विधानसभा चुनाव में नये नेताओं की जीत ने दिग्गजों के गड़बड़ा दिये समीकरण

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/19 11:28

जयपुर (योगेश शर्मा)। 'कबड्डी में काहे के काकाजी' यह कहावत राजनीति में सटीक बैठती है। जब नौसिखिए नेताओं से हार जाते है राजनीति के वटवृक्ष। मौजूदा चुनावों में भी यहीं देखने को मिला। पहली बार चुनाव के जरिये सियासत में कदम रखने वाले नेताओं ने अनुभवी और कद्दावर नेताओं को चुनावी समर में धूल चटा दी। इस बार के चुनावों ने सियासत की नई इबारत लिख दी।  विशेष सियासी रिपोर्ट-

राज्य की विधानसभा में पहला कदम रखने वाले कई विधायक ऐसे है जिन्होंने सियासत के नये प्रतिमान गढ़े है। ऐसा इसलिये है कि इन्होंने ऐसे दिग्गजों को चुनाव हराया है जो अपने क्षेत्रों और अपनी पार्टियों में रसूखात रखते थे जिनका चुनाव हारना वाकई अचरज भरा है। मौजूदा विधानसभा के चुनाव परिणामों में यह देखने को मिला। प्रदेश के चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री रह चुके दुरु मियां, नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के दिग्गज नेता रामेश्वर डूडी, पिछली सरकार में सहकारिता मंत्री रहे अजय सिंह किलक, राजे सरकार में ही पर्यटन मंत्री रही कृष्णेंद्र कौर दीपा, राज्य मंत्री रहे सुशील कटारा जैसे दिग्गजों को चुनावों में उन चेहरों से पराजित होना पड़ा जिन्हें पहले चुनावी जीत नहीं मिली या यूं कहे जिन्हें सियासत में चर्चित फेस नहीं कहा जाता है। जीवन में पहला विधानसभा चुनाव जीता वो भी दिग्गजों को हराकर लिहाजा आज चर्चा में है। बताते है आखिर कौन है यह दिग्गज-

------दिग्गज राजनेताओं को हराने वाले नये क्षत्रप------

संदीप यादव, तिजारा विधायक, बसपा
—संदीप यादव ने तिजारा में दुरु मियां को चुनाव हराकर सनसनी फैला दी
—संदीप को बीजेपी ने टिकट नहीं दिया था
—टिकट नहीं मिलने पर संदीप ने लड़ा हाथी के सिम्बल पर चुनाव
—राजे सरकार में यूथ बोर्ड के उपाध्यक्ष थे संदीप यादव

कैलाश चंद्र मीना,विधायक गढ़ी ,भाजपा
—कैलाश चंद्र मीना ने कांता भील जैसी दिग्गज को चुनाव हराया
—कांता भील पहले भी रह चुकी यहां से विधायक
—जीतमल खांट जैसे कद्दावर का टिकट काट कैलाश को बीजेपी ने दिया था टिकट

रमिला खडिया,विधायक कुशलगढ़,निर्दलीय
—रमिला ने भीमा भाई और फतेह सिंह जैसे दिग्गजों को चुनाव हराया
—रमिला को कांग्रेस पार्टी ने टिकट नहीं दिया था
—कांग्रेस ने यह सीट गठबंधन के तहत शरद यादव की पार्टी को थमा दी
—पार्टी के खिलाफ जाकर रमिला ने फतेह सिंह के खिलाफ बागी होकर चुनाव लड़ा
—उन्होंने राजे सरकार में संसदीय सचिव रहे भीमा भाई को चुुनाव हरा दिया
—खास बात फतेह सिंह और भीमा भाई दोनों ही मामा बालेश्वर दयाल के शिष्य रहे है

डॉ सुभाष गर्ग, विधायक भरतपुर, आर एळ डी
—डॉ सुभाष ने दिग्गज नेता विजय बंसल को चुनाव हरा दिया
—बीजेपी के विजय बंसल माने जाते रहे है चुनाव मैनेजमेंट के मास्टर
—कांग्रेस का टिकट चाह रहे सुभाष गर्ग को अंतिम समय में आर एल डी का टिकट मिला
—राजस्थान में चौ अजीत सिंह की पार्टी का खाता सुभाष गर्ग ने खोला
—कांग्रेस में राजीव गांधी स्टडी सर्किल के लिये जाने जाते रहे है गर्ग

बिहारी लाल विश्नोई, विधायक नोखा, भाजपा
—कांग्रेस के दिग्गज औऱ नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी को हरा सबको चौंकाया
—बिहारी पिछले विधानसभा चुनावों में समर में उतरे थे लेकिन निर्दलीय
—इस बार बीजेपी ने मौका दिया तो चित्त कर दिया नेता प्रतिपक्ष को
—पुलिस की नौकरी छोड़ कर सियासत में आये है बिहारी लाल विश्नोई
—डूडी को हराकर बिहारी ने कांग्रेस की सियासत को भी हिला दिया

