जयपुर VIDEO: सावधान, लौट रहा है कोरोना ! नए वेरियंट ओमीक्रॉन ने बढ़ाई चिकित्सा विभाग की चिंता, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: सावधान, लौट रहा है कोरोना ! नए वेरियंट ओमीक्रॉन ने बढ़ाई चिकित्सा विभाग की चिंता, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: मौत रूपी कोरोना के बदलते स्वरूप ने एकबार फिर चिकित्सा विभाग की नींद उड़ा दी है.अफ्रीका समेत कई देशों में कोरोना के नए वेरियंट ओमीक्रॉन ने कहर मचा रखा है, जिसके चलते प्रदेश का चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर है.नए वेरियंट की सर्विलांस में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा रहा है, यही वजह है कि प्रदेश के सभी पॉजिटिव मरीजों की जिनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है.इसके साथ ही सीरो सविलांस के जरिए लोगों में इम्यूनिटी का भी पता लगाया जा रहा है.

कोरोना का बदलता स्वरूप हर किसी के लिए बड़ी चिंता बनता जा रहा है.राजस्थान की बात की जाए तो शुरूआत फेज में वुहान वेरियंट और फिर डेल्टा वेरियंट ने कहर बरपाया.हजारों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा और लाखों की तादात में लोग संक्रमण का शिकार हुए.इसके बाद से लगातार कोरोना अपना स्वरूप बदले ही जा रहा है.हालांकि, राजस्थान की बात की जाए तो अभी कुछ केस बढ़े है, लेकिन हालात कंट्रोल में है.फिर भी चिकित्सकों के लिए मौजूदा चिंता नए वेरियंट "ओमीक्रॉन" को लेकर है.कुछ दिन पहले ओमीक्रॉन वेरिएंट का पता चला है.इसे कई देशों में पाया गया है.जिसके बाद से राजस्थान का चिकित्सा विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है.किसी भी नए वेरियंट का जल्द से जल्द पता लग सके, इसके लिए हर पॉजिटिव मरीज के सैम्पल की जिनोम सीक्वेंसिंग चल रही है.

कोरोना का नया वेरियंट ओमीक्रॉन:
-26 नवंबर को WHO ने दिया इस वेरिएंट को ओमीक्रॉन नाम
-इसका साइंटिफिक नेम B.1.1.529 है, जिसके बारे में अध्‍ययन जारी
-कोरोना के इस वेरिएंट को बताया जा रहा काफी ज्‍यादा इंफेक्शियस
-पहली बार इस वेरिएंट की पहचान दक्षिण अफ्रीका में हुई
-यह स्‍ट्रेन बोत्सवाना सहित आसपास के देशों में फैल गया है
-इसने पूरी तरह से वैक्‍सीनेटेड लोगों को भी संक्रमित किया है
-चिकित्सकों की माने तो नया वेरिएंट ज्‍यादा ट्रांसमिसबल है
-यानी यह अधिक तेजी से फैलता है, इम्‍यूनिटी से लड़ने में यह ज्‍यादा कुशल है

एसएमएस मेडिकल कॉलेज में वैसे तो करीब छह माह पहले से रैंडम जीनोम सीक्वेंसिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी, लेकिन कोरोना के बहरूपिये अंदाज को देखते हुए अब हर पॉजिटिव मरीज के सैम्पल की जीनोम सीक्वेंसिंग हो रही है.एसएमएस के चिकित्सकों की माने तो अब तक करीब आठ सौ पॉजिटिव मरीजों की जीनोम सीक्वेंसिंग हो चुकी है.हालांकि, राहत की बात ये है कि इसमें से 88 फीसदी मरीजों में डेल्टा वेरियंट की पुष्टि हुई है.इसके अलावा शेष मरीजों में भी पुराने मिलेजुले वेरियंट ही सामने आए है.इस दौरान सिर्फ एक केस में डेल्टा प्लस वेरियंट जरूर देखा गया, लेकिन गनीमत ये रही कि इसका आगे स्प्रेड सामने नहीं आया.

 

एक नजर में जीनोम सीक्वेंसिंग:
-दरअसल, किसी भी वायरस के वेरियंट का पता लगाने के लिए होती है जीनोम सीक्वेंसिंग
-SMS मेडिकल कॉलेज में करीब 1 करोड़ रुपए की लागत से लगाई गई मशीन
-कॉलेज में इसी साल जून माह में जीनोम सीक्वेंसिंग की व्यवस्था शुरू की गई थी
-इससे पहले जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए प्रदेश से सैंपल दिल्ली या पूना भेजे जाते थे सैम्पल
-चिकित्सकों के मुताबिक जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए पहले सैम्पल की क्वालिटी चैक होती है
-पीसीआर में सीटी वैल्यू 30 से कम होती है तो ही उस सेम्पल को प्रोसेस में लिया जाता है
-इसके बाद आरएनए की क्वालिटी चैक की जाती है, जिसके बाद टेस्ट शुरू होता है
-एक जीनोम सीक्वेसिंग के रिजल्ट में कम से कम चार से पांच दिन का समय लगता है

कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमीक्रॉन सुर्खियों में है.इसे लेकर दुनियाभर में हाहाकार मचा हुआ है.इसे काफी इंफेक्‍श‍ियस यानी ज्‍यादा रफ्तार से फैलने वाला बताया जा रहा है.कुछ एक्‍सपर्ट्स का यह भी दावा है कि इस पर वैक्‍सीन बेअसर है.ऐसे मे पुराने कटुअनुभवों को देखते हुए यह जरूरी हो गया है कि लोग फिर से जागरूक हो और कोविड प्रोटोकॉल की पालना शतप्रतिशत शुरू की जाए.अन्यथा जरा की लापरवाही फिर से मरूधरा में बड़ा संकट खड़ा करने में देरी नहीं करेगी.

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