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खेतों में ही नहीं बल्कि किसान आंदोलन में भी पुरुषों के साथ खड़े होकर उनका साथ दे रही हैं हजारों महिलाएं

खेतों में ही नहीं बल्कि किसान आंदोलन में भी पुरुषों के साथ खड़े होकर उनका साथ दे रही हैं हजारों महिलाएं

सोनीपत (हरियाणा): नये कृषि कानूनों को लेकर केंद्र के विरूद्ध आंदोलन में हजारों किसानों को साथ देने के लिए पंजाब के विभिन्न हिस्सों से महिलाएं अपने बच्चों के साथ दिल्ली की सीमाओं पर पहुंची हैं और वे खुले में सर्दी के बावजूद उनके साथ डटी हुई हैं.

भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के नेता शिंगारा सिंह ने मंगलवार को बताया कि वृद्धाओं समेत करीब 15000 महिलाएं केंद्र के कृषि कानून के खिलाफ किसानों के आंदोलन में शामिल हुई हैं. भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) की नेता हरिंदर कौर बिंदू ने फोन पर कहा कि महिलाएं कृषि कानूनों के खिलाफ वर्तमान आंदोलन में बहुत सहयोग कर रही हैं. बड़ी संख्या में महिलाएं पश्चिम दिल्ली में हरियाणा में टिकरी बोर्डर पर रूकी हुई हैं. उनका कहना है कि अपने घरों से दूर वे ‘काले कानूनों’ को वापस कराने के लक्ष्य को पूरा कराने के लिए डटी हुई हैं.

बठिंडा से आयी 40 वर्षीय परमजीत कौर ने कहा कि हमें ठंड की परवाह नहीं है. हम अपने सहयोगी प्रदर्शनकारियों से कहते हैं कि यह लंबी लड़ाई होने जा रही हैं और उन्हें डटे रहना चाहिए. महिलाएं इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही है और मंच से कृषि कानूनों के खिलाफ आवाज भी उठाती हैं.

बिंदू ने कहा कि कई महिलाएं अच्छा वक्ता हैं और वे केंद्र द्वारा हाल ही में पारित कये गये कानूनों पर अपनी राय भी रखती हैं. उन्होंने कहा कि वे इन कानूनों का कृषक समुदाय पर संभावित बुरे प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाती हैं. प्रदर्शन स्थल पर महिलाएं दैनिक कार्य जैसे खाना बनाने और कपड़े धोने का काम भी कर रही हैं. वे टैक्टर ट्रॉयियों पर ही सोती हैं जिन्हें अस्थायी आश्रय में तब्दील कर दिया गया है.
बिंदु ने कहा कि कुछ महिलाएं अपने साथ बच्चों को भी लायी हैं. बच्चे अपनी पाठ्यपुस्तक लेकर आये हैं ताकि उनकी पढ़ाई का नुकसान न हो.
सोर्स भाषा
 

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