ये है राजस्थान की 10वो सीटें जिन पर होगी चुनौती गंभीर 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/20 10:08

जयपुर (योगेश शर्मा)। राजस्थान की 200सीटों पर कुछ ऐसी सीटें है जो त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले के कारण चर्चा का केन्द्र बन चुकी है। इन सीटों पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर होने के कारण यह सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण सीटें बन चुकी है। यहां कांग्रेस, बीजेपी के अलावा आरएलपी और निर्दलीय मुकाबले को कड़ा बना रहे है। फर्स्ट इंडिया ने 200 सीटों में से टॉप 10 चुनौतीपूर्ण या टफेस्ट सीटें चिन्हित की है, जहां परिणाम कुछ भी सामने आ सकता है। खास रिपोर्ट

राजस्थान के मौजूदा विधानसभा चुनाव पिछले चुनावों से बेहद अलग है। नई पार्टियां तो मैदान में है ही ,टिकट कटने के बाद दिग्गजों ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। लिहाजा कुछ विधानसभा सीटें कड़े मुकाबले के कारण चर्चा का केन्द्र बन गई है। 200में से जानते है टॉप 10सीटें ऐसी सीटें जहां त्रिकोणीय और चौकोणीय मुकाबले हो रहे है। 

त्रिकोणीय -चौकोणीय संघर्ष की टॉप 10चुनौतीपूर्ण सीटें

टॉप 1..रतनगढ़ विधानसभा क्षेत्र
—रतनगढ का इतिहास भी बहुकोणीय मुकाबलों के लिये जाना जाता रहा
—निर्दलीय के तौर पर राजकुमार रिणवां ने दिग्गज नेता हरिशंकर भाभड़ा को हराया था
—अब फिर रतनगढ़ दोहरा रहा है इतिहास 
—बीजेपी ने राजकुमार रिणवां को टिकट नहीं दिया वो बागी होकर लड़ रहे चुनाव
—कांग्रेस विचारधारा के अभिनेष महर्षि को आयात कर बीजेपी ने टिकट थमा दिया
—कांग्रेस ने बिलकुल नये चेहरे भंवर लाल पुजारी पर दांव खेला
—पुजारी रहने वाले है सालासर के,सालासार धाम आता है सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र में
—कांग्रेस के बागी पूसाराम गोदारा भी चुनावी समर में उतरकर मुकाबले को बहुकोणीय बना रहे है
—सभी उम्मीदवारों में राजकुमार रिणवां को ही निर्दलीय चुनाव जीतने का अनुभव

टॉप 2..जैतारण विधानसभा क्षेत्र
—जैतारण में त्रिकोणीय मुकाबलों का इतिहास रहा है
—इस बार बीजेपी के कद्दावर नेता सुरेन्द्र गोयल बागी होकर मैदान में है
—सुरेन्द्र गोयल यहां मौजूदा विधायक के साथ ही कुम्हार-प्रजापत वर्ग के बड़े नेता
—बीजेपी ने गोयल का टिकट काटकर अविनाश गहलोत को टिकट थमाया है
—अविनाश गहलोत बिलकुल नये चेहरे है और माली वर्ग से जुड़े है
—कांग्रेस पार्टी ने दिलीप चौधरी को यहां से मुकाबले में उतारा है
—दिलीप चौधरी बतौर निर्दलीय भी जैतारण से 1बार चुनाव जीत चुके है
—बीजेपी के बागी के तौर पर ही कॉपरेटिव बैंक के चैयरमेन पुष्पेन्द्र कुड़की मैदान में है

टॉप 3...श्रीडूंगरगढ विधानसभा क्षेत्र
—किसनाराम नाई ने श्रीडूंगरगढ़ को सियासी केन्द्र के तौर पर विख्यात किया
—यह वही किसनाराम है जिन्होंने बतौर निर्दलीय ही दो दिग्गज किसान नेताओं को चुनाव हरा दिया था
—चौधरी कुम्भाराम आर्य और दौलत राम सारण सरीखे किसान नेता यहां मात खा गये थे
—अब इसी दिग्गज किसनाराम का बीजेपी ने टिकट काट दिया है ,वे बागी होकर चुनावी समर में उतर गये
—बीजेपी ने नया प्रयोग करते हुये ताराचंद सारस्वत के रुप में ब्राह्मण कार्ड खेला है
—कांग्रेस पार्टी ने यहां अपने परम्परागत उम्मीदवार औऱ पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा पर दांव खेला
—लेफ्ट पार्टी के गिरधारी लाल मईया यहां सभी के समीकरण बिगाड़ रहे है
—श्रीडूंगरगढ़ का चुनाव बीते कई सालों से जाट और गैर जाट समीकरण पर आधारित रहा है

