अरावली गुफा में विराजमान हैं तिलकेश्वर महादेव, श्रावण मास के चौथे सोमवार को हुई विशेष पूजा 

अरावली गुफा में विराजमान हैं तिलकेश्वर महादेव, श्रावण मास के चौथे सोमवार को हुई विशेष पूजा 

अरावली गुफा में विराजमान हैं तिलकेश्वर महादेव, श्रावण मास के चौथे सोमवार को हुई विशेष पूजा 

उदयपुर: प्रदेश के उदयपुर जिले के गोगुंदा पिंडवाड़ा हाईवे के करीब 15 किलोमीटर दूरी पर मेवाडो का मठ से आगे स्थित अरावली पहाड़ों की गोद में बसे तिलकेश्वर महादेव मंदिर में हर हर महादेव के जयकारों से गुंजायमान हुआ. श्रावण मास के चौथे सोमवार को जंगल मार्ग पर स्थित तिलकेश्वर महादेव मंदिर कई फीट की गहराइयों में स्थित हैं. श्रावण मास के चौथे सोमवार को तिलकेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा शिव भक्तों ने यहां आकर भगवान शिव को बिल्वपत्र, दूध, दही, और केसर के साथ जलाभिषेक कर पुण्य उपार्जन किया.

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जयकारों से पहाड़ी की गुफा गुंजायमान:
बाबा के जयकारों से पहाड़ी की गुफा गुंजायमान हो गई इन दिनों लोगों की आस्था का जीता जागता उदाहरण तिलकेश्वर की खाई में देखने को मिल रहे हैं. श्रद्धालुओं का यहां पूजा अर्चना कर अपने मनोरथ की पूर्णता की कामना करते हैं. सावन माह में शिव भक्त दर्शन करके अपने को धन्य मानते हैं खाई में उतर कर महिलाओं के साथ छोटे बालक बालिकाएं भी बाबा की पूजा अर्चना करते हैं सावन पहले सोमवार से ही बाबा के व्रत धारियों का पूजा-अर्चना का दौर चलता है. 

भक्तों का लगा तांता:
तिलकेश्वर महादेव मंदिर में इन दिनों भक्तों का तांता लगा रहता है, वहीं बाबा के दर्शन करने जाने वाले वक्त सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मुंह पर मास्क लगाकर दर्शन करने गए. वहीं मंदिर के गर्भ गृह में पहुंचने के लिए जंजीरों के सहारे उतरना पड़ता है. यहां के मनोहारी दृश्य और चारो ओर गिर रहे झरनों का भक्तगण लुफ्त उठाते हैं. सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां भक्तो द्वारा रुद्राभिषेक कराया जाता है. इस मौके पर गोगुन्दा, उदयपुर, पिंडवाड़ा, सिरोही, जालौर, ओगना और सायरा सहित कई गांवों के लोग बाबा के दर्शनों को आते हैं. आपको बता दे की भक्तों की राह का रोड़ा बना हुआ है खस्ताहाल सड़क मार्ग. 

जंजीरों के सहारे उतरना पड़ता है 500 फिट नीचे खाई में: 
तिलकेश्वर महादेव के जाने के लिए उदयपुर से गोगुंदा पिण्डवाड़ा हाईवे पर मेवाडो का मठ होते हुए तिलकेश्वर जाना पड़ता है. मेवाडों के मठ से करीब 10 किलोमीटर आगे रोड की इतनी दुर्दशा है कि वाहन चालकों को जाने में बड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है. इस बारे में ग्रामीणों द्वारा क्षेत्र के अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है. आपको बता दें कि मंदिर में जाने के लिए नदी को पार कर, दो छोटी-छोटी गुफाएं है. साथ जंजीरों के सहारे 500 फिट नीचे खाई में उतरना पड़ता है. यह भी मानना है कि जिनके मन में श्रद्धा होती है वहीं नीचे जाकर दर्शन कर सकता है.

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