ललित ओस्तवाल, विधायक बड़ी सादडी, भाजपा
—ओस्तवाल ने कांग्रेस के दिग्गज और पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी को हराया
—बीजेपी ने गौतम कुमार दक का टिकट काटकर ओस्तवाल को थमाया था
—प्रकाश चौधरी को इस इलाके का बड़ा राजनेता माना जाता है

राजकुमार रोत, विधायक चौरासी, बीटीपी
—राजकुमार रोत ने राजस्थान में भारतीय ट्राइबल पार्टी का खाता खोला
—बीजेपी के कद्दावर आदिवासी चेहरे सुशील कटारा को चुनाव हरा दिया
—राजे सरकार में मंत्री रह चुके है सुशील कटारा
—सुशील कटारा माने जाते है प्रबल राजनीतिक पृष्ठभूमि के

अमित चाचान, विधायक नोहर, कांग्रेस
—बीजेपी के दिग्गज अभिषेक मटोरिया को हराया चाचान ने चुनाव
—चाचान की पारिवारिक पृष्ठभूमि सियासत से जुडी है
—लेकिन विधानसभा में चाचान परिवार ने पहली बार कदम रखा
—अभिषेक मटोरिया लगातार नोहर से जीत रहे थे चुनाव
—सुचित्रा आर्य को हराकर अभिषेक ने नोहर को बनाया था बीजेपी का गढ़
—मटोरिया की रिश्तेदारी है हरियाणा के चौटाला परिवार में
—अमित चाचान ने चुनाव जीतकर बीजेपी के गढ़ को धवस्त कर दिया

अमिन कागजी विधायक किशनपोल ,कांग्रेस
—जिसका कोई ना पूछे हाल उसके संग मोहन लाल
—अब यह नारा किशनपोल की सड़को पर नही ं गूंजेगा
—अब यहां से चुनाव जीत चुके है कांग्रेस के अमीन कागजी
—हालांकि अमीन पहले भी चुनाव लड़ चुके लेकिन गुप्ता को हराना आसान नहीं था
—संघनिष्ठ फेस के साथ ही मोहन लाल की किशनपोल में पकड़ मजबूत थी
—बीजेपी भी इस सीट को प्लस मान कर चल रही थी 

रफीक खान विधायक आदर्शनगर ,कांग्रेस
—आदर्शनगर से अशोक परनामी को हराकर सनसनी फैला दी
—जबकि परनामी ने माहिर आजाद जैसे दिग्गज को दो बार हराया
—वहीं गोल्फ से सियासत के नये प्लेयर रफीक खान से हार बैठे परनामी

इंद्राज गु्र्जर, विधायक विराटनगर, कांग्रेस
—दिग्गज भाजपा नेता फूलचंद भिंडा को इंद्राज ने हराया चुनाव
—अंति्म समय में कांग्रेस ने दिया था इंद्राज को टिकट
—हालांकि इंद्राज का मुकाबला हुआ बीजेपी के बागी कुलदीप धनखड़ से
—कुलदीप का भी फूलचंद भिंडा को पीछे छोड़ना अचरज भरा था

गोविन्द प्रसाद रानीपुरिया, विधायक मनोहरथाना, भाजपा
—बीजेपी ने यहां से नये चेहरे गोविन्द रानीपुरिया को चुनावी समर में उतारा
—वहीं कांग्रेस ने कद्दावर और अनुभवी चेहरे कैलाश चंद मीना पर दांव खेला
—गोविन्द प्रसाद ने कैलाश चंद को चुनाव हरा दिया

पुखराज, विधायक भोपालगढ़, आरएलपी
—पुखराज ने एक नहीं दो ताकतवर नेताओं को चुनाव हराया
—राजे सरकार में मंत्री रही कमसा मेघवाल को चुनाव हराया
—वहीं कांग्रेस के दलित फेस भंवर बलाई को शिकस्त दे डाली
—हनुमान बेनीवाल ने अपनी पार्टी से पुखराज पर दांव खेला था

किसनराम विश्नोई, विधायक लोहावट, कांग्रेस
—बीजेपी के गजेन्द्र सिंह को हराकर किसनाराम ने सबको चौंकाया
—राजे सरकार में काबिना मंत्री थे गजेन्द्र सिंह खींवसर
—लोहावट को गजेन्द्र सिंह खींवसर के कारण ही जाना जाता है

महेन्द्र विश्नोई, विधायक लूणी, कांग्रेस
—बीजेपी के कद्दावर जोगाराम पटेल को हराया चुनाव
—महेन्द्र विश्नोई की पृष्ठभूमि सियासी है
—स्व.रामसिंह विश्नोई की अंगुली पकड़कर सियासत सीखी
—लेकिन जोगाराम पटेल को चुनाव हरा पाना आसान नहीं था

मीना कंवर, विधायक शेरगढ़, कांग्रेस
—पिछले कुछ सालों से शेरगढ़ के सियासी पर्याय थे बाबू सिंह राठौड़
—खेत सिंह राठौड़ को पराजित कर उन्होंने कांग्रेस से उसकी जमीन छीनी थी
—अब मीना कंवर ने बरसो बाद फिर से कांग्रेस के हाथ को यहां बुलंद किया
—बाबू सिंह राठौड़ की हार ने राजपूत राजनीति को भी हिला कर रख दिया

