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VIDEO: मेवाड़ में गूंजेगी बाघों की दहाड़! कुंभलगढ़ में टाइगर रिजर्व बनाने की कवायद

VIDEO: मेवाड़ में गूंजेगी बाघों की दहाड़! कुंभलगढ़ में टाइगर रिजर्व बनाने की कवायद

जयपुर: सब कुछ योजना मुताबिक हुआ तो मेवाड़ की वीर धरा पर एक बार फिर से बाघों की दहाड़ सुनाई देगी. वन विभाग मेवाड़ में बाघ पुनर्वास को लेकर गंभीर है जल्द ही मेवाड़ क्षेत्र में बाघों को बसाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है. 

राजस्थान में केवल तीन टाइगर रिज़र्व: 
राजस्थान क्षेत्रफल के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा राज्य, वन्यजीवों के मामले भी किसी राज्य से कम नहीं. लेकिन अगर हम टाइगर रिज़र्व की बात करें तो फिलहाल राजस्थान में केवल तीन टाइगर रिज़र्व हैं. सवाई माधोपुर और करौली जिले का रणथंभौर, अलवर का सरिस्का और तीसरा मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिज़र्व जो की चार जिलों में कोटा, झालावाड़, बूंदी और चित्तौड़गढ़ में फैला है. वहीं बात करें क्षेत्रफल की तो रणथंभौर की तो इसका क्षेत्रफल 390 स्क्वायर किलोमीटर के आसपास तो सरिस्का करीब 860 स्क्वायर किलोमीटर और मुकुन्दरा करीब 750 स्क्वायर किलोमीटर के आसपास है.

रणथंभौर में सबसे ज्यादा 60 से 65 बाघ:  
रणथंभौर प्रोजेक्ट टाइगर के तहत 1973 में सम्मलित किया गया तो सरिस्का 1978 के आसपास कई वर्षों तक ये दो ही राजस्थान के टाइगर रिज़र्व बने रहे. इसके लगभग 35 वर्षों बाद 2013 में मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिज़र्व अस्तित्व में आया जिसमें भी बाघ वर्ष 2018 में ही बसाये जा सके. बाघों की संख्या की बात करें तो रणथंभौर में सबसे ज्यादा 60 से 65 बाघ वहीं सरिस्का में करीब 15 बाघ और मुकुन्दरा में 4 बाघ हैं. वर्ष 2004-05 के आसपास बाघ विहीन हो चुके सरिस्का में रणथंभौर से पुनः टाइगर को ला कर बसाया गया तो मुकुन्दरा में भी रणथंभौर के बाघों का ही कुनबा है. रणथंभौर में एक तरफ जहां टाइगर की आबादी अच्छा इज़ाफ़ा हुआ वहीं सरिस्का इनकी आबादी को स्थिर रखने में संघर्ष करता नजर आया. हाल ही में अरण्य भवन जयपुर में राजस्थान में टाइगर संरक्षण को लेकर एक बड़ी बैठक आयोजित की गई जिसमें वन विभाग के आला अधिकारियों सहित कई ख्यातनाम टाइगर एक्सपर्ट्स नें भाग लिया था. यहां उदयपुर के तत्कालीन सी.सी.एफ. राहुल भटनागर नें कुंभलगढ़ में बाघ पुनर्वास पर प्रेजेंटेशन दिया.

मेवाड़ में पुनः टाइगर को स्थापित करने के लिए मुहिम: 
इधर वन्यजीव प्रेमियों ने भी मेवाड़ में पुनः टाइगर को स्थापित करने के लिए मुहिम छेड़ रखी है. वन्यजीव संरक्षण कर्ता अनिल रोजर्स भी इस मुद्दे को पुरज़ोर ताकत से उठाते आये हैं. टाइगर संरक्षण को लेकर भारत यात्रा पर निकले रातीन्द्र दास में भी अपने उदयपुर प्रवास के दौरान मेवाड़ में बाघों को बसाने की बात कही. तो अब राजसमंद सांसद दिया कुमारी के एन.टी. सी. ए. सदस्य बन जाने से इन संभावनाओं को और बल मिला है. दिया नें भी कुंभलगढ़ और रावली टॉडगढ़ को प्रदेश के चौथे टाइगर रिज़र्व के रूप में स्थापित करने के प्रयासों पर जोर दिया है. 

