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देश के सबसे चर्चित राज्यपाल धनखड़ का आज हैं जन्मदिन, शेखावटी में जाट राजनीति से सफर शुरू कर वकालात में भी रहे सिरमौर

देश के सबसे चर्चित राज्यपाल धनखड़ का आज हैं जन्मदिन, शेखावटी में जाट राजनीति से सफर शुरू कर वकालात में भी रहे सिरमौर

जयपुर: देश के बहुचर्चित राज्यपाल के नाम पर हर किसी की जुबान पर एक ही नाम आता है और वो है पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और जगदीप धनखड़ के बीच चल रही खिंचतान आज देश के राष्ट्रीय मीडिया में आए दिन छायी रहती है.राजस्थान के शेखावटी से जाट राजनति से अपने सफर की शुरूआत करने वाले जगदीप धनखड़ देश के जाने माने वकील रहे है.18 मई 1951 झुझुंनू के किठाना में जन्में धनखड़ देश के पूर्व केन्द्रीय मंत्री रहे है तो वही झुझुनू से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं.

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वकालात के पेशे की शुरूआत भी जयपुर से की:
केंद्र की मोदी सरकार ने जुलाई 2019 में देश में 6 राज्यपालों में की निुयक्ति की तो उसमें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जगदीप धनखड़ को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया. जगदीप धनखड़ ने अपने राजनैतिक कैरियर के साथ वकालात के पेशे की शुरूआत भी जयपुर से की है.अपने कार्य के प्रति उनका डेडीकेशन ही है कि जब वकालात में रहे तो काबिलियत और व्यवहार से राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सबसे यंगेस्ट अध्यक्ष बनने में कामयाब रहे. राज्यपाल जगदीप धनखड़ आज अपना जन्मदिन मना रहे है.

-राजस्थान में वकालात पेशे के सिरमौर रहे है जगदीप धनखड़
-राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद 1979 में आए वकालात के पेशे में
-1979 में ही जगदीप धनखड़ ने राजस्थान हाईकोर्ट में शुरू की वकालात
-कम समय में ही जयपुर पीठ में फौजदारी के केसो में बनायी अपनी पहचान
-1979 में जस्टिस एन एल टिबरीवाल के चैंबर से कि थी कैरियर की शुरूआत
-तीन साल बाद 1982 में खुद के चैंबर से किया वकालात का कार्य शुरू
-त्रिपुरारी शर्मा, मनीन्द्र कौशिक, आर डी रस्तोगी, प्रवीण बलवदा
-जस्टिस आर एस चौहान, जस्टिस एस पी शर्मा, नासिर अली नकवी,
-धर्मवीर ठोलिया ने की है जगदीप धनखड़ के चैंबर से कैरियर की शुरूआत
-1986 में बने थे राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष
-1990 में बने थे राजस्थान के सबसे यंगेस्ट सीनियर एडवोकेट

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जेल में बंद लालू की जमानत याचिका पर सुनवाई 11 दिसंबर तक टली

जेल में बंद लालू की जमानत याचिका पर सुनवाई  11 दिसंबर तक टली

रांची: साढ़े नौ सौ करोड़ रुपये के चारा घोटाले के मामले में जेल में बंद लालू यादव की जमानत याचिका पर अदालत ने 11 दिसंबर तक रोक लगा दी है. खबर है कि चारा घोटाले के चार अलग-अलग मामलों में से एक में राजद नेता लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर झारखंड उच्च न्यायालय ने सुनवाई 11 दिसंबर तक के लिए स्थगित कर दी है. आपको बता दे कि इस मामले में लालू को 14 वर्ष तक की कैद की सजा सुनाई गई थी और इस समय उनका रांची स्थित राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज चल रहा है. 

लालू के स्थानीय अधिवक्ता प्रभात कुमार ने पीटीआई-भाषा को बताया है कि झारखंड उच्च न्यायालय में चारा घोटाले के दुमका कोषागार से गबन से जुड़े मामले में लालू की जमानत याचिका पर अब 11 दिसंबर को आगे की सुनवाई होगी. लालू की ओर से दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई से जुड़े उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने लालू प्रसाद की न्यायिक हिरासत में 42 माह, 28 दिनों की हिरासत की अवधि पूरी होने की बात सिद्ध (कस्टडी प्रूफ) करने के लिए समय मांगा जिसके बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 11 दिसंबर तक स्थगित कर दी गई है. 

