संकट में प्रदेश का 'क्रिकेट', आखिर कब खत्म होगा RCA का 'गड़बड़झाला'!

Naresh Sharma Published Date 2018/10/13 07:41

जयपुर। राजस्थान क्रिकेट संघ में लगता है ग्रहण लग गया है। आरसीए पदाधिकारियों के कारण पहले बाहरी खिलाड़ियों ने यहां के खिलाड़ियों का हक मार दिया और भारतीय क्रिकेट बोर्ड भी चयनकर्ता भी राजस्थान से बाहर के लाना चाहता है। आरसीए के विवाद का फायदा मौजूदा चयनकर्ता भी उठाना चाहते हैं और उन्होंने टीम की कमान भी बाहरी खिलाड़ी को सौंपना तय कर लिया है।

लगता है कि राजस्थान क्रिकेट संघ के बुरे दिन खत्म नहीं होने वाले। संघ के ऑफिस पर ताले लग चुके हैं, बैंक खाते सीज पड़े हैं। टीम में खिलाड़ियों का चयन चहेतों का होता है। घरेलू टूर्नामेंट ठप्प पड़े हैं और अब चयनकर्ता भी राजस्थान से बाहर के तैनात करने की तैयारी कर ली है। रणजी टीम की कमान भी बाहरी खिलाड़ी को दी जा रही है। टीम राजस्थान की मौजूदा चयन समितियों पर सवाल खड़े हुए हैं। चयनकर्ता नियम विरुद्ध पद पर बने हुए हैं। खिलाड़ियों ने उन पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उम्मीद की जा रही है कि हाईकोर्ट की अगली सुनवाई में इन विवादित चयनकर्ताओं की छुट्टी हो जाएगी, लेकिन चिंता की बात यह है कि बीसीसीआई ने नए चयनकर्ताओं के लिए जो नाम सुझाए हैं, उनमें एक भी राजस्थानी नहीं है।  

बीसीसीआई ने सीनियर चयन समिति के लिए मिलिंद, शांतनु, अविनाश, प्रीतम गंधे, प्रदीप के नाम दिए हैं, वहीं जूनियर चयन समिति के लिए संतोष, निखिलेश, संजय, देवाशीष व भल्ला के नाम प्रस्तावित किए हैं। ऐसा ही महिला चयन समिति मे हैं। खास बात यह है तीन चयन समिति के लिए दिए गए 15 नामों में से एक भी राजस्थान का नहीं है। राजस्थान टीम में पहले से ही पांच ऐसे खिलाड़ी हैं, जो मूल रूप से राजस्थान के नहीं है। यानी राजस्थानी खिलाड़ियों का हक मारकर चयनकर्ताओं ने इनको राजस्थान टीम में शामिल कर लिया। अब चयनकर्ता भी बाहर के आ जाएंगे। चर्चा तो यह भी है कि टीम का कप्तान भी दीपक चाहर को बनाया जा रहा है, जो मूलरूप से उत्तरप्रदेश के हैं। ऐसे में जब सब कुछ राजस्थान से बाहर का हो जाएगा, तो फिर राजस्थान में क्रिकेट संघ का मतलब ही क्या रह जाएगा।

एक तरफ राजस्थान क्रिकेट में सब कुछ बाहर का होता जा रहा है, वहीं सरकार भी क्रिकेट पर कम मेहरबान नहीं है। खेल परिषद ने बीसीसीआई को 28 लाख की बजाय महज 10 लाख रुपए प्रति माह किराये में एसएमएस स्टेडियम का क्रिकेट मैदान दे दिया है। किराया तय होने से पहले तो मैदान पर मैच भी हो गए। देश का सबसे धनी खेल संघ बीसीसीआई क्रिकेट के कारण प्रति वर्ष अरबों रुपए कमाता हैं, इसके बावजूद बोर्ड के प्रस्ताव पर खेल परिषद ने 10 लाख रुपए किराये पर ही मैदान दे दिया। खेल परिषद के अधिकारियों के अनुसार बीसीसीआई तो फ्री में ही मैदान चाहता था। वहीं दूसरी तरफ खेल परिषद का करीब एक करोड 40 लाख रुपए का किराया आरसीए पर बाकी है। आईपीएल आयोजन के पेटे यह राशि बकाया है, लेकिन भुगतान अभी तक नहीं हुआ। एसएमएस स्टेडियम में स्थित क्रिकेट एकेडमी भी खेल परिषद की बिजली से ही रोशन हो रही है, जबकि बिजली का बकाया भी नहीं चुकाया जा रहा।

चयनकर्ता व किराया विवाद के बीच बड़ी चर्चा आरसीए के चुनाव को लेकर भी है। आरसीए की एडहॉक कमेटी के कंधों पर यह जिम्मेदारी है। रजिस्ट्रार सहकारिता ने तीन महीने का समय एडहॉक कमेटी को दिया है। एडहॉक कमेटी फिलहाल टूर्नामेंट कराने में व्यस्त थी, कोर्ट के आदेश के बाद अब टूर्नामेंट तो नहीं हो सकते, ऐसे में अब कमेटी पूरी तरह अब चुनाव कराने में जुट गई है। अगले कुछ दिनों में चुनावी नोटिस जारी हो जाएगा। चुनाव के बाद नई कार्यकारिणी बनने से ही आरसीए के रास्ते खुल सकते हैं। तब ही बीसीसीआई आरसीए पर से प्रतिबंध हटा सकती है। प्रतिबंध हटे बिना क्रिकेट विवाद भी कोर्ट से बाहर नहीं आ सकते। लेकिन चुनाव कराना भी काफी मुश्किल होगा, क़्योंकि चुनाव घोषणा के बाद मतदात सूची पर सबसे ज्यादा विवाद होने वाला है। 

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