रावली टॉडगढ़ व कुंभलगढ़ एक बेहतरीन वन्य क्षेत्र: 
राजसमंद में बसे रावली टॉडगढ़ व कुंभलगढ़ एक बेहतरीन वन्य क्षेत्र है, यहां, पैंथर, भालू, भेड़िया, सांभर, जँगली सुअर, लंगूर, जरख, सियार लोमड़ी सहित कई वन्यजीव हैं. दोनों के क्षेत्रफल को मिलाया जाए तो ये करीब 1200 स्क्वायर किलोमीटर का होता है इसमें अगर उदयपुर का क्षेत्र व पाली जिले का क्षेत्र भी मिलाया जाए तो लगभग 1500 स्क्वायर किलोमीटर के आसपास होता है जो कि राजस्थान के किसी भी टाइगर रिज़र्व के क्षेत्रफल से दो गुने से भी ज्यादा है. कुंभलगढ़ के दुर्ग की दीवार जहां चीन की दीवार के बाद सबसे बड़ी है तो दुर्ग अपने आप में मेवाड़ के इतिहास को समेटे हुए है. दिवेर भी एक ऐतिहासिक स्थल इस क्षेत्र की धरोहर है. रावली में एक तरफ जहां अरावली का सबसे ऊंचा झरना भील बेरी है तो बारिश के दौरान गोराम घाट की छंटा देखते ही बनती है. कामली घाट से कई घुमावदार स्थानों से गुजरती हुई रेल किसी हिल स्टेशन का आभास कराती है तो मोरों की सुरीली बोली भी यहां की एक विशेष पहचान है. कामली घाट में जहाँ लंगूरों की टोली देखने को मिल जाएगी तो रावली में दिन में भी आप को भालू के दर्शन हो सकते हैं. सांभर हिरण यहां आपको कुचालें भरते हुए नज़र आ जायेगा तो शाम ढलते ही पैंथर भी अपने शाही अंदाज में बाहर आता दिखाई देगा. एक मायने में माने तो यह क्षेत्र प्रदेश के चौथे टाइगर रिज़र्व के लिये बहुत ही अनुकूल है. इसके अलावा वन विभाग की प्रदेश के अलग अलग 8 स्थानों पर टाइगर को बसाने के अगले 10 वर्षों की योजना है.

मध्यप्रदेश में 6 टाइगर रिज़र्व: 
बात मध्यप्रदेश की करें तो यहां पहले से ही 6 टाइगर रिज़र्व हैं एवं सातवें को बनाने के प्रयास चल रहे हैं. राजस्थान टाइगर को नए स्थानों पर बसाने के प्रयास यदि सफल होते हैं तो ये यहां के वन्यजीव प्रेमियों की सबसे बड़ी जीत होगी और उस प्रभावशाली होटल लॉबी की हार जो नहीं चाहती है कि राजस्थान में टाइगर एक स्थान के अलावा कहीं बसे. वन्यजीव विशेषज्ञ अनिल रोजर्स कई वर्षों से इस प्रोजेक्ट के लिए प्रयासरत हैं. इसके लिए उन्होंने वन विभाग के उच्च अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करने के प्रयास के साथ-साथ मेवाड़ राजघराने के कुंवर लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ से भी इस बाबत चर्चा की, लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने भी इस प्रयास को अद्वितीय बताते हुए मेवाड़ में दोबारा टाइगर को स्थापित करवाने में अपना समर्थन ज़ाहिर किया. रोजर्स ने बताया कि यदि मेवाड़ में फिर से टाइगर को बसाया जाता है तो ये मेवाड़ ही नहीं मारवाड़ व वागड़ के लिए भी अच्छा होगा. उन्होंने कहा कि इस योजना के क्रियान्वयन के बाद टाइगर को तो अपनी पुरानी रियासत मिलेगी ही सही आने वाले समय में मेवाड़ मारवाड़ और वागड़ के लिए एक महत्वपूर्ण टूरिज्म सर्किट भी विकसित हो पाएगा. जिससे न केवल रोजगार के नए साधन उपलब्ध होंगे बल्कि सरकार के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी. 

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श्रीगंगानगर: प्रदेश के श्रीगंगानगर जिले का गबन से नाता टूटता हुआ नजर नहीं आ रहा है. पहले भी बेंको में गबन के मामले सामने आते रहे है शिक्षा विभाग में भी करोड़ो गबन के मामले में श्रीगंगानगर ख़ासा चर्चित रहा था. अब एक बार फिर से SBI बैंक मैनेजर द्वारा 68 लाख के घोटाले की बात सामने आ रही है. 

सदर थाना पुलिस की कार्रवाई:
हालांकि इस मामले में अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है क्यूंकि श्रीगंगानगर की सदर पुलिस ने अभी 68 लाख के बैंक घोटाले में बैंक मैनेजर ऋण शाखा को गिरफ्तार किया है. वहीं पुलिस सूत्रों की माने तो अभी इस मामले में इसके इसके एक ओर साथी के हाथ की बात सामने आ रही है. जिसको लेकर पुलिस भी सतर्क हो चुकी है. मामले में पुलिस को अभी दूसरे साथी की तलाश है जिसको पकडऩे के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है. 