इससे पूर्व न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ के समक्ष सीबीआई ने दावा किया कि अन्य मामलों की न्यायिक हिरासत को जोड़ लेने पर भी लालू ने दुमका मामले में अभी सिर्फ 34 माह ही न्यायिक हिरासत में बिताये हैं, जबकि सिब्बल ने दावा किया कि लालू ने इस मामले में 42 माह, 28 दिन न्यायिक हिरासत में पूरे कर लिये हैं. सीबीआई ने कहा कि वैसे तो अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 427 के तहत निचली अदालत द्वारा अलग से उल्लेख न करने की स्थिति में लालू की सभी मामलों में सजाएं एक के बाद एक चलनी चाहिए और उस लिहाज से दुमका मामले में अब तक लालू ने न्यायिक हिरासत में एक दिन भी नहीं बिताया है.

सीबीआई ने दलील दी कि लालू को दुमका मामले में भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत सात वर्ष कैद एवं भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी सात वर्ष कैद की सजा सुनायी गयी है जिसे मिलाकर उनकी इस मामले में कुल सजा चौदह वर्ष की हो जाती है. अदालत ने कहा कि सीबीआई द्वारा उठाये गये इस पक्ष पर अंतिम सुनवाई के दौरान विचार किया जायेगा. इससे पूर्व इस मामले में 24 नवंबर को दाखिल अपने जवाब में सीबीआई ने दावा किया था कि वास्तव में लालू प्रसाद ने दुमका कोषागार से गबन के मामले में अब तक एक दिन की भी सजा नहीं काटी है लिहाजा उन्हें इस मामले में अभी जमानत देने का कोई भी पुख्ता आधार नहीं बनता है.

जबकि लालू के वकीलों ने दावा किया था कि लालू ने इस मामले में अपनी आधी सजा न्यायिक हिरासत में पूरी कर ली है. चारा घोटाले से जुड़े दुमका मामले में लालू को विशेष सीबीआई अदालत ने चौदह वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी. उन्हें चार मामलों में से तीन में पहले ही जमानत मिल चुकी है. फिलहाल आगे क्या होगा ये तो वक्त ही बताएगा. आपको बता दे कि हाल ही में लालू प्रसाद के खिलाफ एक मामला दर्द किया है जिसमें उनके खिलाफ बीजेपी नेताओं की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया गया है.  (सोर्स-भाषा)

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झालावाड़ में कांग्रेस नेता के बिगड़े बोल, कहा - जिसको दारू पीनी है दारू पी ले जिससे पैसे लेना हो पैसे ले ले, लेकिन वोट कांग्रेस को ही दें

झालावाड़ में कांग्रेस नेता के बिगड़े बोल, कहा - जिसको दारू पीनी है दारू पी ले जिससे पैसे लेना हो पैसे ले ले, लेकिन वोट कांग्रेस को ही दें

झालावाड़: जिले में पंचायत राज संस्थाओं के चुनाव में कांग्रेस व भाजपा में घमासान मचा हुआ है. दोनों ही पार्टियों में सीधी टक्कर है. इसी के चलते दोनों ही दलों के नेताओं ने गांव-गांव ढ़ाणी-ढ़ाणी की खाक छान मारी है. इसके साथ ही मतदाताओं को प्रलोभन देने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. 

"जिसको दारू पीना हो दारू पी ले जिसको पैसे लेना हो पैसे ले ले'': 
पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष कैलाश मीणा ने सभा को संबोधित करते हुए मतदाताओं से कहा कि वोट से आप किसी को भी बना दो चलनी तो हमारी ही है. ऐसे में आप लोगों को ज्यादा ज्ञान और ध्यान लगाने की जरूरत नहीं है. चार पांच दिन है "जिसको दारू पीना हो दारू पी ले जिसको पैसे लेना हो पैसे ले ले' लेकिन वोट तो कांग्रेस को ही दो. कांग्रेस के जिलाध्यक्ष एवं मनोहर थाना के पूर्व विधायक कैलाश मीणा के बिगड़े बोल का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. हालांकि फर्स्ट इंडिया इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है. 

