VIDEO: लोकसभा चुनाव में वंशवाद की वो भावी पीढ़ी जिन्हें नहीं मिला टिकट

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/05 11:17

जयपुर। वंशवाद की राजनीति में जड़े गहरी है। फिल्म इंडस्ट्री की तरह यहां पर भी वंशवाद देखा जा सकता है। अधिकांश स्थापित नेता ऐसे है जो अपने रिश्तेदार को राजनीति में आगे बढ़ता देखना चाहते है। यह अलग बात है कि कई बार किस्मत साथ नहीं दे पाती है। मौजूदा टिकट वितरण में कुछ ऐसा देखा गया। राजस्थान में ज्यादातर सीटों पर टिकट बंट गये है, लेकिन कई नेता अपने नाते-रिश्तेदारों को टिकट नहीं दिला पाये। लिहाजा इनकी चुनावी अभिलाषा अधूरी रह गई, अब इंतजार करना होगा आने वाले चुनाव का। खास रिपोर्ट:

राजस्थान में कुछ दिग्गज राजनेता चाहते थे कि उनके पुत्र, पुत्री यूं कहे नाते रिश्तेदारों को टिकट मिल जाये। प्रयास बहुत किये मगर सफलता हाथ नहीं लगी। कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों में यह देखने को मिला। वंशवाद की जड़ो को फलता फूलता देखना शायद इनके भाग्य में नहीं था। आपको ऐसे ही नेताओं के बारे में बताते है जो अपने परिवार की भावी पीढ़ी को आगे बढ़ाना चाहते थे। पहले बात करते है कांग्रेस की, इनमें कुछ ऐसे भी रहे जिन्होंने पारिवारिक सदस्य को आगे बढ़ाने से मना कर दिया। 

वंशवाद की वो भावी पीढ़ी जिन्हें नहीं मिला टिकट:

कांग्रेस में दावेदार:

बनारसी मेघवाल:
—मास्टर भंवर लाल मेघवाल की पुत्री है बनारसी
—बीकानेर से कांग्रेस से चाह रही थी टिकट लेकिन मिल नहीं पाया
—हालांकि बनारसी खुद कांग्रेस में स्थापित नेता है
—विधानसभा में भी इन्होंने टिकट मांगा लेकिन मिल नहीं पाया था
—गहलोत सरकार में सामाजिक न्याय आधिकारिता मंत्री है मा.भंवर लाल मेघवाल

कमल मीना:
—परसादी लाल मीना के पुत्र है कमल
—दौसा से कांग्रेस का लोकसभा टिकट चाह रहे थे कमल
—पीसीसी के सदस्य भी है कमल
—गहलोत सरकार में उधोग मंत्री है परसादी लाल मीना

राजपाल शर्मा:
—पूर्व मंत्री डाक्टर राजकुमार शर्मा के भाई है राजपाल
—जयपुर शहर से लड़ना चाहते थे लोकसभा चुनाव
—राविवि छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके और यूथ कांग्रेस में है उपाध्यक्ष

रोहित जोशी:
—मुख्य सचेतक महेश जोशी के पुत्र है रोहित
—जयपुर से लड़ना चाहते थे लोकसभा का चुनाव
—यूथ कांग्रेस में कई पदों पर रह चुके रोहित

रेखा कटारिया:
—कृषि मंत्री लालचंद कटारिया के भाई की पत्नी है रेखा
—जयपुर ग्रामीण से टिकट चाह रही थी रेखा
—कांग्रेस के टिकट पर लड़ना चाहती थी चुनाव
—एक बार लड़ चुकी है विधानसभा का चुनाव
—हालांकि लालचंद कटारिया खुद हीं नहीं चाहते

सरिता:
—खाजूवाला विधायक गोविन्द मेघवाल की बेटी
—नाम पर गंभीरता रही फिर भी टिकट से वंचित
—बीकानेर से पैनल में था सरिता का नाम

उषा पूनिया:
—जयपुर ग्रामीण से कांग्रेस टिकट का था दावा
—कद्दावर जाट नेता विजय पूनिया की पत्नी है उषा

भाजपा में दावेदार:

किरण यादव:
—अलवर के कद्दावर नेता जसवंत यादव की पत्नी है किरण
—किरण बनना चाह रही थी अलवर से भाजपा का चेहरा
—हालांकि पहले भी चुनाव लड़ चुकी है किरण

अविजीत सिंह:
—पंजाब राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के पुत्र है अविजीत
—भीलवाड़ा से चाहते थे भाजपा का टिकट

सुशील कंवर पलाड़ा:
—भाजपा के दिग्गज भंवर सिंह पलाड़ा की पत्नी है सुशील
—अजमेर और राजसमंद से थी टिकट की दावेदारी

कई दिग्गज ऐसे भी है जिनके परिवार में टिकट को लेकर बात चली, लेकिन बाद में उन्होंने ही चैप्टर को क्लोज करवा दिया। यूडीएच मंत्री  शांति धारीवाल की पुत्रवधू का नाम चला था, लेकिन उन्होंने ही आगे बढ़कर मना कर दिया। भरतपुर के पूर्व महाराजा और गहलोत सरकार में काबिना मंत्री विश्वेन्द्र सिंह की पत्नी दिव्या सिंह के नाम की चर्चा जयपुर ग्रामीण से चल रही थी, लेकिन आगे बढ़कर उन्होंने ही मना कर दिया। ठीक इसी तरह बात चली झालावाड़-बारां से उर्मिल जैन भाया की वे एक बार चुनाव लड़ भी चुकी है, लेकिन इस बार उनके पति प्रमोद जैन भाया ने रुचि नहीं दिखाई। हां यह जरुर है कि चिकित्सा और स्वास्थय मंत्री डॉ रघु शर्मा के पुत्र सागर शर्मा अजमेर से एक मजबूत नाम हो सकते थे, लेकिन किस्मत साथ नहीं थी, क्योंकि उनकी आयु ही कम निकली और वे टिकट का दावा नहीं जता पाये। वंशवाद एक तरह से टिकट मांगने का फ्लेटफार्म हो सकता है, टिकट मिले यह गारंटी नहीं हो सकता। 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट


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