टॉप 4...श्रीगंगानगर विधानसभा क्षेत्र
—श्रीगंगानगर सदैव बहुकोणीय संघर्षो की जमीन रहा है
—इतिहास में दर्ज है कि भैंरो सिंह शेखावत भी श्रीगंगानगर से चुनावी भूल कर बैठे थे
—बीजेपी ने यहां पंजाबी कार्ड खेलते हुये बिलकुल नये चेहरे विनिता आहूजा पर दांव खेला
—कांग्रेस पार्टी ने भी स्थानीय पॉलिटिक्स के मुताबिक अशोक चांडक को मैदान में उतारा
—पूर्व विधायक राधेश्याम गंगानगर अरोड़ वोटों के दम पर फिर मैदान में है
—राधेश्याम गंगानगर को उनकी पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो बगावत कर दी
—कुम्हार-प्रजापत वोटों के समीकरण के कारण प्रहलाद राय टाक मैदान में उतरे है,वो भी बीजेपी बागी है

टॉप 5.........लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र
—लाड़पुरा की सियासी जमीन भवानी सिंह राजावात के कारण सदैव चर्चित
—कांग्रेस राज में सड़को पर लाठियां खाकर -प्रदर्शन करके राजावत नेता बने
—अब उनकी मूल पार्टी बीजेपी ने उनका साथ छोड़ दिया है 
—राजावत की जगह कोटा राजपरिवार की कल्पना राजे है कमल के सिम्बल पर मैदान में
—कल्पना के पति इज्येराज सिंह कांग्रेस पार्टी से रह चुके कोटा से सांसद
—कांग्रेस ने अपने पुराने चेहरे नईमुद्दीन को अवसर दिया लेकिन चुनावी समर में उतारा उनकी पत्नी गुलनाज को

टॉप 6.....दौसा विधानसभा क्षेत्र
—दौसा में पहले भी त्रिकोणीय संघर्ष और निर्दलीय की जीत का इतिहास रहा
—बीजेपी से बागी होकर चुनाव लड़ रहे नंदलाल बंशीवाल यहां से पहले भी निर्दलीय विधायक बन चुके है
—दलित नेता बंशीवाल का दौसा के सभी जाति-वर्गो में प्रभाव है
—बीजेपी ने एक बार फिर मौजूदा विधायक शंकर शर्मा पर दांव खेला
—डॉ किरोड़ी लाल मीना और चौतरफा अपनों के विरोध के बाद उन्हें टिकट मिला है
—मीना वोटों के दम पर पूर्व विधायक मुरालीलाल मीना कांग्रेस के टिकट पर मैदान में है
—सामान्य सीट पर चुनाव जीतने का उनका पुराना अनुभव रहा है

टॉप 7...थानागाजी विधानसभा क्षेत्र
—थानागाजी का चुनावी इतिहास रोचक औऱ बहुकोणाीय मुकाबलों का रहा है
—हेमसिंह भड़ाना थानागाजी में टिकट नहीं मिलने के बाद बगावत कर चुके है
—गुर्जर वोटों के दम पर भड़ाना ने निर्दलीय ताल ठोक दी है
—उन्हें चुनौती देने के लिये बीजेपी ने बानसूर से रोहिताश्व शर्मा को थानागाजी भेजा है
—रोहिताश्व शर्मा यहां जोगी और ब्राह्मण वोट समीकरण की जुगत में है
—भंवर जितेन्द्र सिंह ने यहां कांग्रेस चेहरे के तौर पर सुनील कुमार शर्मा को उतारा है
—भड़ाना और रोहिताश्व के व्यापक चुनावी अनुभव के बीच सुनील बिलकुल नये चेहरे है
—मीना वोटो के समीकरण को यहां कांती मीना हमेशा से ही तय करते आये है