विन्रम अपील की जगह दिया प्रलोभन: 
कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैलाश मीणा ने झालावाड़ जिले के अकलेरा पंचायत समिति के वार्ड नं. 8 में कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेश तंवर के सर्मधन में सभा करते हुए मतदाताओं से विन्रम अपील की जगह शराब और पैसे का प्रलोभन देते हुए वोट देने को कहा है.  

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अकलेरा पंचायत समिति में सरड़ा पंचायत को हॉट सीट माना जा रहा: 
गौरतलब है कि सरड़ा कस्बे में भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व सरपंच रोशन सिंह तंवर तो वहीं कांग्रेस की ओर से पूर्व सरपंच मनोहर सिंह तंवर के बेटे सुरेश तंवर चुनावी मैदान में है. दोनों तंवर प्रत्याशी के होने से अकलेरा पंचायत समिति में सरड़ा पंचायत को हॉट सीट माना जा रहा है. जहां आगामी 1 दिसंबर को चुनाव होने हैं. ऐसे में दोनों प्रत्याशी एड़ी चोटी का जोर लगाते दिखाई देने लगे हैं. सरड़ा कस्बे में कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कांग्रेस सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की लोगों को जानकारी देते हुए अपने समर्थक को भारी मतों से जिताने की अपील की. 

वीडियो वायरल होने पर दी सफाई:
जब जिलाध्यक्ष को वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने की जानकारी मिली तो उन्होंने इसे बीजेपी की साजिश करार दिया. उन्होंने कहा कि जहां वो प्रचार कर रहे थे वहां बीजेपी के लोग शराब पिला रहे थे. मतदाताओं को लुभाने का प्रयास किया जा रहा था. इसी को लेकर मैंने कहा था कि खाओ पीओ लेकिन वोट कांग्रेस को ही देना है. ऐसे में यह सब कांग्रेस को बदनाम करने के लिए बीजेपी की साजिश है. 

Security Issues के चलते महबूबा मुफ्ती औऱ उनकी बेटी इल्तिजा हुई नजरबंद

Security Issues के चलते महबूबा मुफ्ती औऱ उनकी बेटी इल्तिजा हुई नजरबंद

श्रीनगर: हाल ही में  पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने दावा किया है कि उन्हें और उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती को नजरबंद कर दिया गया है और पार्टी नेता वहीद पर्रा के पुलवामा स्थित आवास पर नहीं जाने दिया जा रहा है. जिसके बाद उनका गुस्सा फूट पड़ा औऱ उन्होनें विपक्ष पर जमकर निशाना साधा है. आपको बता दे कि पर्रा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इस सप्ताह गिरफ्तार कर लिया था.

पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती  ने कहा कि दो दिन से उन्हें पर्रा के परिवार से मिलने नहीं दिया जा रहा है, जिन्हें निराधार आरोपों पर गिरफ्तार किया गया था. महबूबा ने ट्वीट किया कि मुझे एक बार फिर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है. दो दिनों से, जम्मू-कश्मीर प्रशासन मुझे पुलवामा में वहीद वर्रा के परिवार से मिलने नहीं दे रहा है. मगर वे चुप नहीं बैठेगीं. 

भाजपा के मंत्रियों और उनकी कठपुतलियों को कश्मीर में हर जगह आने-जाने की अनुमति है लेकिन मेरे मामले में सुरक्षा संबंधी समस्या उत्पन्न हो जाती है. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी को भी घर में नजरबंद कर दिया गया है. उन्होंने कहा है कि अत्याचार की कोई सीमा नहीं है. वहीद को निराधार आरोपों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया और मुझे उसके परिवार को सांत्वना देने के लिए मिलने नहीं दिया जा रहा है.

