर्त में धकेलने का काम कर रहा है. पर्यटन नगरी के रूप में विख्यात मादक पदार्थों की खरीद-फरोख्त के फलने-फूलने से यहां के लोग भी गांजा, चरस, अफीम आदि के सेवन के आदी हो रहे हैं. इनमें ज्यादातर युवावर्ग के लोग शामिल हैं.  

विदेशियों को भी उपलब्ध कराने का कारोबार:
जैसलमेर में पर्यटन व्यवसाय से जुड़े कई युवा यहां भ्रमण पर आने वाले विदेशियों को गांजा आदि नशीले पदार्थों की पुडिया सप्लाई करने का काम कर रहे हैं. नशा करने वाले इन विदेशियों में ज्यादातर इजराइली सैलानी हुआ करते हैं. उनके अलावा यूरोपियन देशों के कई पर्यटक भी स्वर्णनगरी में अपना नशे का शौक पूरा करने आते हैं. उन्हें मादक पदार्थ सप्लाई करते-करते ये युवा खुद भी इसके आदी बन रहे हैं और अन्य स्थानीय युवकों को भी अपने जाल में फांस रहे हैं. सूत्रों की मानें तो नशे का यह सामान जोधपुर, बीकानेर आदि से यहां पहुंच रहा है.

हर किस्म का ड्रग्स मिलता है यहां: 
पर्यटन क्षेत्र के वरिष्ठ लोगों ने नाम ने छापने की शर्त पर बताया कि विदेशी सैलानी नशे के कारोबार से जुड़े व्यापारियों के मुख्य ग्राहक माने जाते हैं. जैसलमेर में गांजा, चरस, अफीम आदि मादक पदार्थों के सबसे बड़े खरीदार दुनिया भर से यहां आने वाले विदेशी सैलानी हैं. इस नशे के तलबगार विदेशी लम्बी-लम्बी अवधि तक जैसलमेर में ही टिके रहते हैं. जैसलमेर में मादक पदार्थों की पूरी रेंज दाम दिए जाने पर आसानी से मुहैया हो सकती है. यहां के युवा बाहरी लोगों के साथ मिलकर स्मैक, गांजा, चरस, अफीम से लेकर हेरोइन तक की सप्लाई चैन का काम कर रहे हैं. शहर के गली-कूचों में आए गुमनाम गेस्ट हाउसेज व गुमनाम-सी होटलों में कई विदेशी महीनों तक टिके रहते हैं, उसका मुख्य कारण नशे का कारोबार ही रहता है. ये लोग चंद ग्राम माल के बदले में मिलने वाले हजारों रुपए के लालच में आकर इस रैकेट का हिस्सा बन चुके हैं. 

कई तरह के नशीले पदार्थो का किया जा रहा प्रयोग:
नशे की पूर्ति के लिए शराब, गांजा या भांग तो है ही. लेकिन, नयी पीढ़ी नशे को लेकर भी कई के प्रयोग कर रहे हैं. नशा के लिए पेंट, थीनर,  पेट्रोल व व्हाइटनर का भी प्रयोग कर रहे हैं. इन पदार्थो को कपड़े पर डाल कर नाक से अंदर की ओर तेजी से सांस लेते हैं. इससे बहुत तेज नशा आता है. इसके गिरफ्त में शहर के कई युवा व किशोर हैं.  

बढ़ता है मानसिक बीमारियों का खतरा: 
वैसे तो सभी प्रकार के नशीले पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं, लेकिन गांजा के सेवन से व्यक्ति के लिए पागलपन का जोखिम बहुत बढ़ जाता है. इसका सेवन करने वाला व्यक्ति सनकी बन जाता है और बेवजह गुस्सा करने लगता है. इसकी लत छुड़वाने में समय लगता है. 

छोटे-छोटे पाउच में बिक रहा है नशा:
बड़े शहरों की तरह जैसलमेर में भी युवाओं को इसकी लत लगाने का काम चल रहा है. बडे शहरों से यह माल यहां लाया जाता है और छोटे-छोटे पाउच में बिक रहा है. आरोपियों के पास बरामद मात्रा बहुत ज्यादा है और यदि इस तरह के कई और भी लोग है तो जैसलमेर के युवाओं के लिए यह बहुत बड़ा खतरा है. इस मामले पर पुलिस अधीक्षक का कहना है की जैसलमेर में गांजा का कारोबार और सेवन करने वालों के खिलाफ पुलिस तत्काल रूप से कार्रवाई करेगी. चाहे वे किसी होटल में हों या सार्वजनिक स्थान पर.  

यह है हकीकत: 
- जैसलमेर शहर में ही कई चाय की थडिय़ों और बजट क्लास होटलों में गांजे का नशा करने वालों की महफिल जमती है.
- गड़ीसर सरोवर के आसपास, सिटी पार्क, सूनी पड़ी आवासीय कॉलोनियों में नशे की पुडिय़ा फुंकने वाले युवाओं ने अपना ठिकाना बना रखा है.
- युवा 5 से 10 के समूह में बैठकर गांजे का नशा करते हैं. उन्हें आसानी से 300 रुपए में 10 ग्राम और 100 रुपए में 3 ग्राम गांजे की मात्रा मिल रही है. 
- एक अनुमान के अनुसार नशे के कारोबारियों की संख्या 100 या उससे भी अधिक हो सकती है.

अभिभावक रखें अपने बच्चों पर नजर: 
अभिभावक को जरूरत है अपने बच्चों पर विशेष नजर रखे तभी कुछ हद तक इस पर लगाम लगाया जा सकता है. नशे की लत से होने वाली बीमारियों को अभिभावक अपने बच्चों को बताएं . जिसे नशे की लत लग चुकी है उसे नशाविमुक्ति केंद्रों में ले जाकर उनका मानसिक व शारीरिक इलाज भी कराएं. फिलहाल सदर अस्पताल में नशा विमुक्ति केंद्र व अर्श क्लिनिक में भी इसकी सुविधा है.

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