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आज है दूसरा नवरात्र, जानिए माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान और आज का राहुकाल और पंचांग

आज है दूसरा नवरात्र, जानिए माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान और आज का राहुकाल और पंचांग

जयपुर  :शारदीय नवरात्र का आज दूसरा दिन है रविवार (29 अक्टूबर) से शुरू हुए नवरात्र आठ अक्तूबर तक चलेंगे इस बार नौ दिन में नौ अद्भुत और मंगलकारी संयोग मिल रहे हैं दो दिन अमृत सिद्धि, दो दिन सर्वार्थ सिद्धि, दो दिन रवि योग मिलेंगे दो सोमवार भी होंगे जो शिवा शक्ति के प्रतीक हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं क्या है आज का पंचांग और राहूकाल का समय

पंचांग
चंद्र दर्शन यहूदी नववर्ष दिवस सूर्य दक्षिणायन सूर्य दक्षिण गोल
शरद ऋतु
 प्रात: 7.30 बजे से मध्याह्न 9 बजे तक राहुकालम

आज यानि नवरात्री के दूसरे दिन पूजा कि हटी है माँ ब्रह्मचारिणी की. माता ब्रह्मचारिणी पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं. देवर्षि नारद जी के कहने पर उन्होंने भगवान शंकर की पत्नी बनने के लिए तपस्या की. इन्हें ब्रह्मा जी ने मन चाहा वरदान भी दिया. इसी तपस्या की वजह से इनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा. इसके अलावा मान्यता है कि माता के इस रूप की पूजा करने से मन स्थिर रहता है और इच्छाएं पूरी होती हैं.

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करके कैसे सभी समस्याओं का समाधान चुटकियों में हो सकता है. मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी है इनकी पूजा से भक्त को उत्तम फल मिलता है. मां ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप त्याग वैराग्य सदाचार और संयम की भावना जागृत होती है

ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि
- सबसे पहले सुबह नहा-धोकर साफ-सुथरे कपड़े पहन लें. 

- अब ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए उनका चित्र या मूर्ति पूजा के स्थान पर स्थापित करें.

- माता के चित्र या मूर्ति पर फूल चढ़ाकर दीपक जलाएं और नैवेद्य अर्पण करें. 

- मां ब्रह्मचारिणी को चीनी और मिश्री पसंद है. इसलिए उन्‍हें चीनी, मिश्री और पंचामृत का भोग चढ़ाएं. माता को दूध से बने व्‍यंजन भी अतिप्रिय हैं.

- इसके बाद मां दुर्गा की कहानी पढ़ें और नीचे लिखे इस मंत्र का 108 बार जप करें.

देवी ब्रह्मचारिणी का मंत्र 
दधानां करपद्याभ्यामक्षमालाकमण्डल।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्माचारिण्यनुत्तमा।

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अधिकारी ने कहा कि अमरनाथ यात्रा को लेकर अंतिम निर्णय अगले सप्ताह लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि वैष्णोदेवी मंदिर के मामले में मंदिर तक तीर्थयात्रियों के जाने पर 31 जुलाई तक रोक लगा दी गई है. 

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जैसलमेर: आज से भगवान भोलेनाथ की भक्ति का पर्व सावन मास आज से शुरू हो गया है, लेकिन इस वर्ष कोरोना संकट के बीच भक्त अपने भगवान के दर्शन करने में काफी परेशान हो रहे हैं. इस बार कोरोना संक्रमण की वजह से प्रमुख मंदिर बंद है. कुछ मंदिरों में पुजारी और सीमित संख्या में भक्त भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं. शहर के मोहल्लों में कुछ मंदिर खुले है जिसमे थोड़ी थोड़ी मात्रा  लोग पहुंच रहे हैं. बारी-बारी से श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं.