यहां तक कि मेरी बेटी इल्तिजा को भी घर में नजरबंद कर दिया गया है क्याोंकि वह भी वहीद के परिवार से मिलना चाहती है. पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी’ (पीडीपी) की प्रमुख ने कहा कि वे आज दिन में विभिन्न मुद्दों पर एक संवाददाता सम्मेलन करेंगी. आपको बता दे कि मुहबूबा मोदी सरकार और उनकी नीतियों की सदा से ही खिलाफत करती आई है और हमेशा शिकायत करती रहती है. (सोर्स-भाषा)

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अब आखिर क्या होगा सचिन पायलट कैंप के मुद्दों के निपटारे का? अहमद पटेल के चले जाने के बाद अब पूरी पार्टी में अनिश्चितता

जयपुर: वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद अहमद पटेल के निधन के बाद अब पूरी कांग्रेस पार्टी में अनिश्चितता का माहौल है. अगर राजस्थान के परिप्रेक्ष्य में बात करें तो सबसे बड़ा सवाल तो यह खड़ा होता है कि अब आखिर क्या होगा पायलट कैंप के मुद्दों के निपटारे का? ऐसे में अब माना जा रहा है कि अहमद पटले के निधन के बाद 3 सदस्य कमेटी का भी अब पुनर्गठन होगा. अहमद भाई के स्थान पर किसी नए वरिष्ठ नेता का चयन होगा. फिलहाल गांधी परिवार में एक VACUUM बन गया है. 

मंत्रिमंडल फेरबदल के प्रस्ताव अहमद भाई के समय ही तैयार हो चुके थे: 
अलबत्ता मंत्रिमंडल फेरबदल के प्रस्ताव अहमद भाई के समय ही तैयार हो चुके थे और इन प्रस्तावों पर केवल सोनिया की मंजूरी का इंतजार था. इन प्रस्तावों के अनुसार 15 विधायकों को संसदीय सचिव और 10 विधायकों को निगमों और बोर्डों में चेयरमैन बनना था. इसके साथ ही नए मंत्रियों की लिस्ट में आधा दर्जन से ज्यादा नाम थे. इनमें महेश जोशी, हेमाराम चौधरी, बृजेंद्र ओला, रामलाल जाट, राजेंद्र गुढ़ा, महेंद्र चौधरी, संयम लोढ़ा और मुरारी मीणा के नाम शामिल थे. 

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मंत्री अशोक चांदना का भी प्रमोशन होना था:
इसके साथ ही पायलट कैंप के दो पुराने बर्खास्त विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा की मंत्री पद पर वापसी होनी थी. साथ ही दीपेंद्र सिंह शेखावत, दानिश अबरार, रोहित बोहरा का भी मंत्री बनना लगभग तय था. वहीं मंत्री अशोक चांदना का भी प्रमोशन होना था. चांदना को अपनी परफॉर्मेंस के लिए पुरस्कार मिलना था. दूसरी ओर 2-3 नॉन परफॉर्मर मंत्रियों की भी छुट्टी होनी थी. लेकिन अब अहमद पटेल के चले जाने के बाद सबकुछ उल्टा-पुल्टा हो गया. अब मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों पर नए सिरे से पूरी कवायद होगी और नए समीकरण बनेंगे. इन नए 'समीकरणों' से पायलट कैंप उत्साहित है. उन्हें अब ज्यादा महत्व मिलने की उम्मीद है. लेकिन अंततः राजस्थान में सब कुछ सीएम गहलोत की इच्छा से ही होगा. क्योंकि एक तरह से कांग्रेस ने राजस्थान को गहलोत को ठेके पर दे रखा है और ऐसे में सरकार और संगठन में भी आज केवल गहलोत की ही आवाज सुनाई देती है.  

मंत्री बनने के इच्छुक और खासतौर पर पायलट कैंप के लोगों में बेचैनी: 
अलबत्ता थोड़ा बहुत SAY अजय माकन का जरूर है. फिलहाल अजय माकन भी एक तरह से दिल्ली में अपने घर में ही कैद हैं. खुद एक माह तक कोरोना से पीड़ित रहने के बाद उनकी पत्नी और पुत्र भी कोरोना संक्रमित हुए हैं और इसलिए माकन का पूरा फोकस परिवार की देखभाल पर है. अब इन सारे हालातों के चलते मंत्री बनने के इच्छुक और खासतौर पर पायलट कैंप के लोगों में बेचैनी है. दूसरी ओर राजस्थान के हालात पर भाजपा आलाकमान की पूरी नजर है. क्योंकि अब महाराष्ट्र और राजस्थान की गैर भाजपा सरकारें निशाने पर है.  

