VIDEO: राजस्थान होटल्स निगम लिमिटेड के अफसरों की मेहरबानी, 19 वर्ष में नहीं बदला किराएदार!

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/07 11:29

जयपुर: दिल्ली के हाट बाजार में एक स्टॉल राजस्थान पर्यटन विकास निगम को मिली. आरटीडीसी ने इसे चलाने से इनकार कर दिया. फिर राज्य सरकार ने पत्र लिखकर इसे होटल्स कॉरपोरेशन के नाम अलॉट करवाया. कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने एक निजी कम्पनी पर ऐसी मेहरबानी दिखाई कि 19 वर्ष में भी कम्पनी को बदलने के लिए कोई प्रयास नहीं किए हैं. 

निजी कम्पनी पर मेहरबानी का एक अनोखा मामला:
राजस्थान राज्य होटल्स निगम लिमिटेड के अफसरों की मेहरबानी और निजी कम्पनी पर मेहरबानी का एक अनोखा मामला सामने आया है. होटल्स कॉरपोरेशन को दिल्ली हाट में जो स्टॉल खुद संचालन के लिए मिली थी, उस स्टॉल को निगम के अधिकारियों ने एक निजी फर्म को आवंटित कर दिया. दरअसल मामला दिल्ली हाट बाजार से जुड़ा हुआ है. इसका संचालन दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम द्वारा किया जाता है. 11 अक्टूबर 1999 को राजस्थान राज्य होटल्स कॉरपोरेशन ने दिल्ली हाट प्रशासन को एक फूड स्टॉल आवंटित करने के लिए पत्र लिखा था. इस दौरान दिल्ली हाट प्रशासन ने आरटीडीसी को 23 नवंबर 1999 को स्टॉल आवंटित कर दी थी. लेकिन आरटीडीसी ने 18 जनवरी 2000 को फूड स्टॉल संचालित करने से इनकार कर दिया. इस पर होटल्स निगम के प्रबंध निदेशक ने पर्यटन विभाग के मार्फत दिल्ली हाट प्रशासन को स्टॉल आवंटन के लिए आग्रह किया था. 20 जनवरी 2000 को पर्यटन विभाग ने पत्र लिखा था. इसके आधार पर दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम ने स्टॉल आवंटन की शर्तों और किराया राशि को लेकर पत्र लिखा. हालांकि इसके बाद होटल्स कॉरपोरेशन ने स्टॉल को अपने स्तर पर संचालित करने के बजाय इसे किसी निजी फर्म से संचालित करने का निर्णय लिया और टेंडर आवंटित किए. होटल्स निगम ने यह तर्क दिया कि यदि स्टॉल का संचालन अपने स्तर पर किया जाता तो कर्मचारी नियुक्त करने पड़ते और वेतन का भुगतान करना पड़ता, जो कि लाभप्रद नहीं हो सकता था. 

कैसे हुआ पूरे प्रकरण में खेल ?
- 15 फरवरी 2000 को राजस्थान होटल्स निगम ने स्टॉल संचालन के टेंडर निकाले
- 23 फरवरी 2000 को निविदा खोलकर गोपाल रेबारी को चुना गया
- 36000 रुपए प्रतिमाह की दर से स्टॉल संचालन का किराया तय किया
- 1 अप्रैल 2000 से होटल्स निगम को यह स्टॉल संचालन के लिए मिली
- 60.39 वर्गमीटर स्टॉल के लिए दिल्ली हाट प्रशासन ने किराया 16500 रुपए तय किया
- वहीं होटल्स निगम ने गोपाल रेबारी के लिए किराया 38750 रुपए प्रतिमाह कर दिया
- तब से होटल्स निगम के नाम पर गोपाल रेबारी संचालित कर रहा है दुकान
- दिल्ली हाट प्रशासन फूड स्टॉल का आवंटन 2 वर्ष के लिए करता है
- सफलतापूर्वक संचालन पर हर 2 साल के लिए बढ़ाई जाती है अवधि
- इस तरह राजस्थान होटल्स निगम निजी कम्पनी का हर 2 साल में बढ़ा रहा अनुबंध
- और पिछले 19 साल से गोपाल रेबारी ही संचालित कर रहा है फूड स्टॉल

राजस्थान राज्य होटल्स निगम पिछले 19 वर्ष से स्टॉल संचालक गोपाल रेबारी को बदलने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा है. इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि दिल्ली हाट प्रशासन ने जो शर्तें लगाई हुई हैं, उनके तहत स्टॉल संचालक में बदलाव नहीं किया जा सकता. दिल्ली हाट प्रशासन की 19 जनवरी 2000 की शर्त संख्या 7 में किचन परिचालन के लिए निविदा जारी कर किचन ऑपरेटर नियुक्त किया जा सकता था। अधिकारियों का तर्क है कि इसके बाद 21 अप्रैल 2000 को दिए गए अनुबंध में शर्त बदल दी गई. शर्त संख्या 7 को हटाकर शर्त संख्या 10 जोड़ी गई जिसके तहत निगम को अपने स्टाफ द्वारा ही इसका संचालन करना था. दूसरी कम्पनी को इसे सबलेट नहीं किया जा सकता था. हालांकि इस शर्त के बावजूद निगम ने यह स्टॉल पिछले 19 वर्ष से दूसरी कम्पनी यानी गोपाल रेबारी को दी हुई है. 

अधिकारी क्या दे रहे हैं तर्क ?
- राजस्थान होटल्स निगम के अधिकारी दे रहे हैं मुनाफे का तर्क
- वर्ष 2000 से हर वर्ष निगम को हो रहा है किराए के रूप में फायदा
- शुरुआत में दिल्ली हाट को 16500 रुपए किराया दे रहे थे
- जबकि निगम को स्टॉल संचालक से 38750 रुपए किराया मिल रहा था
- हर वर्ष 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई स्टॉल संचालक पर
- वर्तमान में होटल्स निगम दिल्ली हाट प्रशासन को 64900 रुपए किराया दे रहा
- जबकि निगम होटल्स निगम स्टॉल संचालक से 198368 रुपए किराया ले रहा
- इस तरह बिना पूंजी व श्रम नियोजन के 133468 रुपए की आय हर माह हो रही
- लेकिन अधिकारी ये नहीं सोच रहे कि यदि नए सिरे से करते टेंडर
- तो दूसरी फर्म के जरिए 2 से 3 गुना अधिक किराया वसूली संभव
- दिल्ली हाट प्रशासन के साथ अनुबंध की शर्तों में बदलाव कराना भी है संभव

इस पूरे प्रकरण में यह साफ है कि राजस्थान होटल्स निगम लिमिटेड के अधिकारियों की मिलीभगत से ही निगम को राजस्व का चूना लग रहा है. वहीं निजी स्टॉल संचालक अधिकारियों की मेहरबानी से जमकर चांदी कूट रहा है. देखना होगा कि फर्स्ट इंडिया न्यूज पर इस खुलासे के बाद भी निगम सम्बंधित ऑपरेटर का लाइसेंस टर्मिनेट करता है या नहीं. 

...काशीराम चौधरी, फर्स्ट इंडिया न्यूज, जयपुर

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