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ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चार से शिवालय गूंज रहे: 
जैसलमेर शिव मार्ग स्थित देवचंद्रेश्वर मंदिर में हर सावन भव्य मेला भरता है लेकिन मंदिर इस बार सूना दिखाई दे रहा है. आस-पास के लोग भगवान शिव के दर्शन करने पहुंच रहे हैं. बील पत्र से पूजन करने व शिवलिंग को दुग्ध से नहलाने के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं. साथ ही बोल बम ऊं नम: शिवाय के मंत्रोच्चार से शिवालय गूंज रहे हैं. जैसलमेर सहित आसपास के सभी शिवालयों में शिव पूजन चल रहा है. लेकिन कई आमजन जागरूक होकर दर्शन कर रहे हैं. मंदिरो में थोड़ी भीड़ है वहीं कई मंदिर के बंद होने से भक्त मायूस होकर लोट रहे हैं. 

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जयपुर: आज से भगवान शिव का प्रिय सावन मास शुरू हो गया है. हिंदू धर्म में सावन के महीने का खास महत्व माना जाता है. इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा होती है. इस दौरान भगवान शिव की पूजा करके मनचाहा फल प्राप्त किया जा सकता है. इस मास भगवान शिव और पार्वती जी का मांगलिक मिलन हुआ. भोले नाथ का विवाह भी लोकमंगलकारी है. इसलिये सामाजिक सरोकार से भी विवाह को यही दर्ज़ा मिला है. परिवार चलता रहे. वंश परंपरा आगे बढ़ती रहे. भगवान का विवाह भी संकटकाल में हुआ. 

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सावन माह के पहले और आखिरी दिन सोमवार: 
इस बार सावन माह के पहले और आखिरी दिन सोमवार है. इसके साथ ही पांच सोमवार के साथ जबरदस्त संयोग भी बना है. लेकिन कोरोना काल के चलते इस बार शिवभक्त मंदिरों में जाकर भोले बाबा की पूजा नहीं कर पाएंगे. ऐसे में हम आपको घर पर रहकर ही शिव आराधना करने के बारे में बता रहे हैं....

- इस महीने सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने. 

- पूजा स्थल पर अच्छी तरह से साफ-सफाई करके गंगाजल का छिड़काव करें.

- शिव पुराण पढ़े. संधिकाल अवश्य पढ़ें.

- शिव गायत्री की एक माला करें अन्यथा 3, 5, 7, 11, 13, 21 या 33 बार पढ़ें.

- संभव हो तो तीन बार रुद्राष्टक पढ़ ले. अथवा ॐ नमः शिवाय के मन्त्र से अंगन्यास करें. 

- भगवान शिव को 11 लोटे जल अर्पण करें. प्रयास करें कि यह पूरे सावन मास हो जाये. काले तिल,और दूध के साथ.

- यदि विल्व पत्र नहीं मिले तो एक जनेऊ अथवा तीन या पांच कमलगट्टे अर्पित कर दें.

- आसपास के शिवमंदिर में जल व दूध का अभिषेक कर चंदन का तिलक करें.

- शिव कथा व शिव चालीसा का पाठ कर, महादेव की आरती करें. 

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भरतपुर: कोरोना के खौफ ने परंपरागत पर्व गुरु पूर्णिमा का रंग पूरी तरह से फीका कर दिया है और हालात यह हो गए है कि आज जहां विभिन्न मंदिरों में धार्मिक आयोजन होने थे वहां सन्नाटा पसरा हुआ नजर आ रहा है. भरतपुर के पड़ोसी उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन में आयोजित होने वाला मुड़िया पूनो मेला भी रद्द कर दिया गया है और आज तक के इतिहास मैं ऐसा पहली बार हो रहा है कि गुरु पूर्णिमा पर लगाई जाने वाली 7 कोस परिक्रमा मार्ग आज वीरान नजर आ रहा है.

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पूंछरी के लौठा गांव में छाई वीरानी:
गुरु पूर्णिमा के मौके पर गोवर्धन की परिक्रमा देने के लिए देश के दूरदराज इलाकों से करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते थे, लेकिन कोरोना के खौफ के चलते परिक्रमा को स्थगित करना पड़ा है. गोवर्धन महाराज की परिक्रमा का लगभग डेढ़ किलोमीटर का हिस्सा राजस्थान में भी आता है और डीग तहसील के पूंछरी का लौठा गांव में भी आज वीरानी छाई हुई है.

विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम हुए रद्द:
श्रद्धालु गोवर्धन परिक्रमा देने तक नहीं पहुंचे इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और जगह-जगह पुलिस बैरिकेड लगाकर श्रद्धालुओं को वापस भेज रही है. गुरु पूर्णिमा के मौके पर पूरा ब्रज मंडल गिर्राज महाराज की जयकरों से गुंजायमान रहता था लेकिन कोरोना ने अन्य त्योहारों की तरह गुरु पूर्णिमा पर्व का भी मजा किरकिरा कर दिया है. भरतपुर शहर में गुरु पूर्णिमा के मौके पर नगर परिक्रमा का हर साल आयोजन होता था लेकिन आज नगर परिक्रमा भी रद्द कर दी गई है. भरतपुर शहर की सर्कुलर रोड पर जहां हजारों लोगों की भीड़ और सैकड़ों की संख्या में भंडारे आयोजित होते थे वह भी कही नजर नहीं आ रहे हैं.

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जयपुर: देशभर में आज गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जा रहा है. शिष्य अपने गुरुओं की पूजा अर्चना करके श्रद्धा प्रकट कर रहे है. लेकिन कोरोना संकट की वजह से देशभर में गुरु पूर्णिमा पर कोई बडा आयोजन नहीं होगा. गुरुओं के आश्रम में भी बडे आयोजन पर रोक है. आपको बता दें कि गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है. इस दिन गुरु पूजा का विधान है. गुरु पूर्णिमा वर्षा ऋतु के शुरू में आती है. 

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इस दिन हुआ था महर्षि वेदव्यास का जन्म:
इस दिन से चार महीने तक परिव्राजक साधु-सन्त एक ही स्थान पर रहकर ज्ञान की गंगा बहाते हैं. ये चार महीने मौसम की दृष्टि से भी सर्वश्रेष्ठ होते हैं. न अधिक गर्मी और न अधिक सर्दी. इसलिए अध्ययन के लिए उपयुक्त माने गए हैं. जैसे सूर्य के ताप से तप्त भूमि को वर्षा से शीतलता एवं फसल पैदा करने की शक्ति मिलती है, वैसे ही गुरु-चरणों में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शान्ति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है. इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म भी हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं. इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी होता है. इस दिन शिष्य द्वारा गुरु की उपासना का विशेष महत्व भी है.

ऐसे करें गुरु की पूजा...

-सबसे पहले आप गुरु को उच्च आसन पर बैठाये.

-इसके बाद आप गुरु के चरण साफ जल से धुलाएं और फिर चरण को साफ करें. 

-फिर आप गुरुजी के चरणों में पीले या सफेद पुष्प अर्पित कीजिए. 

- इसके बाद गुरुजी को श्वेत या पीले वस्त्र देने चाहिए. 

- यथाशक्ति फल, मिष्ठान्न दक्षिणा अर्पित कीजिए. 

- आप गुरु से अपना दायित्व स्वीकार करने की प्रार्थना कीजिए.

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मानसून की सटीक भविष्यवाणी के लिए आज जंतर-मंतर पर होगा वायु परीक्षण

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जयपुर: मानसून की सटीक भविष्यवाणी के लिए आज जंतर मंतर वेधशाला पर वायु परीक्षण किया जाएगा. आषाढ़ी पूर्णिमा के अवसर पर जंतर मंतर के सम्राट यंत्र पर आज ज्योतिष से और दैवज्ञ जुटेंगे. सूर्यास्त काल में ध्वज पूजन के साथ वायु परीक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी. कोरोना महामारी के चलते इस बार महज पांच ज्योतिष वह दैवज्ञ ही वायु परीक्षण की विधिवत प्रक्रिया संपन्न कराएंगे.

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वायु के दाब और दिशा के अनुसार मानसून की भविष्यवाणी:  
दरअसल, वायु धारिणी आषाढ़ी पूर्णिमा पर हर वर्ष जंतर मंतर पर वायु परीक्षण किया जाता है. जिसमें सम्राट यंत्र पर ध्वज पूजन के बाद वायु के दाब और दिशा के अनुसार मानसून की भविष्यवाणी की जाती है. इस वर्ष मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार मानसून अच्छा रहेगा. यदि आज ज्योतिष वायु परीक्षण के बाद मानसून को लेकर सकारात्मक भविष्यवाणी करते हैं तो मौसम विभाग की भविष्यवाणी पर भी मुहर लग जाएगी.

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