 


 

MLA पॉवरफुल! निकाय चुनाव टिकट चयन में भी चली कांग्रेस के विधायकों की

MLA पॉवरफुल! निकाय चुनाव टिकट चयन में भी चली कांग्रेस के विधायकों की

जयपुर: निकाय चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति साफ है. जनप्रतिनिधियों के भरोसे पर कांग्रेस ने टिकट वितरण को अमली जामा पहना दिया है. एक बार फिर कांग्रेस में जनप्रतिनिधियों की ही टिकट वितरण में चली है. विधायकों की बल्ले-बल्ले है प्रभारी अपने हाल पर.

निकाय चुनाव में भी जनप्रतिनिधियों के कहने से ही टिकट बांटे गए: 
जयपुर, जोधपुर और कोटा के निगम चुनाव में कांग्रेस में जनप्रतिनिधियों के कहने से ही टिकट बांटे गए ठीक वैसे ही परिपाटी 21 जगह होने वाले निकाय चुनाव को लेकर भी कमोबेश अपनाई गई. प्रदेश कांग्रेस ने टिकट टिकट चैन और वितरण को लेकर प्रभारी भी बनाए लेकिन मोटे तौर पर जिम्मा जनप्रतिनिधियों पर ही छोड़ दिया गया. एमएलए के कहने से टिकट वितरण को अंतिम रूप दे दिया गया, संगठन की कुछ खास नहीं चल पाई. 

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समर्थकों को टिकट देने में विधायकों की रुचि नजर आई:
लगता यही है की प्रदेश कांग्रेस ने बिना कोई जोखिम उठाएं जनप्रतिनिधियों को उनके कहे मुताबिक टिकट चयन में ताकतवर बना दिया. जनप्रतिनिधियों ने मनमर्जी के आधार पर टिकट बांटने के काम को अंतिम रूप दे दिया. समर्थकों को टिकट देने में विधायकों की रुचि नजर आई. जनप्रतिनिधि किसी प्रकार का कोई हस्तक्षेप चाहते भी नहीं थे. ये मन की बात उन्होंने जिला प्रभारियों को बता भी दी थी.

कांग्रेस में विधायकों की पूरी चवन्नी चल रही:
बीते कुछ महीनों से यह देखा जा रहा है कि कांग्रेस में विधायकों की पूरी चवन्नी चल रही है, स्थानीय संगठन पर भी वे हावी है. यूं कह सकते है कि विधायकों की पूरी चल रही है इसका कारण यह भी हो सकता है कि जिस तरह का घटनाक्रम कांग्रेस में कुछ दिनों पहले हुआ था उसके बाद से ही विधायकों की हर मांग को गंभीरता से सुना जा रहा है और जब बात खुद के क्षेत्र में चुनाव की हो तो फिर विधायक कहां पीछे रहने वाले है. 
...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

जम्मू कश्मीर DDC चुनावों के घोषणापत्र में BJP का नया दाव, किया 70 हजार नौकरियों और शत प्रतिशत आरक्षण का वादा

 जम्मू कश्मीर DDC चुनावों के घोषणापत्र में BJP का नया दाव, किया  70 हजार नौकरियों और शत प्रतिशत आरक्षण  का वादा

जम्मू कश्मीरः भाजपा ने हाल ही में  जम्मूकश्मीर में आगामी जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनावों के लिए अपना घोषणापत्र जारी किया है. इस घोषणापत्र में बीजेपी ने स्थानीय लोगों को शत प्रतिशत आरक्षण के साथ 70 हजार नौकरियां देने का वादा किया है. इतना ही नहीं घोषणापत्र में निजी क्षेत्र में रोजगार सुनिश्चित करने, उद्योगों के अनुकूल नीतियां लाने तथा जम्मू कश्मीर में स्वच्छ, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन का वादा भी किया गया है. 

भाजपा ने घोषणापत्र में कहा है कि जम्मू कश्मीर के दुश्मनों को पहचान लिया गया है और पत्थरबाजी का समय समाप्त हो गया है. इसमें अतिक्रमण करने वालों से जमीन मुक्त कराने और हिंसा तथा आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति रखने की बात भी कही गई है. फिलहाल भारतीय जनता पार्टी का ये प्ले कार्ड कितना कारगर साबित होगा ये तो वक्त ही बताएगा.

