पीसीसी में करीब 200 पदाधिकारी, लेकिन करीब 150 अपने ही क्षेत्र में रहे फिसड्डी ! 

Naresh Sharma Published Date 2019/06/11 07:11

जयपुर: लोकसभा चुनाव में प्रदेश के अधिकांश मंत्री व विधायक अपनी सीट पर कांग्रेस को बढ़त दिलाने में नाकाम रहे, लेकिन इसके साथ ही पार्टी के कर्णधार माने जाने वाले पदाधिकारी भी अपने क्षेत्र से कांग्रेस की नैया पार नहीं लगा सके. पीसीसी में करीब 200 पदाधिकारी है, लेकिन करीब 150 पदाधिकारियों के क्षेत्र में पार्टी चुनाव में पिछड़ गई.

अपने ही क्षेत्र में रहे फिसड्डी:
छह महीने पहले कांग्रेस की टिकट पर विधायक का चुनाव जीतने वाले और मंत्री पद की शपथ लेने वाले अधिकांश नेताओं की आम चुनाव में हवा निकल गई. इन नेताओं के क्षेत्र से कांग्रेस बुरी तरह हारी. इतना ही नहीं 25 कांग्रेस प्रत्याशियाें में से भी अधिकांश अपने क्षेत्र व बूथ से बढ़त नहीं दिला सके. पार्टी इनकी जांच भी कर रही है, लेकिन एक और खास बात है पार्टी पदाधिकारियों की. प्रदेश कांग्रेस कमेटी में करीब 200 पदाधिकारी है, जो करीब पांच वर्ष से जमे हुए हैं. इनके हाथ में संगठन का काम था, बूथ को मजबूत करने की जिम्मेदारी थी और प्रत्याशियों के लिए माहौल बनाने का जिम्मा, लेकिन ये सभी जगह फेल हुए. 

जनता ने किया रिजेक्ट, पार्टी ने दिया बड़ा पद:
पीसीसी में अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष के एक-एक पद के अलावा तीन वरिष्ठ उपाध्यक्ष हैं, तीनों के क्षेत्र से ही कांग्रेस को हार मिली. 21 उपाध्यक्ष भी पार्टी ने बना रखे हैं. इनमें मंत्रियों व विधायकों के नाम भी शामिल हैं. चुनिंदा ही पार्टी को बढ़त दिलवा सके. 38 महासचिव व 79 सचिवों की फौज महज कागजों तक सीमित रही. वॉर रूम में एसी की हवा लेने वाले अधिकांश पदाधिकारियों की जनता के बीच पैठ नहीं है. बस नाम मात्र के पदाधिकारी बने हैं. तीन तरह के सदस्य भी संगठन में हैं, लेकिन इनका योगदान भी नहीं के बराबर है. पार्टी में कैसे पदाधिकारी बने हैं, यह खुद कांग्रेस के ही विधायक रामनारायण मीना के मुंह से सुन लीजिए. मीना ने कहा है कि जो लोग पार्षद का चुनाव नहीं जीत सकते और जिनको जनता ने रिजेक्ट कर दिया, उनको पार्टी ने महत्व देकर बड़े पद पर बैठा रखा है.

आलाकमान के आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस ने तैयार की रिपोर्ट:
दिल्ली से आलाकमान के आदेश के बाद प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव की बूथवार रिपोर्ट तैयार की है. पार्टी ने पहले कहा था कि चुनाव में परिणाम के आधार पर भविष्य में नेताओं के भाग्य का फैसला होगा. ऐसे में बूथ वाइज रिपोर्ट का विश्लेषण करके यदि पार्टी फैसला लेती है, तो अधिकांश पदाधिकारियों की पदों से छुट्टी तय हो जाएगी. बस राजनीतिक नियुक्ति की रेवड़ी लेने की कोशिश में अधिकांश लोग पदाधिकारी बने रहे और फोटो शूट के समय कैमरे के सामने आते रहे. बूथ पर इन पदाधिकारियों की न सक्रियता नजर आई और न ही चुनाव प्रचार के दौरान भीड़ जुटा सके. 

संगठन में हो सकता है बदलाव:
पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने भी संकेत दिए हैं कि चुनाव परिणाम का विश्लेषण करने के बाद संगठन में बदलाव हो सकता है. दरअसल पीसीसी में कई पदाधिकारी तो नेताओं के रिश्तेदार या फिर कार्यकर्ता है, लेकिन इनका जनता में वजूद नहीं है. इसी कारण संगठन का काम निचले स्तर तक नहीं हो सका. बस पार्टी कार्यालय में बैठकर ख्याली पुलाव बनाए गए. अब कांग्रेस को वास्तव में संगठन को सक्रिय करना है, तो इन नकारा पदाधिकारियों की भी छुट्टी करनी होगी और संगठन के लिए सक्रियता से काम करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे लाना होगा, लेकिन फिलहाल जिस तरह से कांग्रेस में विवाद चल रहा है, उसके बाद तो ये पदाधिकारी भी गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं, ऐसे में देखना है कि आखिर पूरा संगठन कब एक जाजम पर नजर आएगा. 

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in