टॉप 8......सिरोही विधानसभा क्षेत्र
—पॉ़लिसी मैटर के तहत कांग्रेस ने यहां संयम लोढ़ा का टिकट काट दिया
—विपक्ष में रहते हुये संयम लोढ़ा ने सिरोही की धरती पर आंदोलनों की झड़ी लगा दी थी
—लोढ़ा का टिकट काटा लेकिन कांग्रेस ने बीकानेर में बीडी कल्ला के लिये पॉलिसी बदल दी
—लोढा की जगह कांग्रेस ने जीयाराम आर्य को चुनावी समर में उतारा है
—अभी कांग्रेस का कैडर भी संयम के साथ नजर आ रहा है ऐसे में आर्य के लिये राह चुनौतीपूर्ण
—बीजेपी ने अपने जीताऊ फेस ओटाराम देवासी को चुनावी समर में उतारा है 
—देवासी-रेबारी समाज के भोपा होने के कारण यहां ओटाराम को यहां फायदा मिलता है

टॉप 8....बांसवाड़ा विधानसभा क्षेत्र
—वागड की धरती बांसवाडा इस बार राजनीतिक तौर पर काफी गर्म है 
—टिकट नहीं मिलने से खफा धनसिंह रावत चुनावी समर में कूद चुके है
—बीजेपी सरकार में मंत्री और पूर्व सांसद धनसिंह यहां आदिवासियों के मजबूत नेता
—धनसिंह का टिकट काटकर बीजेपी ने यहां लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हकरु मईड़ा को उतारा
—वहीं कांग्रेस ने चिरपरिचित चेहरे अर्जुन बामणिया पर दांव खेला
—बांसवाड़ा में मुस्लिम वोट भी महत्वपूर्ण है
—सामान्य और मुस्लिम वोटों का साथ यहां जीत का कारक बनेगा 

टॉप 9..पाली विधानसभा क्षेत्र
—पाली विधानसभा क्षेत्र में बहुकोणीय मुकाबले होते आये है
—कांग्रेस पार्टी ने यहां कई दिग्गजों के टिकट काट बिलकुल नये चेहरे पर दांव
—महावीर सिंह को लाकर कांग्रेस ने बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति बनाई है
—लेकिन कांग्रेस की राह में भीमराज भाटी रोड़ा बनकर उभर गये
—पूर्व विधायक भीमराज भाटी पाली के कद्दावर कांग्रेस नेता रहे है
—बगावत करके चुनाव लड़ने का उनका पुराना शगल रहा है
—बीजेपी ने परम्परागत चेहरे ज्ञानचंद पारख को फिर उम्मीदवार बनाया है
—जैन वर्ग पर पकड़ रखने वाले पारख यहां जीत का समीकरण जानते है
—जाट-दलित वोट पाली विधानसभा में निर्णायक भूमिका निभायेंगे

टॉप 10...राजगढ़(चूरु) विधानसभा क्षेत्र
—चूरु के राजगढ़ का चुनावी इतिहास संवेदनशील और रक्तरंजित रहा
—हरियाणा से बिलकुल सटा राजगढ़ गैंगवार और माफिया पॉलिटिक्स की धरती रहा
—जाट और राजपूत पॉलिटिक्स के इर्द-गिर्द यहां की सियासत रही है
—बीजेपी ने पुराने चेहरे रामसिंह कस्वां पर दांव खेला
—चुनावी कमान रामसिंह कस्वां के पुत्र राहुल के हाथों में है
—कांग्रेस ने ओलम्पियन कृष्णा पूनिया को चुनावी समर में उतारा है
—जाट वर्ग के बीच यहां कस्वां और पूनिया पॉलिटिक्स रही है 
—बीएसपी के मनोज न्यांग्ली पिछले 2चुनावों से दोनों दलों की जमीन खराब कर रहे है
—राजपूत क्षत्रप मनोज न्यांग्ली के लिये गैर जाट समीकरण फायदे का सौदा रहा है

राजस्थान में चुनौतीपूर्ण सीटों का अपना अलग इतिहास रहा है। हर चुनाव में इनकी पॉलिटिक्स नये अंदाज में सामने आती रही है। इसी पॉलिटिक्स ने बड़े बड़े दिग्गज सियासी सितारों को शीर्ष से जमीन पर ला दिया। इंतजार रहेगा टफेस्ट सीटों पर चुनाव परिणामों का। 
 

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