Guru Purnima 2020: गुरु पूर्णिमा का पर्व आज, जानिए क्यों मनाया जाता है ये पर्व और पूजा की विधि 

Guru Purnima 2020: गुरु पूर्णिमा का पर्व आज, जानिए क्यों मनाया जाता है ये पर्व और पूजा की विधि 

जयपुर: देशभर में आज गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है. शिष्य अपने गुरुओं की पूजा अर्चना करके श्रद्धा प्रकट कर रहे है. लेकिन कोरोना संकट की वजह से देशभर में गुरु पूर्णिमा पर कोई बडा आयोजन नहीं होगा. गुरुओं के आश्रम में भी बडे आयोजन पर रोक है. आपको बता दें कि गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस दिन गुरु पूजा का विधान है. गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के शुरू में आती है. 

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इस दिन हुआ था महर्षि वेदव्यास का जन्म:
इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं. ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं. न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी. इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं. जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है. इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है. इस दिन शिष्य द्वारा गुरु की उपासना का विशेष महत्व भी है.

ऐसे करें गुरु की पूजा...

-सबसे पहले आप गुरु को उच्च आसन पर बैठाये.

-इसके बाद आप गुरु के चरण साफ जल से धुलाएं और फिर चरण को साफ करें. 

-फिर आप गुरुजी के चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित कीजिए. 

- इसके बाद गुरुजी को श्वेत या पीले वस्त्र देने चाहिए. 

- यथाशक्ति फल, मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित कीजिए. 

- आप गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना कीजिए.

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