VIDEO: क्या शिक्षा विभाग की लाखों रुपए की किताबें हो गई रद्दी ? अब सावरकर पर बवाल

Madan Kalal Published Date 2019/05/14 11:16

जयपुर। सियासत और स्कूली बच्चों की किताबों का जैसे चोली दामन का साथ हो गया है। बदलती सरकारों के साथ स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम भी बदल जाते हैं। राज्य में नई सरकार बनने के बाद अब नए शिक्षा सत्र के लिए 6 नई किताबें नए पाठ्यक्रम के अनुसार आएंगी। ताजा विवाद विनायक दामोदर सावरकर के चैप्टर से जुड़ा है। दसवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में सावरकर से जुड़े तथ्यों में फेरबदल के बाद प्रदेशभर में बवाल खड़ा हो गया है। 

राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल के प्रदेश भर के गोदामों में पिछले सत्र की बड़ी संख्या में किताबें पडी हुई है। मौजूदा सरकार ने अब पाठ्यक्रम में बदलाव करते हुए 6 नई किताबें नए शिक्षा सत्र से लाने का फैसला किया है। शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि इन किताबों में पाठ्य सामग्री में फेरबदल करना बेहद जरूरी था। इस पाठ्य सामग्री में भाजपा और आर एस एस की नीतियों से जुड़ी हुई सामग्री को बच्चों पर थोपा गया था। ऐसे में अब बच्चों को बिना विवाद की पाठ्य सामग्री दी जाएगी। जिससे प्रदेश के बच्चों में स्वस्थ मानसिकता विकसित हो सके। 

दसवीं की सामाजिक विज्ञान की नई किताब को लेकर बवाल 
नई सरकार ने कमेटी की सिफारिशों के अनुसार बदलाव कर दिया। इसमें इतिहास और राजनीतिक विज्ञान से जुड़े चैप्टर निशाने पर आए। दसवीं की सामाजिक विज्ञान की नई किताब को लेकर बवाल मच गया है। विनायक दामोदर सावरकर के चैप्टर में लिखा है कि सावरकर ने जेल के कष्टों से परेशान होकर ब्रिटिश सरकार के समक्ष दया याचिकाएं भेजी। सावरकर भारत को हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की मुहिम चलाते रहे। 1946 में पाकिस्तान निर्माण का उन्होंने जोरदार विरोध किया। फर्स्ट इंडिया के हाथ लगी इस किताब से अब सावरकर को पूर्व में महान बता रही पंक्तियां भी हटा दी गई है। 

बदलती सरकारे, बदलते पाठ्यक्रम
सरकारी बदलने के साथ जिसे राज्य में पाठ्यक्रम बदलने का ट्रेंड सा चल पड़ा है । पूर्व भाजपा सरकार की राज में भी पाठ्यक्रम में काफी फेरबदल किया गया था । इससे पूर्व की कांग्रेस सरकार में भी किताबों में काफी आमूलचूल परिवर्तन किया गया था । अब एक बार फिर किताबों में हुए बदलाव के बाद सियासत भारी गर्मा गई है। 

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