विजयपाल मिर्धा, विधायक डेगाना, कांग्रेस
—सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक को हराया चुनाव
—रिछपाल मिर्धा के पुत्र है विजयपाल मिर्धा
—युवा विजयपाल के लिये  चुनाव मुश्किल भरा था लेकिन सफलता मिली
—मंत्री के नाते किसान हित की बात करने वाले किलक हार बैठे किसान सियासत के गढ़ में

मुकेश भाकर, विधायक लाडनूं, कांग्रेस
—भाकर ने दिग्गज बीजेपी नेता मनोहर सिंह को चुनाव हरा दिया
—हालांकि आर यू छात्रसंघ के अध्यक्ष रह चुके भाकर
—लेकिन विधानसभा चुनावों में जीतना वाकई अहम
—ना केवल मनोहर सिंह बल्कि जगन्नाथ बुरडक को भी हराया

अविनाश गहलोत, विधायक जैतारण, भाजपा
—अविनाश की जीत खास क्योंकि सुरेन्द्र गोयल का टिकट उन्हें दिया था टिकट
—संघनिष्ठ अविनाश को अपनों की कलह का सामना करना पड़ा
—इसके बावजूद इस नये चेहरे ने कांग्रेस के अनुभवी दिलीप चौधरी को परास्त कर दिया
—दिलीप चौधरी और सुरेन्द्र गोयल दोनों को अविनाश के सामने शिकस्त खानी पड़ी

इंदिरा मीना, विधायक बामनवास, कांग्रेस
—इंदिरा मीना की जीत पूर्वी राजस्थान में हलचल पैदा करने वाली रही
—मीना पॉलिटिक्स के केन्द्र बामनवास में चुनाव जीतना बेहह अहम
—पहले विधायक रह चुके नवल किशोर मीना को चुनावों मे ंशिकस्त दी
—वहीं बीजेपी का कद्दावर कुंजीलाल मीना का परिवार भी ठहर नहीं पाया

वीरेन्द्र सिंह, विधायक दांतारामगढ़, कांग्रेस
—वीरेन्द्र ने कड़े मुकाबले में दो दिग्गजों को एक साथ शिकस्त गी
—उन्होंने बीजेपी के हरीश कुमावत और कॉमरेड़ अमराराम को हराया
—वीरेन्द्र की जीत के पीछे उनके पिता नारायण सिंह का बड़ा योगदान रहा
—नये चेहरे के तौर पर दांतारामगढ़ में लगातार कांग्रेस जीती पहले पिता अब पुत्र

सुरेश मोदी, विधायक नीम का थाना, कांग्रेस
—नीम का थाना को मोदी परिवार के कारण भी जाना जाता है
—मोहन मोदी ,विष्णु मोदी सरीखे नेताओं ने नाम रोशन किया
—सुरेश मोदी की जीत खास क्योंकि उन्होंने परायों के साथ अपनों को हराया
—बीजेपी के प्रेम सिंह बाजौर और रमेश खंडेलवाल को पराजित कर दिया

प्रताप लाल भील (गमेती), विधायक गोगूंदा, कांग्रेस
—तमाम सर्वे मांगी लाल गरासिया की जीत बता रहे थे लेकिन वो हार गये
—बीजेपी के प्रताप लाल भील ने मांगी लाल को चुनाव हरा दिया
—पिछली गहलोत सरकार में गरासिया रहे थे खेल मंत्री

राजस्थान की सियासत में दिग्गजों की हार और नये चेहरों की जीत का इतिहास रहा है। एक जमाने में कद्दावर नेता भैरों सिंह शेखावत को जयपुर के गांधीनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के नौजवान जनार्दन सिंह गहलोत ने चुनाव हराकर इतिहास रच दिया था। दौसा लोकसभा की सीट पर नाथू सिंह गुर्जर ने अपनी युवा अवस्था में पंडित नवल किशोर शर्मा को चुनाव हराकर सनसनी फैला दी थी। मेवाड़ के दिग्गज डॉ सीपी जोशी को 1वोट से नाथद्वारा में चुनाव हराकर कल्याण सिंह ने पहला चुनाव जीता और अचानक से सुर्खियों में आ गये। बीते विधानसभा चुनावों में दीया कुमारी ने दिग्गज राजनेता और मीना क्षत्रप डॉ किरोड़ी लाल मीना और जसकौर मीना को चुनाव हरा दिया था। किसनाराम नाई ने श्रीडूंगरगढ़ में कुंभाराम आर्य को परास्त कर राजनीति में भूचाल ला दिया। जीवन में एक चुनाव परसराम मदेरणा भी हारे जब उन्हें नये चेहरे नारायण राम बेड़ा ने चुनाव हरा दिया था। इतिहास में अनेकों और उदाहरण मिल सकते है। राजनीति उतार चढ़ाव के लिये ही जानी जाती है। सबसे ऐतिहासिक प्रबल प्रमाण है राजनारायण की जीत और इंदिरा गांधी की हार।

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