राजस्थान का एक ऐसा चमत्कारिक मंदिर जिससे डरती है पाकिस्तानी फौज

Nizam Kantaliya Published Date 2018/10/15 01:33

जयपुर। देश के कोने-कोने में शारदीय नवरात्रि की धूम है। 10 अक्टूबर से शुरू हुए नवरात्रि को लेकर लोगों की श्रद्धा देखते ही बन रही है। नवरात्रा के दौरान यूं तो देवी देवताओं को खुश करने के लिए हर कोई अपने पसंदीदा मंदिर में दर्शन कर रहा पूजा अर्चना कर रहा है । लेकिन हम आज आपको लेकर चल रहे है देश की सीमा पर स्थित एक ऐसे चमत्कारी मंदिर में जो ना केवल शांत रेगीस्तानी धोरो के बीच स्थित है बल्कि पुरे देश के सेना के लिए एक शक्ति का केन्द्र भी है । 

भारत पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित जैसलमेर को कौन नही जानता । इतिहास गवाह है कि ये शहर ही है जहां मध्यकालिन भारत में अफगानिस्तान के व्यापारियो के लिए एक बड़ा प्रवेश मार्ग रहा है जिसके जरिए वो भारत आकर डाई फ्रुटस का व्यापार करते रहे । रेगीस्तान में बसा ये शहर अपने आप में कई ऐतिहासिक युद्धो का इतिहास भी अपने आप में समेटे हुए है । लेकिन 1965 के भारत पाक युद्ध के बाद ये शहर पुरी दुनिया में प्रसिद्ध हो गया । 

जी हां हम बात कर रहे है विश्व प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर की । जिसे युद्ध वाली माता, सीमा की रक्षा करने वाली माता, आवड माता से लेकर हिंगलाज माता के रूप से भी जाना जाता है । जैसलमेर से 130 किलोमीटर की दूरी पर देश की सीमा पर स्थित इस मंदिर का निर्माण भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने विक्रम संवंत 828 में कराया था । 

मंदिर परिसर में गिरे 450 बम
1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान तनोट माता मंदिर में हुए चमत्कार ने पूरे विश्व का ध्यान खिंचा । इस युद्ध में पाकिस्तान की सेना ने इस मंदिर पर करीब 3000 बम गिराए गये थे । यहा तक कि मुख्य मंदिर के अंदर ही 450 बम गिरे लेकिन एक भी बम नही फटा । मंदिर में गिराये गये बम आज भी इस मंदिर में भक्तों के दर्शन के लिए मौजूद है । मंदिर में हुए इस चमत्कार के बाद सेना के लिए ये मंदिर सिर्फ एक मंदिर ना होकर शक्ति का केन्द्र बन गया । आज देश की सीमा पर तैनात होने वाला हर सैनिक पहले इस मंदिर के दर्शन कर आर्शिवाद लेता है फिर ही वो अपनी डयूटी जोईन करता है ।

4 दिसंबर 1971 कि रात को भी पंजाब रेजिमेंट और सीमा सुरक्षा बल कि एक कंपनी ने माँ कि कृपा से लोंगेवाला में पाकिस्तान कि पूरी टैंक रेजिमेंट को धूल चटा दी थी और लोंगेवाला को पाकिस्तानी टैंको का कब्रिस्तान बना दिया था।  लोंगेवाला कि विजय के बाद मंदिर परिसर में एक विजय स्तंभ का निर्माण किया गया जहा अब हर वर्ष 16 दिसंबर को सैनिको कि याद में उत्सव मनाया जाता है । 

सेना करती है मंदिर का रखरखाव
1965 कि लड़ाई के बाद इस मंदिर का जिम्मा सीमा सुरक्षा बल को दिया गया। उसके बाद से ही सेना ही इस मंदिर में अलसुबह होने वाली 4 बजे की आरती से लेकर इस मंदिर का संपूर्ण रखरखाव करती है । यही नही इस मंदिर से आने वाले चढावे से रेगीस्तानी इलाके में मूक पशुओं के लिए चारे पानी से लेकर स्थानीय नागरिको की चिकित्सा, बच्चो की शिक्षा सहित कई विकास कार्य के लिए सुविधाए जुटा रही है। यूं तो पूरे वर्ष भर ही इस मंदिर में दर्शन के लिए भक्तो की कतारे लगी रहती है । लेकिन नवरात्रा के दौरान देशभर से भक्त यहा खासतौर से सुबह की आरती में शामिल होने के लिए आते है।  तनोट माता के इस मंदिर में नवरात्रा के दौरान खास रौनक छायी है । सेना के जवानो के साथ अब पुरे देश से लोग यहा पहुंच रहे है।

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