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जानकारी के अनुसार मोहम्मद सदीक हाल शाखा प्रबंधक ने पुलिस में रिपोर्ट दी की हमारे बैंक के ऋण शाखा प्रभारी मनोज सोनी ने अपने एक साथी जयप्रकाश के साथ मिलकर किसी हरिराम किसान के नाम से फर्जी केसीसी बनाकर उठा ली. एसबीआई के ऋण शाखा मैनेजर मनोज कुमार सोनी ने दो केसीसी खातों से 68 लाख रुपए का गबन कर लिया. जिसमें उसके एक साथी जयप्रकाश का भी सहयोग रहा है. पुलिस ने बैंक मैनेजर मनोज कुमार सोनी को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे पूछताछ चल रही है. 

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जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये धर्म गुरुओं के साथ संवाद किया. जिसमें 30 जून तक धार्मिक स्थान बंद रखने पर सहमति बनी है. जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी. बैठक में धार्मिक स्थान खोलने पर अलग-अलग राय है. कुछ धर्म गुरुओं ने अभी लॉकडाउन जारी रखने की अपील की है. कुछ ने गाइडलाइन के साथ धार्मिक स्थल खोलने की दलील दी. बैठक में 30 जून तक धार्मिक स्थल बंद रखने पर राय बनी है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार पर छोड़ा है. 

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सालासर मंदिर के यशोदानंदन ने रखी अपनी बात: 
सीएम गहलोत ने सालासर मंदिर के यशोदानंदन से बात की. यशोदानंदन ने कहा सरकार के निर्देशों की पालना की जाएगी, अभी लॉकडाउन बढ़ाने की राय सीएम गहलोत को दी.  गलतापीठ के अवधेशाचार्य ने बात रखी,सिख धर्म गुरुओं ने भी अपनी राय दी, गोविंद देवजी के महंत अंजन कुमार ने अपनी बात रखी. अभी धार्मिक स्थलों पर रोक रखने की राय दी है. 

मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने दिया शुरुआती उद्बोधन:
सीएम गहलोत ने वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिये धर्म गुरुओं के साथ संवाद किया. वीसी में शुरुआती उद्बोधन मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने दिया. ACS रोहित कुमार सिंह ने प्रजेंटेशन दिया. राजस्थान में कोरोना की स्थिति से अवगत कराया. केंद्र सरकार की गाइडलाइन की जानकारी दी गई. इसके बाद धर्म गुरुओं से राय ली गई. वीसी में अमरापुर के नंदलाल महाराज, महंत कैलाश शर्मा, अंजन गोस्वामी, मुमताज मसीह, अवधेशाचार्य, काजी खालिद उस्मानी भी शामिल हुए. 

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अनलॉक 1 के दौरान अब हवाई यात्रा में बढ़ने लगी भीड़, ट्रेनों में अभी भी बड़ी संख्या में सीटें चल रही खाली

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जयपुर: एक तरफ जहां हवाई यात्रा अब गति पकड़ने लगी है, वहीं दूसरी तरफ ट्रेनों में यात्री भार कम देखा जा रहा है. कोविड-19 के डर की वजह से यूं तो शुरुआती दिनों में फ्लाइट्स में भी यात्रीभार काफी कम रहा. शुरुआती 1 सप्ताह तक 30 से 40% तक यात्रीभार ही विमानों में देखा गया, लेकिन अब फ्लाइट्स में 80 फ़ीसदी से भी ज्यादा सीटें फुल चल रही हैं. कई विमानों में तो केवल इक्का-दुक्का सीटें ही खाली चल रही हैं. जयपुर से कोलकाता, गुवाहाटी, पुणे, बेंगलुरु आदि शहरों के लिए हवाई यात्रीभार काफी ज्यादा है. जयपुर एयरपोर्ट से वर्तमान में रोजाना 12 से 13 फ्लाइट संचालित हो रही हैं. वहीं ट्रेनों की बात करें तो अभी भी यात्रीभार की कमी देखी जा रही है. 1 जून से जयपुर जंक्शन से 6 विशेष ट्रेनों का आवागमन चल रहा है. ये ट्रेनें मुंबई, अहमदाबाद, जोधपुर, दिल्ली, हावड़ा आदि शहरों को जोड़ रही हैं. हावड़ा और दिल्ली को छोड़ दें तो अन्य ट्रेनों में यात्रीभार की कमी देखी जा रही है. 

