VIDEO: कांग्रेस की ये कैसी विचित्र विडंबना, अध्यक्ष बनने को पार्टी में कोई नहीं तैयार !

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/20 06:36

जयपुर: लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर रोज नया खुलासा सामने आ रहा है. वहीं आज कांग्रेस पार्टी में विचित्र विडंबना सामने आई है कि राहुल की जगह लेने को कोई तैयार नहीं है. पार्टी के जिस किसी नेता को आलाकमान ने प्रस्ताव दिया, उसी नेता ने हाथ जोड़कर माफी मांग ली. इसलिए अब सबकी निगाहें कद्दावर नेता अशोक गहलोत पर है. 

सोनिया और प्रियंका भी गहलोत के पक्ष में:
बताया जा रहा है कि खुद सोनिया और प्रियंका भी गहलोत के पक्ष में हैं, गहलोत को कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर दिल्ली बुलाने का फैसला लिया गया है. वहीं दूसरी और सबके मन में एक ही चिंता है कि गहलोत के दिल्ली आने पर राजस्थान का क्या होगा? क्या आलाकमान द्वारा भेजे गए मुख्यमंत्री को स्वीकार करेंगे गहलोत समर्थक विधायक ? क्योंकि मौजूदा विधायक दल में गहलोत के साथ लगभग 80% विधायक बताए जा रहे हैं. बस इसी उधेड़बुन के कारण फैसला नहीं हो पा रहा है. 

गहलोत ने मांगा सोचने के लिए समय:
जानकार सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि आलाकमान राजस्थान की चिंता छोड़कर गहलोत के नाम पर ही गंभीर विचार-विमर्श कर रहा है. यदि सूत्रों की माने तो ये 'ऑफर' खुद गहलोत को भी दिया जा चुका है और गहलोत ने सोचने के लिए तीन-चार दिन का समय मांगा है. वहीं इसके साथ ही गहलोत कैम्प की कुछ तीन-चार बड़ी शर्तें भी हो सकती है. यदि ऐसा हुआ तो नई कैबिनेट में वैभव गहलोत कैबिनेट मंत्री होंगे। 

गहलोत खुद उलझन में:
गहलोत हमेशा गांधी परिवार और कांग्रेस के आज्ञाकारी सिपाही रहे हैं, लेकिन इस बार गहलोत खुद उलझन में हैं, क्योंकि उनका मन दिल्ली में नहीं लगता। उनका मन बसता है जयपुर और जोधपुर की गलियों में, इसलिए गहलोत अब किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति में चल रहे हैं. दूसरी और आलाकमान ने गहलोत का विकल्प ढूंढने की संभावनाएं शुरू की हैं. स्वाभाविक तौर पर सचिन पायलट का नाम सामने है, लेकिन पायलट के नाम पर गहलोत कैम्प बिल्कुल तैयार नहीं है. ऐसे में भंवर जितेन्द्र-बीडी कल्ला-महेश जोशी के नाम पर भी अटकलें चल रही हैं. 

पायलट कैम्प की रहस्यमयी चुप्पी:
राजनीतिक प्रेक्षकों का है ये आकलन है कि यदि गहलोत दिल्ली चले गए तो गहलोत की राय से ही यहां दूसरा व्यक्ति उनकी कुर्सी संभालेगा, लेकिन ये सारी खबरें हैं अभी केवल अटकलबाजियों की श्रेणी में है. दूसरी ओर इस समूचे प्रकरण में पायलट कैम्प ने रहस्यमयी चुप्पी साध ली है. इस मामले में पायलट कैम्प के एक प्रवक्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि हमारे साथ गलत हुआ था. अब शायद आलाकमान इस गलती को सुधारे. इस तरह खेल की बिसात बिछाकर अब पायलट कैम्प चुप होकर बैठ गया है, लेकिन खुद पायलट कैम्प के मन में ये आशंका है कि गहलोत कैम्प के समर्थन के अभाव में शायद और कोई नाम ही सामने आए. तो फिर राजस्थान में क्या करेंगे पायलट ? तो फिर क्या डिप्टी सीएम एवं पीसीसी चीफ बने रहेंगे पायलट ? या फिर राजस्थान के झगड़े को निपटाने के लिए पायलट को भी बुला लिया जाएगा दिल्ली ? इन सारे सवालों के जवाब केवल भविष्य के गर्भ में है. लेकिन पत्रकारिता के नाते ये सभी संभावनाएं दर्शकों के सामने है. 

कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में गहलोत सबसे आगे:
इसी स्टेज पर एक प्रबल गहलोत समर्थक ने टिप्पणी की है और कहा कि 'राजस्थान में कांग्रेस का मतलब है गहलोत और अगर इस दर्शनशास्त्र को किसी ने तोड़ा तो फिर गहलोत के दिल्ली जाते ही राजस्थान सरकार गिर सकती है. लेकिन इस सारे घटनाक्रम में एक बात तो बिल्कुल सच है कि एक बार फिर कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में गहलोत सबसे आगे हुए. इसी बीच जयपुर के बड़े ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की है कि अक्टूबर 2021 तक गहलोत के ही मुख्यमंत्री बने रहने का योग है. 


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