सदन में गूंजा पिछली सरकार की ओर से स्कूल बंद करने का मामला  

Dr. Rituraj Sharma Published Date 2019/02/11 11:24

जयपुर। 19 हजार स्कूलों को बंद करने का मसला आज विधानसभा में गूंजा। इसे लेकर सदन में पूर्व और मौजूदा शिक्षा राज्यमंत्री आमने सामने हो गए। आपसी छींटाकशी और नोकझोंक के बीच शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद डोटासरा ने बंद स्कूल्स को फिर शुरू करने के लिए परीक्षण कराने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि स्कूल बंदी के कारण ही जनता ने बीेजेपी की वोटबंदी कर दी। 

पिछली सरकार के दौरान राजस्थान में बन्द किये गए स्कूलों का मामला विधानसभा में गूंजा। प्रदेश में स्कूल एकीकरण और उन्हें फिर से शुरू करने का सवाल सोमवार को विधानसभा में गूंजा। पूर्व शिक्षा राज्य मंत्री और मौजूदा विधायक वासुदेव देवनानी ने यह मुद्दा उठाते हुए  सदन में  बंद या मर्ज स्कूलों का  पूरा ब्योरा सदन में रखने की मांग की  इसमें नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने हस्तक्षेप करते हुए  जीरो नामांकन वाले और 30 से कम नामांकन वाले स्कूलों की स्थिति स्पष्ट करने को कहा पूर्व शिक्षा राज्य मन्त्री वासुदेव देवनानी ने खुद सरकार से स्कूल एकीकरण पर सवाल पूछते हुए जानकारी मांगी। 

वासुदेव देवनानी ने पूछे सवाल 

1. सत्र 2014 से नवम्बर 2018 तक कितने स्कूलों का एकीकरण किया गया? 
2. क्या यह एकीकरण आरटीई के नियमों के तहत हुआ?
3. एकीकरण में आरटीई नियमों की पालना कितने मामलों में नहीं हुई?
4. क्या सरकार इनमें से कुछ स्कूल को फिर से शुरू करना चाहती है?
5. क्या सरकार कम विद्यार्थी संख्या वाले स्कूल भी फिर से शुरू करना चाहती है?

देवनानी के सवाल पर शिक्षा राज्य मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने जबाव देते हुए कहा कि साल 2014 से 2018 के सत्र तक पिछली सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के तहत 16 हज़ार 262 स्कूल एकीकृत करते हुए बंद किये। जबकि प्राथमिक शिक्षा देने वाले 5 हज़ार 942 स्कूल बंद किये। इसके साथ ही डोटासरा ने बताया कि कुल 22 हज़ार 204 स्कूल बंद करने के बाद सरकार ने 2 हज़ार 450 स्कूल फिर से खोले। डोटासरा ने बताया कि पिछली सरकार को 1 किलोमीटर दायरे वाले 2 हज़ार 60 स्कूल और 2 किलोमीटर दायरे वाले 384 स्कूल फिर से शुरू किये। 

स्कूल एकीकरण के मामले पर बोले शिक्षा राज्य मन्त्री

--पिछली सरकार ने बंद किये 22204 स्कूल। 
--एकीकरण के जरिये मर्ज किये स्कूल। 
--इनमें से 2450 स्कूल फिर से शुरू किये। 
--एक और दो किलोमीटर दायरे वाले स्कूल री-ओपन किये। 

उन्होंने 30 से कम नामांकन वाले और 15 से कम नामांकन वाले स्कूलों की भी जानकारी मांगी। इसके साथ ही इन पर होने वाला खर्चा और टीचर्स की संख्या की जानकारी भी मांगी। इस सवाल में बीेच में ही अपने विधायक के साथ नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया भी खड़े हुए और सरकार को घेरने की कोशिश की।  

मन्त्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए विपक्ष में बैठे बीजेपी नेताओं को कहा कि स्कूल बंद करने के कारण ही जनता ने बीजेपी के वोट बंद कर दिये। शिक्षा राज्य मन्त्री ने दावा करते हुए कहा कि उनकी सरकार स्कूलों की दशा भी सुधारेगी और एक बार फिर सत्ता में आएगी। 

डोटासरा ने सदन को बताया कि 182 स्कूल तो ज़ीरो ऐनरोलमेन्ट वाले हैं जबकि 28013 स्कूल में ऐनरोलमेन्ट तीस से भी कम है। डोटासरा ने कहा कि पिछली सरकार में एकीकरण के नाम पर बंद किये गए स्कूल फिर से खोलने के लिए उनकी सरकार ने कमेटी बनाई है। प्रत्येक उपखण्ड स्तर पर एसडीएम की अध्यक्षता में बनी इस समिति की रिपोर्ट पर स्कूल फिर से खोले जाएंगे। डोटासरा ने कहा कि जहां से स्कूल खोलने की मांग आएगी वहां गुण-अवगुण के आधार पर सरकार फ़ैसला करेगी। इसके साथ ही शिक्षा मन्त्री ने आरटीई एक्ट के नियमों के तरह स्कूल फिर से खोलने की बात भी सदन में कही।    

पूर्व सरकार में हमेशा स्कूलों को बंद करने का मुद्दा उठाते रहने वाले गोविंद सिंह डोटासरा अब बदली हुई भूमिका में थे उन्होंने देवनानी और कटारिया की एक एक सवाल का जवाब देते हुए सरकार का पक्ष पुरजोर तरीके से सदन के सामने रखा हालांकि इस दौरान देवनानी और कटारिया ने कई मुद्दों पर डोटासरा को घेरनेऔर पूर्व सरकार में किए गए स्कूलों के एकीकरण को सही ठहराने की कोशिश की।

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