राजस्थान हाई कोर्ट में कॉलेजियम हो लेकर जारी रहा बैठकों का दौर, ग्रीष्मावकाश से पूर्व राजस्थान हाईकोर्ट में हो सकता है कॉलेजियम 

जानिए ट्रेन में कितनी सीटें मौजूद?

- ट्रेन संख्या 02956 जयपुर बॉम्बे सुपर में स्लीपर में 7 जून के लिए 223 सीटें उपलब्ध

- 8 जून के लिए 278, 9 जून के लिए 310, 10 जून के लिए 312 सीटें खाली

- इसी ट्रेन में 3AC में 7 जून के लिए 254 सीटें उपलब्ध

- 8 जून के लिए 263, 9 जून के लिए 260 और 10 जून के लिए 268 सीटें खाली

- 2AC में 7 जून के लिए 23, 8 जून के लिए 30 सीट खाली

- 9 जून के लिए 37, 10 जून के लिए 39 सीटें उपलब्ध

- जयपुर-जोधपुर सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन संख्या 02478 में 7 जून के लिए चेयर कार में 211 सीटें उपलब्ध

- 8 जून के लिए 210 सीटें, 9 जून के लिए 226 और 10 जून के लिए 216 सीटें उपलब्ध

- इसी ट्रेन में 3AC में 7 जून के लिए 85 सीटें उपलब्ध

- 8 जून के लिए 81 सीटें, 9 जून के लिए 110 और 10 जून के लिए 89 सीटें उपलब्ध

पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी की जमानत खारिज, बीमारी और कोरोना का हवाला देते हुए अदा की थी अर्जी 

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

राजस्थान हाई कोर्ट में कॉलेजियम हो लेकर जारी रहा बैठकों का दौर, ग्रीष्मावकाश से पूर्व राजस्थान हाईकोर्ट में हो सकता है कॉलेजियम

राजस्थान हाई कोर्ट में कॉलेजियम हो लेकर जारी रहा बैठकों का दौर, ग्रीष्मावकाश से पूर्व राजस्थान हाईकोर्ट में हो सकता है कॉलेजियम

जयुपर: राजस्थान हाईकोर्ट में एक बार फिर से दो साल बाद कॉलेजियम को लेकर चर्चा जोरों पर है. पिछले एक साल से करीब आधा दर्जन से बार से अधिक हाईकोर्ट में कॉलेजियम होने की चर्चाए चलती रही है. पूर्व चीफ जस्टिस एस रविन्द्र भट्ट के अंतिम समय में भी कई अधिवक्ताओं से नाम तक मांगे गये थे. लेकिन जजों की नियुक्ति को लेकर पहला कदम भी पूरा हो पाता उससे पूर्व ही जस्टिस भट्ट 4 माह के कार्यकाल के बाद ही सुप्रीम कोर्ट चले गये. वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस इन्द्रजीत महांति के आने के बाद से ही राजस्थान हाईकोर्ट में कॉलेजियम को लेकर चर्चाए चलती रही है. मुख्य न्यायाधीश की शपथ लेने के साथ ही सीजे महांति ने सभी साथी जजों से राय मशवीरा कर कई निर्णय लेने की बाते कही थी. शायद मुख्य न्यायाधीश अब राजस्थान से किये गये अपने वादे को पूरा करने जा रहे हैं. इसी के चलते पिछले कुछ दिनों में कॉलेजियम की कवायद के पंख लगे हैं. सूत्रों की माने तो पिछले सप्ताह शनिवार, रविवार के बाद सोमवार को भी कॉलेजियम ने काफी कवायद की है. फिलहाल कॉलेजियम द्वारा सभी नाम तय होने की कोई खबर नहीं है. लेकिन डीजे कोटे से अधिकांश नाम पर कॉलेजियम के तीनों जजों की बीच सहमति बनने की खबरे है. जिसके चलते डीजे कोटे के 8 नाम सबसे पहले तय किये जा सकते हैं. 

