आहोर विधानसभा सीट पर गरमाया चुनावी माहौल, टिकट की दौड़ शुरू

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/09/27 02:55

आहोर(जालोर)। विधानसभा चुनावों का समय जैसे जैसे नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राजनीति का पारा चढ़ता जा रहा है। बात अगर जालोर जिले की आहोर विधानसभा क्षेत्र की करें तो यहां दोनों प्रमुख राजनैतिक दलों में टिकिट के दावेदारों की फेहरिस्त बढ़ती ही जा रही है। बात वर्तमान सत्तारूढ़ दल भाजपा की करें तो वर्तमान विधायक शंकरसिंह राजपुरोहित टिकिट पाने के सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। शंकरसिंह राजपुरोहित के अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष रविंद्रसिंह बालावत राजपूत उम्मीदवार के तौर पर सबसे मजबूत दावेदारी कर रहे हैं। वहीं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य मानवेन्द्रसिंह राजपुरोहित सहित करीब दर्जनभर से ज्यादा टिकिट की दौड़ में शामिल है। 

वहीं कोंग्रेस में पूर्व मंत्री भगराज चौधरी के बेटे पीसीसी सचिव जगदीश चौधरी और पीसीसी सदस्य सवाराम पटेल मजबूत दावेदारों की फेहरिस्त में है। लेकिन दोनों ही दावेदार सचिन पायलट गुट से है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत किसी नए चेहरे को टिकिट देने की कोशिश करेंगे। अब नया चेहरा कौन होगा इसके बारे में कई नामो के कयास लगाये जा रहे है। बात अगर चौधरी जाति की करें तो वर्तमान में एक भी ऐसा चेहरा नहीं है जो अशोक गहलोत के नजदीक हो। ऐसे में गहलोत की पसंद राजपूत उम्मीदवार के रूप में सामने आ सकती है। आहोर विधानसभा क्षेत्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ से कई राजनैतिक पार्टियों ने जीत दर्ज करके विधानसभा में प्रवेश किया है। यहां से स्वतंत्र पार्टी, लोकदल, जनतादल, कोंग्रेस और भाजपा सभी पार्टियां जीत दर्ज कर चुकी है। ये सीट किसी एक राजनैतिक पार्टी का गढ़ कभी नही रहा। पर ये सीट राजपूतो का गढ़ मानी जाती है। अब तक हुए 14 विधानसभा चुनावों में आठ बार राजपूतो ने जीत दर्ज कर विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। वही चार बार यहां से चौधरी जाति ने विधायक बनाने में कामयाबी हासिल की तो दो बार यहां से शंकरसिंह राजपुरोहित विधायक बने है।

जातिगत समीकरण
आहोर विधानसभा क्षेत्र में राजपूतों का दबदबा माना जाता है। अगर बात पंचायत स्तर की करें तो पुरे विधानसभा क्षेत्र में 59 ग्राम पंचायत क्षेत्र है। जिसमे से 29 सीटें आरक्षित है। वही 30 सीटें अनारक्षित है। जिसमे से 22 सरपंच राजपूत है। वही आरक्षित सीटो में से करीब 14 सीटों पर उपसरपंच राजपूत है। राजपूत मतदाताओ की बात करें तो इस विधानसभा क्षेत्र में दो लाख साथ हज़ार वोटर है। जिसमे से  करीब  40 हज़ार से ज्यादा राजपूत मतदाता है। वही रावना राजपूत और भोमिया राजपूतो के 30 हज़ार के लगभग वोटर है। यानी राजपूत, रावना राजपूत और भोमिया राजपूत तीनो जातियों के कुल मिलाकर 70 हज़ार से ज्यादा वोटर इस विधानसभा का परिणाम तय करते है। 