गौरतलब है कि जबसे जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 को खत्म किया गया है, तब ही से वहां के बड़े नेताओं में आक्रोश छाया हुआ है. जिसके चलते वे लगातार बगावत करने औऱ लोगों को भड़काने जैसे काम भी करने लगे है. महबूबा मुफ्ती जैसी बड़ी हस्ती तो खुलकर केन्द्र सरकार और पीएम मोदी के खिलाफ निशाना साधने में पीछे नहीं हटते है. ऐसे में ये घोषणापत्र कितना कमाल दिखा पाता है, ये तो वक्त ही बताएगा.  (सोर्स-भाषा)

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तरुण गोगोई का पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार

तरुण गोगोई का पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया अंतिम संस्कार

गुवाहाटी: असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का बृहस्पतिवार को पूरे राजकीय सम्मान के साथ यहां नवग्रह श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया. मंत्रोच्चार, असम पुलिस द्वारा बंदूकों की सलामी और बैंड की धुनों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री के पार्थिव शरीर को उनके पुत्र गौरव गोगोई ने मुखाग्नि दी.

मुखाग्नि के समय गौरव पारंपरिक चेलेंग सदर (शॉल) और धोती पहने हुए थे और मुंह पर मास्क लगाए हुए थे. गौरव के मुखाग्नि देने के पहले गोगोई की पत्नी डॉली, बेटी चंद्रिमा, पुत्रवधू एलिजाबेथ और परिवार के अन्य सदस्यों ने चिता पर चंदन की लकड़ियां रखी.

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असम के तीन बार मुख्यमंत्री, दो बार केंद्रीय मंत्री और छह बार लोकसभा सदस्य रहे तरुण गोगोई का 84 साल की उम्र में सोमवार को निधन हो गया. वह कोविड-19 के बाद स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे थे. (भाषा) 

मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने किया MLA सरनाइक के करीबी को गिरफ्तार

 मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने किया MLA सरनाइक के करीबी को गिरफ्तार

नई दिल्ली/मुंबई: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में हाल ही में विधायक प्रताप सरनाइक के एक करीबी को गिरफ्तार किया है. खबर है कि ईडी ने सुरक्षा सेवा प्रदाता कंपनी और अन्य के खिलाफ धनशोधन के मामले में शिवसेना विधायक प्रताप सरनाइक के सहयोगी अमित चंदोले को गिरफ्तार किया है. इस बात की जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी है. उन्होंने कहा कि चंदोले को धन शोधन निरोधक अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बुधवार देर रात गिरफ्तार किया गया था और उसे शुक्रवार को एक स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किये जाने की उम्मीद है.

बताया जा रहा है कि ईडी ने बुधवार को उससे पूछताछ की थी. सूत्रों ने कहा कि जांच एजेंसी चंदोले की भूमिका और सरनाइक, सुरक्षा सेवा प्रदाता टॉप्स ग्रुप और उसके प्रवर्तक राहुल नंदा के साथ उसके कथित संदिग्ध लेन देन की जांच कर रही है. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक नंदा ने किसी भी तरह के गलत काम से इनकार किया है. आपको बता दे कि ईडी ने 24 नवंबर को निकटवर्ती ठाणे और मुंबई में विधायक प्रताप सरनाइक, नंदा और कुछ अन्य के 10 परिसरों पर छापेमारी की थी. 

उन्होंने कहा कि 2014-15 के दौरान कंपनी द्वारा महाराष्ट्र सरकार के एक संगठन को सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराए जाने का एक खास मामला भी जांच के घेरे में है. सूत्रों ने दावा किया कि एजेंसी ने सरनाइक के नाम एक विदेशी बैंक द्वारा जारी डेबिट कार्ड भी छापेमारी के दौरान जब्त किया है और इसका पता पाकिस्तान के एक व्यक्ति के नाम पर है जो विदेश में बसा है. उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में विधायक से जल्द ही पूछताछ की जाएगी.

शिवसेना ने पूर्व में छापेमारी के इस मामले को राजनीतिक बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया था और कहा था कि महाराष्ट्र सरकार और उसके नेता किसी के दबाव के सामने नहीं झुकेंगे. इतना ही नहीं प्रताप सरनाइक ने बयान दिया है कि वे चुप नहीं बैठेगें. मुंबई औऱ महाराष्ट्र के लिए वे फांसी पर चढ़ने को भी तैयार है. फिलहाल ये मामला और कितने मोड़ लेगा कुछ कहा नहीं जा सकता है. (सोर्स-भाषा)

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