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अधिवक्ता कोटे के 17 पद और डीजे कोटे के 8 पद रिक्त: 
राजस्थान हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों के पदों की कुल संख्या 50 है. ये अलग बात है कि राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के 70 सालों में 2018 में पहली बार सबसे ज्यादा 36 जज कार्यरत थे. उसके बाद से ही जजों के तबादले और सेवानिवृति के चलते हाईकोर्ट में जजों की संख्या घटकर फिर से मात्र 25 रह गयी है. रिक्त 25 पदों पर नियुक्ति की कवायद शुरू होने की चर्चा है जिसके चलते पिछले सप्ताह कॉलेजियम के दूसरे जज जस्टिस संगीत लोढा के जयपुर में रहने और सीजे सहित कॉलेजियम के तीसरे जज के साथ बैठके होने की खबरे रही है. फिलहाल राजस्थान हाईकोर्ट में 17 अधिवक्ता कोटे से भरे जाने वाले पदों को लेकर बहुत ज्यादा उत्सुकता है प्रदेश के साथ ही दिल्ली के गलियारों में भी इन पदों पर होने वाली नियुक्तियों को लेकर निगाह बनी हुई. सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान हाईकोर्ट से जुड़े दो जजों की मौजुदगी के चलते वर्तमान कॉलेजियम को काफी सधकर कवायद करनी होगी. हाईकोर्ट के सूत्रो के अनुसार फिलहाल कॉलेजियम अधिवक्ता कोटे से 10—12 नाम पहली सूची में ग्रीष्मवकाश से पूर्व भेज सकता है वहीं कुछ नाम जुलाई माह में भेजे जा सकते हैं. 

2 सीटे रखनी होगी रिक्त:
राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा मई 2018 में भेजे गये 20 नाम मे से 2 नाम अभी भी पेडिंग है. अधिवक्ता कोटे के मनीष सिसोदिया और फरजंद अली के नाम की फाइल केन्द्र सरकार के पास पेडिंग है. फरजंद अली का नाम हाल ही में केन्द्र ने सुप्रीम कोर्ट वापस भेजा था. सूत्रों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर से फरजंद अली का नाम केन्द्र को रैफर कर चुका है. ऐसे में इन दो अधिवक्ताओं के नाम की फाइल पेडिंग होने से राजस्थान हाईकोर्ट 23 नाम ही भेजा सकता है. राजस्थान हाईकोर्ट में फिलहाल 25 जजों के पद रिक्त है उनमें से भी अधिवक्ता कोटे के नाम को लेकर सबसे ज्यादा पेचिदगी रहती है. 

17 पद पर दावेदारों की लंबी कतार:
एक वक्त था जब राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की खबर सिर्फ नियुक्ति आदेश के समय ही बाहर आती थी. लेकिन वक्त के साथ जजों के पद बढ़ने और अधिवक्ताओं में जजों के पद को लेकर बढ़ी महात्वाकांक्षा ने कॉलेजियम की खबरों को बाहर ला दिया. बहुत ज्यादा सतर्कता बरती जाने के बावजूद छनछनकर खबरे बाहर आती रही है. इस बार भी 17 में से 15 पदों के लिए प्रदेश की वकालात से जुड़े करीब दो दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं के नाम चर्चा में रहे हैं. अधिवक्ताओं के सोशल मीडिया पर भी इस बार कॉलेजियम को लेकर प्रतिदिन अलग अलग मैसेज वायरल हो रहे हैं. ये अलग बात है कि इन नामों की पुष्टि सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले अधिकारिक रूप से हाईकोर्ट कभी नहीं करता हैं. 

जयपुर हाईकोर्ट से नाम जो चर्चा में हैं— एडवोकेट शैलेशप्रकाश शर्मा, राजीव सुराणा, समीर जैन, सुदेश बंसल, --- दिनेश यादव, राकेश मीणा, राजेश गोस्वामी, स्वदीपसिंह होरा, हरेन्द्र सिनसिनवार, सुमति विश्नोई, शॉलिनी शेरोन  के नाम  चर्चा में रहे है...

जोधपुर हाईकोर्ट से नाम जो चर्चा में हैं — रेखा बोराणा, सुनील जोशी, विनीत जैन, मनोज भण्डारी, राजेश पंवार, कुलदीप माथुर,--- महेश थानवी, विकास बालिया, कुलदीप माथुर, सी एस कोटवानी,धीरेन्द्रसिंह, श्याम लदरेचा, डीके गौड़ और सुप्रीम कोर्ट में सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी सहित करीब दो दर्जन से अधिक अधिवक्ताओं के नाम फिलहाल चर्चा में है.

जिला एवं सत्र न्यायाधीश— वरिष्ठता क्रम के अनुसार प्रदेश की न्यायपालिका से 8 जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को भेजे जाने है राजस्थान हाईकोर्ट की वेबसाईट के अनुसार वरिष्ठता क्रम में डीजे नर्सिंगदास व्यास, डीजे उमाशंकर व्यास, डीजे संगीता शर्मा, डीजे शुभा मेहता, डीजे विनोद भारवानी, डीजे मदनगोपाल व्यास, डीजे देवेन्द्र प्रकाश शर्मा और डीजे निर्मलसिंह मेड़तवाल का नाम शामिल है. पिछले कई समय से हाईकोर्ट कॉलेजियम द्वारा भेजे गये डीजे के नाम में ऐसा कम ही हुआ है कि किसी डीजे का नाम रोका गया हो. सूत्र भी बताते हैं कि इस बार भी 8 में से 6 डीजे के नाम पर तो कॉलेजियम अपनी मुहर लगा चुका है लेकिन सभी 8 डीजे के नाम अगले सप्ताह तक तय किये जा सकते हैं.