वही 50 हज़ार से ज्यादा मतदाता अनुसूचित जाति वर्ग से है। तो 30 हज़ार के लगभग जनजाति के वोटर यहाँ निवास करते है। राजपुरोहित जाति के करीब 20 हज़ार वोटर तो चौधरी जाति के भी 25 के करीब मतदाता इस क्षेत्र में है। इसके अलावा देवासी, प्रजापत, ब्राहमण, जैन, सुथार, लोहार, नाई, चारण, वैष्णव, गोस्वामी जैसी छोटी संख्या के मतदाता भी निर्णायक भूमिका में है। जिनकी संख्या भी करीब 50 हज़ार से ज्यादा मतदाताओं की है। जिनका झुकाव भी राजपूतो के साथ माना जाता है। इसके अलावा मुस्लिम समुदाय के भी 8-10 हज़ार वोटर है।
आहोर विधानसभा क्षेत्र से राजपूत जाति के लोगों ने आठ बार विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया है। जो अब तक का सवार्धिक प्रतिनिधित्व है। 1952 से लेकर 1985 तक लगातार सात बार सिर्फ राजपूतो का एक छत्र वर्चस्व कायम था। 1985 में भारतीय लोकदल के उम्मीदवार भगराज चौधरी पहली बार यहाँ से गैर राजपूत के तौर विधायक बने। तब उन्होंने कांग्रेस के दलवीरसिंह भैसवाड़ा को बहुत कम वोटो के अंतर से हराया था। लेकिन 1990 में 9वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में जनतादल के प्रत्याशी बने भगराज चौधरी को हराकर कोंग्रेस के राजा गोपालसिंह भाद्राजुन यहाँ से पुनः विधायक बने।

उसके बाद 1993, 1998 और 2008 में कांग्रेस के भगराज चौधरी विधायक रहे। वही 2003 व 2013 में भाजपा के शंकरसिंह राजपुरोहित विधायक बने। राजपूतो ने यहाँ से स्वतंत्र पार्टी, रामराज्य परिषद्, जनता पार्टी और कांग्रेस के टिकिट पर लगातार जीत हासिल की है। जिसमे माधोसिंह भैसवाड़ा और उनकी पत्नी समंदर कंवर यानी एक ही परिवार ने लगातार 25 वर्ष तक विधायकी की है। वही एक बार छतरसिंह हरजी और दो बार राजा गोपालसिंह भाद्राजुन राजपूत प्रतिनिधि के रूप में विधायक चुने गए।

कोई भी उम्मीदवार लगातार तीसरी बार नही बन सका विधायक
1952 के पहले चुनाव में माधोसिंह भैसवाड़ा यहाँ से विधायक बने जो 1957 में दूसरी बार भी विधायक बने। लेकिन 1962 में हुए चुनाव में छतरसिंह हरजी ने उन्हें पटखनी देते हुए विधायकी छीन ली। 1967 में. माधोसिंह भैसवाड़ा पुनः विधायक और मंत्री भी बने लेकिन 1972 में उन्होंने चुनाव नही लड़ कर अपनी पत्नी समंदर कंवर को चुनाव लड़वाया और जीत दर्ज की। 1977 पहली बार कोंग्रेस ने भैसवाड़ा परिवार का टिकिट काटकर भगराज चौधरी को कोंग्रेस का उम्मीदवार बनाया। लेकिन तब जनता दल के राजा गोपालसिंह ने जीत दर्ज कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया और विधानसभा के अध्यक्ष बने। 

लेकिन 1980 में कांग्रेस ने पुनः भैसवाड़ा परिवार के समंदर कंवर को टिकिट देकर उम्मीदवार बनाया जिन्होंने जीत दर्ज कर अपनी विरासत को प्राप्त किया। 1985 में माधोसिंह भैसवाडा और समंदर कंवर के पुत्र दलवीरसिंह भैंसवाडा को कांग्रेस का टिकिट मिला पर वे हार गए और कांग्रेस से भारतीय जनता दल में आए भगराज चौधरी ने जीत हासिल कर आहोर से पहली बार विधायक बने और 1990 का चुनाव भगराज चौधरी चुनाव हार गए। 1993 और 1998 में लगातार दो बार भगराज चौधरी विधायक बने लेकिन 2003 में तीसरी बार जनता ने उन्हें विधायक बनने से रोक दिया। इस प्रकार कोई भी व्यक्ति लगातार तीन बार यहाँ से जीत दर्ज नही कर पाया। 
विक्रमसिंह करणोत 1st इण्डिया न्यूज आहोर
 

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