VIDEO: दुनिया ने माना राजस्थान के इन नेताओं के संवैधानिक कौशल का लोहा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/19 08:34

जयपुर: राजस्थान के राजनेताओं के संवैधानिक कौशल को ना केवल प्रदेश बल्कि पूरे देश में महारत हासिल है. ओम बिरला के चयन से यह बात साबित हो गई है. बीजेपी के विराट संसदीय दल में से ओम बिरला का इस प्रतिष्ठित पद पर आना राजस्थान के लिये गौरव की बात है. बिरला अब उन संवैधानिक शख्सियतों में शुमार हो गये, जो राज्य की राजनीति का नाम राष्ट्रीय फलक पर धाक के साथ स्थापित कर चुके. इनमें सबसे प्रमुख नाम रहा भैरों सिंह शेखावत का, बलराम जाखड़ भी सीकर से निर्वाचित होकर लोकसभा के स्पीकर बने थे. खास रिपोर्ट:

लोकसभा अध्यक्ष का पद देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों की वरियता में प्रमुख स्थान रखता है. राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ही लोकसभा के अध्यक्ष से ऊपर माने जाते है. ओम बिरला अब उसी संवैधानिक पद पर बैठेंगे जो देश के सर्वोच्च पदों में शुमार है. यूं कहा जा सकता है कि वो देश के निचले सदन लोकसभा के अध्यक्ष कहलायेंगे. लोकसभा ही देश में कानून बनाने में अपना योगदान देती है. ओम बिरला के पास यहीं जिम्मेदारी रहेगी कि वे महत्वपूर्ण सदन को सुचारु चलाने में अपना योगदान दे. हाड़ौती से आने वाले ओम बिरला के लिये यह गौरव का क्षण है कि वे अब उन अहम शख्सियतों में शुमार हो जाएंगे, जिन्होंने राजस्थान की माटी का गौरव पूरे देश में बढ़ाया. राजस्थान की सियासी धरा को संवैधानिक ख्याति दिलाने का काम किया भैरों सिंह शेखावत ने...

भैरों सिंह शेखावत:
देश के नम्बर 2संवैधानिक पद कहे जाने वाले उपराष्ट्रपति के पद को नवाजा भैरों सिंह शेखावत ने. इससे पहले राज्यसभा के सभापति के तौर पर उन्होंने अपने सियासी कौशल का लोहा मनवाया. कहा जाता है कि शेखावत ने जिस तरह से राज्यसभा को चलाया वैसे उदाहरण बिरले ही मिलते है. सत्ता और विपक्ष के फ्लोर को मर्यादित रखने में उन्हें कभी कोई दिक्कत नहीं आई, चाहे कितना ही विपरित परिस्थितियों का आलम ऊपरी सदन में रहा हो. यही कारण है कि भैरों सिंह शेखावत को देश की राजनीति में अजातशत्रु तक कहा गया. राजस्थान की राजनीति से निकलकर देश के सर्वोच्च पदों में शुमार उपराष्ट्रपति पद पर भी शेखावत उस समय रहे जब देश के राष्ट्रपति पद पर प्रख्यात साइंटिस्ट एपीजे अब्दुल कलाम रहे थे. भैरों सिंह शेखावत उपराष्ट्रपति के पद पर 19 अगस्त 2002 से 21जुलाई 2007 के बीच रहे. 

बलराम जाखड़:
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुये लोकसभा चुनावों में बलराम जाखड़ ने सीकर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीता. फिर उन्हें लोकसभा का स्पीकर बनाया गया. हालांकि वे पहले ही इस पद पर थे जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी. कहा जाये तो बलराम जाखड़ ऐसे स्पीकर रहे जो इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के सदन के नेता के पद पर रहते हुये स्पीकर के पद को संभाला. सबसे लंबे समय तक स्पीकर पद पर रहने का रिकार्ड भी जाखड़ का के नाम है वे 22 जनवरी 1980 से 18 दिसंबर 1989 तक लोकसभा के अध्यक्ष पद पर रहे. हालांकि मूल रुप से बलराम जाखड़ है पंजाब के निवासी, लेकिन राजस्थान में उनकी रिश्तेदारी और सियासी जड़े रही. 

चौधरी देवीलाल:
जैसे बलराम जाखड़ सीकर से सांसद बनकर लोकसभा के अध्यक्ष बने. वैसे ही 1989 में सीकर से चुनाव जीतकर चौधरी देवीलाल देश के उपप्रधानमंत्री बने थे. हरियाणा के कद्दावर किसान नेता चौधरी देवीलाल ने उस समय रोहतक और सीकर दोनों जगहों से चुनाव लड़ा था. सीकर उनके लिये शुभ साबित हुआ और उस दौर की सियासत के नम्बर 2 चेहरे कहलाये. 

रामनिवास मिर्धा:
राजस्थान के कद्दावर किसान नेताओं में रामनिवास मिर्धा की गिनती होती है. मिर्धा 1977 में राज्यसभा के उपसभापित रहे. उन्होंने संसद के ऊपरी सदन चलाने की जिम्मेदारी उठाई. संवैधानिक कौशल के लिये उन्हें जाना जाता रहा है. राजस्थान की विधानसभा के भी वे स्पीकर रहे थे. 

ओम बिरला:
संवैधानिक सियासत के सफर में ओम बिरला का नाम धूमकेतु की तरह चमका है. लोकसभा के अध्यक्ष के गरिमामय पद पर आना किसी गौरव से कम नहीं है. हाड़ौती के इस नेता ने बतौर संसदीय सचिव राजस्थान की विधानसभा में सदन के नियम कानूनों का पहली पार पाठ पढ़ा था. लोकसभा में लगातार दूसरी बार सांसद बने है, लेकिन पहली बार ही उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया था. सदन के निचले सदन में जब राजस्थान और कोटा से जुड़े सवाल करते थे, तब उनकी ओजपूर्ण धारा प्रवाह शैली सबका ध्यान खींचती थी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी क्षमता को शायद भांप लिया था. वहीं पिछले करीब 30 सालों से अमित शाह उनकी राजनीतिक स्टाइल को जानते है. यह संयोग है कि अमित शाह जब भारतीय जनता युवा मोर्चा के पहली बार सदस्य बने उस समय ही ओम बिरला भी सदस्य बने थे, आगे चलकर ओम बिरला युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे. 

अमित शाह की पसंद के तौर पर बिरला:
राजस्थान की सियासत में ओम बिरला भले ही दो बार विधायक रहे और बाद में लोकसभा के सांसद बन गये, लेकिन दिल्ली की सियासत में उनका दखल बर्सो पुराना रहा है. उनकी मित्रता दलगत राजनीति से सदैव ऊपर रही. राजनीतिक और संगठनात्मक कौशल के कारण उन्हें अमित शाह ने समय समय पर विभिन्न चुनावी क्षेत्रों में प्रमुख जिम्मेदारी देकर भेजा, लेकिन लोकसभा का स्पीकर उन्हें बनाया जाएगा. यह उम्मीद तो शायद ओम बिरला को भी पहले नहीं होगी. उन्हें तो आस थी मोदी सरकार में मंत्री बनने की, लेकिन सियासी किस्मत कुछ ओर चाहती थी. चम्बल नदी की धरा से निकले ओम की वाणी अब पूरी लोकसभा सुनेगी और ओम-ओम-ओम ही गूंजता नजर आयेगा. 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट


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