दूसरी तरफ हमारे सूत्रों के अनुसार कॉलेजियम की आम राय में जयपुर से 5 और जोधपुर से 6 अधिवक्ताओं के नाम को लेकर लगभग कवायद पूर्ण हो चुकी है. लेकिन इन अधिवक्ताओं के नाम पर कुछ ओर जानकारिया जुटाने के लिए फिलहाल कुछ ओर बैठके कि जा सकती है. तो दूसरी तरफ शेष अधिवक्ताओं में से 4 नाम तय करने में कॉलेजियम को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. कॉलेजियम की तीसरी जज जस्टिस सबीना के चण्डीगढ दौरे के चलते फिलहाल ये कवायद 1—2 दिन के लिए टल गयी है. राजस्थान हाईकोर्ट ने शनिवार को सुबह होने वाली फुल कोर्ट बैठक और एक रिव्यू कमेटी बैठक को भी स्थगित कर दिया है जिसके पिछे भी कॉलेजियम की बैठक को कारण माना जा रहा है. सूत्र ये भी बताते है कि 14 जून के बाद हाईकोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश होने वाला है और जुलाई में सुप्रीम कोर्ट में जजो को लेकर कभी कॉलेजियम हो सकता है. राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति का नाम भी सुप्रीम कोर्ट जजों के लिए चर्चा में है ऐसे में कॉलेजियम 14 जून तक नाम भेजने का पूरा प्रयास करेगा. 

ओबीसी—एससी एसटी वर्ग का फंस सकता है पेच:
राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति कि इस कवायद में एससीएसटी और ओबीसी वर्ग का पेच फंस सकता है. क्योकि लंबे समय से इन दोनों ही वर्गो का प्रतिनिधित्व लगातार कम होता गया है. वैसे तो हाईकोर्ट—सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन पिछले कुछ समय से देशभर में ये मुद्दा हावी रहा है. डीजे कोर्ट से वरिष्ठता के अनुसार जो 8 नाम संभावित हो सकते है उसमें सभी नाम सामान्य वर्ग से आते हैं. वहीं लगातार जो अधिवक्ता कोटे से नाम चर्चा में हो उसमें भी एसससी एसटी वर्ग से केाई नाम मजबूती से आगे नहीं आया है. दूसरी ओर ओबीसी वर्ग से जरूर 4—5 नाम खुद को दावेदार मान रहे हैं. ऐसे में फाइनल कॉलेजियम होने तक कई नए नाम चौंकाने वाले सामने आ सकते हैं. 

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गोपनियता से बढ़ जाती है दिलचस्पी:
कॉलेजियम की प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली गोपनियता के चलते ही अधिवक्ताओं के बीच लगातार कई नाम उछलते है तो कई बार प्रतिद्वदी अधिवक्ता भी जानबुझकर नाम बाहर निकालते है ताकि उनकी जगह क्लीयर हो सके. ऐसा ही कुछ डीजे के नाम को लेकर भी है. राजस्थान की न्यायपालिका में ऐसा कम ही देखने को मिलता है.  लेकिन इस बार कॉलेजियम के लिए जजों का चुनाव करना एक बड़ी चुनौति भी है. सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान हाईकोर्ट से या यहां से होकर जाने वाले 5 जज मौजूद है ऐसे में हाईकोर्ट कॉलेजियम पर भी जजों के लिए नाम का चुनाव करना आसान नहीं होता. यही वजह है कि कॉलेजियम की कोई एक बैठक नहीं होकर ये निरंतरता से होना वाला एक प्रोसेस है लेकिन अंतिम बैठक की तारीख को कॉलेजियम की तारीख मान लिया जाता है. इस प्रक्रिया में बरती जाने वाली गोपनियता एक बड़ा कारण है जो अधिवक्ताओं से लेकर आम लोगों में ना केवल अफवाहों के प्रति बल्कि तय किये जाने वाले नामों को जानने की भी जिज्ञासा पैदा करती है. सार्वजनिक पारदर्शिता के लिए फिलहाल इस प्रक्रिया में अभी एक लंबा इंतजार करना होगा. 

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जयपुर: बहुचर्चित खान महाघूसकाण्ड के मुख्य आरोपी और पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी को जयपुर की मनी लॉन्ड्रिग विशेष अदालत ने जमानत देने से इंकार कर दिया है. सिंघवी ने 1 जून को मनी लॉन्ड्रिग विशेष कोर्ट के जज अरूण कुमार अग्रवाल के समक्ष सरेण्डर किया था. कोर्ट ने सिंघवी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के आदेश दिये थे. सरेण्डर करने के साथ ही सिंघवी की ओर से बिमारी और कोरोना के चलते जमानत का प्रार्थना पत्र पेश किया गया. 

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कोरोना संक्रमण के चलते जमानत देने की गुहार लगायी गयी थी:
जमानत अर्जी पेश कर सिंघवी की ओर से एडवोकेट रितेश चौहान ने सिंघवी के बिमार होने और कोरोना संक्रमण के चलते जमानत देने की गुहार लगायी गयी थी. अर्जी में कहा गया कि जेलो में लगातातर कैदियों के बीच संक्रमण बढ़ता जा रहा है. ऐसे में मुजरिम की उम्र को देखते हुए जमानत दी जाये. वहीं ईडी की ओर से एएसजी आर डी रस्तोगी, एडवोकेट आनंद शर्मा और विशेष लोक अभियोजक ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि जिस बिमारी का हवाला दिया गया उस बीमारी का रिकॉर्ड पर कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया है.

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कोरोना जमानत का अधिकार नहीं हो सकता:
वहीं सुप्रीम कोर्ट के साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट भी रूलिंग दे चुकी है कि कोरोना जमानत का अधिकार नहीं हो सकता. ईडी की ओर से इस मामले में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की रूलिंग भी पेश की गयी. एएसजी रस्तोगी ने कहा कि ये संपूर्ण घोटाला सिंघवी की देखरेख और मॉनिटरिंग में किया गया है. इसलिए जमानत नहीं दी जाये. दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जज अरूण कुमार अग्रवाल प्रथम ने पूर्व आईएएस अशोक सिंघवी की जमानत अर्जी खारिज करने के आदेश दिये है. 
 

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जयपुर महानगर में दो जिला न्यायालय को मुख्यमंत्री की मंजूरी, राज्य सरकार ने जारी की अधिसूचना

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजधानी जयपुर में दो जिला एवं सत्र न्यायालयों के गठन को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री द्वारा फाइल को मंजूरी मिलने के साथ राज्य सरकार ने इस मामले में अधिसूचना भी जारी कर दी है. जयपुर में दो नगर निगम के गठन के बाद से ही जयपुर महानगर को न्यायिक कामकाज के लिए दो हिस्सों में बांटने की चर्चा थी. राजस्थान हाईकोर्ट ने मई माह में ही दो जयपुर में दो जिला एवं सत्र न्यायालय खोलने को लेकर सरकार को अनुशषा भेजी थी. सरकार द्वारा अधिसूचना जारी करने के बाद अब जयपुर में जयपुर महानगर में जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयपुर महानगर प्रथम और जयपुर महानगर द्वितीय का गठन किया गया है. नये कोर्ट के गठन के साथ ही अब प्रदेश में जिला एवं सत्र न्यायालयों की संख्या 35 से बढ़कर 36 हो गई है. 

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एक दर्जन फाइलो को भी मंजूरी:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर महानगर की इन दो फाइलों के साथ ही करीब दो दर्जन से अधिक इस मामले से जुड़ी फाइलों को भी मंजूरी दी है. विधि एवं विधिक कार्य विभाग ने शुक्रवार देर रात को इन सभी अधिसूचनाओं को जारी करते हुए दोनों अदालतों के न्यायालय क्षेत्र, इनके अधिन आने वाली अदालतों के साथ विेशेष अदालतों का भी वर्गीकरण कर दिया है. जयपुर महानगर प्रथम के क्षेत्राधिकार में पुलिस कमिश्नरेट का पूर्व और दक्षिण जिले को शामिल किया गया है. वहीं जयपुर महानगर द्वितीय में पश्चित और उत्तर जिले को शामिल किया गया है. जयपुर में अब चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट जयपुर महानगर प्रथम और जयपुर महानगर द्वितीय का पद भी हो जाएगा. 

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विशेष अदालतों के विभाजन की अधिसूचना भी जारी कर दी:
इसके साथ मानवाधिकार, एससी—एसटी, पॉक्सो केस साथ अन्य विशेष अदालतों के विभाजन की अधिसूचना भी जारी कर दी गयी है. प्रमुख विधि सचिव विनोद भारवानी और सचिव मधुसूदन शर्मा ने देर रात इन अधिसूचनाओं को जारी किया. वर्तमान में जयपुर महानगर में कुल कार्यरत न्यायालयों की संख्या 161 है नए न्यायालय के गठन के बाद कुल संख्या 162 हो जायेगी वहीं दोनों ही न्यायलय क्षेत्र में करीब 81—81 न्यायालय आयेगे. विशेष अदालतो को लेकर शनिवार को अधिसूचनाए जारी की जायेगी. 

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जयपुर: राजस्थान में लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा होता ही जा रहा है. पिछले 12 घंटे में प्रदेश में 44 नए पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. इसमें सर्वाधिक 14 कोरोना मरीज कोटा में चिन्हित किए गए हैं. इसके अलावा चूरू में 10, जयपुर में 9, कोटा में 3, बीकानेर, दौसा, धौलपुर जोधपुर, चित्तौड़गढ़, बारां, भीलवाड़ा और राज्य से बाहर का एक-एक मरीज कोरोना पॉजिटिव चिन्हित किया गया है. ऐसे में अब प्रदेश में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 10128 पहुंच गई है. वहीं पिछले 12 घंटे में प्रदेश में कोरोना की चपेट में आने से एक मरीज ने दम भी तोड़ दिया है. ऐसे में अब मृतकों की संख्या भी बढ़कर 219 पहुंच गई है. 

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पॉजिटिव से नेगेटिव हुए कुल मरीज 7384:
वहीं राहत वाली खबर यह है कि प्रदेश में अब तक 7384 मरीज पॉजिटिव से नेगेटिव हो गए हैं. इनमें 6855 मरीज अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं. वहीं अस्पताल में उपचाररत कुल एक्टिव मरीजों की संख्या 2525 है. प्रदेश में कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 2924 है.

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शुक्रवार को प्रदेश में 222 नए रोगी सामने आए:
इससे पहले शुक्रवार को प्रदेश में 222 नए रोगी सामने आए. वहीं पांच रोगियों ने दम भी तोड़ा है. इनमें अजमेर में 2, जयपुर व सवाई माधोपुर में 1-1 तथा एक बाहरी राज्य के रोगी की मौत हुई. सर्वाधिक 51 पॉजिटिव मरीज अकेले जोधपुर में चिह्नित किए गए है. बारां 4, भरतपुर 42, भीलवाड़ा 3, जयपुर 16 मरीज पॉजिटिव, झालावाड़ 24, झुंझुनूं 8, कोटा 2, नागौर में 9 मरीज पॉजिटिव, पाली 19, राजसमंद 12, सवाई माधोपुर एक, सीकर 17 मरीज पॉजिटिव, सिरोही 10, उदयपुर में 1 और राज्य से बाहर के 3 मरीज पॉजिटिव मिले है. 

डॉ भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय में वीसी की नियुक्ति मामला पहुंचा हाईकोर्ट

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जयपुर: डॉ. भीमराव आम्बेडर विधि विश्वविद्यालय में कुलपति देव स्वरूप की निुयक्ति का मामला हाईकोट्र पहुंच गया है. कुलपति की निुयक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हुए हाईकोर्ट ने राज्य के प्रमुख उच्च शिक्षा सचिव, विवि के कुलाधिपति, बार काउंसिल आफ इंडिया के सचिव, बीसीआर सचिव और कुलपति देव स्वरूप को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. 

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जस्टिस गोवर्धन बारधार और जस्टिस सीके सोनगरा की खंडपीठ ने यह आदेश प्रोफेसर केबी अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए है. याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट सुनील समदड़िया ने वीडियो कॉलिंग के जरिए पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि देव स्वरूप को 27 फरवरी 2020 को भीमराव आम्बेडर विधि विश्वविद्यालय का वीसी नियुक्त किया गया है. याचिका में विवि के अधिनियम की धारा 11(2) और धारा 11(17) के प्रावधानों को चुनौती देते हुए कहा गया कि धारा 11(2) के तहत किसी भी एकेडमिक बैकग्राउंड वाले व्यक्ति को विवि का वीसी नियुक्त करना गलत है. जबकि कुलपति देवस्वरूप का शैक्षणिक बैकग्राउंड कानून का नहीं रहा है.

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याचिका में कहा गया कि देश की सभी नेशनल लॉ युनिवर्सिटीज में वीसी लॉ प्रोफेसर या एक्सपर्ट ही बन सकता है. यहां तक की इनमें कुलपति वहां के राज्यपाल ना होकर संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश होते हैं. याचिका में कहा गया कि धारा 11(17) के तहत चांसलर राज्य सरकार के परामर्श के बाद बिना तय प्रक्रिया अपनाए विवि के पहले वीसी के तौर पर किसी भी व्यक्ति को नियुक्ति दे सकते हैं. बहस सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार सहित सभी को नोटिस जारी किये है. 

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