VIDEO: आज संसद में राजस्थान खाली हाथ, ना लोकसभा में कोई नुमाइंदा ना ही प्रदेश में

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/01 10:27

जयपुर: संसद में राजस्थान अब खाली हाथ हो गया है. ना ऊपरी सदन राज्यसभा में राजस्थान का प्रतिनिधित्व है और ना ही निचले सदन लोकसभा में. 72 सालों के संसदीय इतिहास में यह पहला मौका है, जब लगातार दो लोकसभा चुनावों में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का कोई नुमाइंदा राजस्थान की आवाज उठाने के लिये लोकसभा और राज्यसभा में मौजूद नहीं रह पायेगा. इससे पहले भी कांग्रेस 1977 में बुरे दौर से गुजरी थी, लेकिन उस कालखंड में भी नाथूराम मिर्धा ने सांसद बनकर लाज बचाई थी. इसके बाद 1989 में कांग्रेस के खाते में एक भी सीट नहीं आई. 1984 में 25 की 25 सीटें जीतने वाली कांग्रेस आज खाली हाथ है. खास रिपोर्ट:

साल 2014 का चुनाव जब गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को बीजेपी ने पीएम प्रोजेक्ट कर दिया था. कांग्रेस को बुरे हालात की उम्मीद नहींं थी इसके बावजूद 25 सीटें गंवा दी. मोदी लहर ने कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया था. अब फिर इतिहास दोहराया गया. मौजूदा लोकसभा चुनावों में भी 25सीटों पर कमल खिल गया. देश के संसदीय इतिहास में खासतौर पर राजस्थान में ऐसा पहली बार हुआ है, जब लगातार दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का एक भी सांसद चुनाव नहीं जीत पाया. यहां तक कि राज्यसभा में कांग्रेस का एक भी सांसद राजस्थान से नहीं है. 1885 में स्थापित कांग्रेस पार्टी को बने हुये 134 साल हो चुके है. यह दुनिया के सबसे पुराने सियासी दलों में शुमार है. इसके बावजूद यह पहला अवसर है, जब संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस का एक भी नुमाइंदे की मौजूदगी राजस्थान से नहीं है. आज राजस्थान का संसद में शून्य प्रतिनिधित्व है. 

राजस्थान से जुड़ा लोकसभा का चुनावी इतिहास: 

1952
—कुल सीट 20
—कांग्रेस पार्टी के 9सांसद जीते
—राम राज्य पार्टी के 3सांसद जीते
—भारतीय जनसंघ का 1 सांसद जीता
—के एल पी का 1सांसद जीता
—6 निर्दलीय सांसदों ने जीत दर्ज की

1957
—कुल सीट -22
—कांग्रेस पार्टी के 19सांसद जीते
—मत मिले 24,94,094
—मत प्रतिशत रहा 53.65
—विपक्षी दल जनसंघ का कोई भी सांसद नहीं जीता
—निर्दलीय 3सांसद जीते

1962
—कुल सीट 22
—कांग्रेस के 14सांसद जीते
—स्वतंत्र पार्टी के 3 सांसद जीते
—जनसंघ का 1 सांसद जीता
—राम राज्य पार्टी का 1 सांसद जीता
—स्वतंत्र पार्टी-3
—जनसंघ का 1सांसद जीता

1967
—कुल सीट 23
—कांग्रेस के कुल सांसद जीते 10
—स्वतंत्र पार्टी-8,जनसंघ-3
—2निर्दलीय सांसद बने
—जनसंघ कुल सांसद जीते 3

1971
—कुल सीट 23
—कुल सांसद जीते 14 जीते
—स्वतंत्र पार्टी के 8सांसद 
—निर्दलीय सांसद जीते-2
—जनसंघ से जीते 4सांसद

1977
—कुल सीट 25
—कांग्रेस के एक मात्र सांसद ने जीत दर्ज की
—यह एकमात्र सांसद थे नागौर से नाथूराम मिर्धा
—इमरजेंसी के कारण कांग्रेस को करारी हार मिली थी
—जनता पार्टी  के 24सांसदो ने जीत की पहली बार विपक्ष ने रिकार्ड बनाया
—पहली बार जनसंघ की अगुवाई में 10 से अधिक सांसद जीते

1980
—1980 में भाजपा अस्तित्व में आई 
—इस चुनाव में कांग्रेस के 18 सांसद जीते
—जनता पार्टी  के 4 सांसदों ने जीत दर्ज की
—जनता पार्टी (एस) के 2 सांसद जीते
—कांग्रेस (यू) का एक सांसद जीता

1984
—कांग्रेस के पहली बार 25 सांसद जीते
—इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए थे चुनाव
—प्रचंड कांग्रेस लहर ने विपक्षी दलों को धो दिया
—भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली
—पहली बार भाजपा-जनता पार्टी रहे खाली हाथ

1989
—यह चुनाव कांग्रेस के लिये निराशाजनक रहे
—कांग्रेस का एक भी सांसद चुनाव नहीं जीत सका
—ऐसा आजाद भारत के इतिहास में पहली बार हुआ जब राजस्थान रहा कांग्रेस के लिये खाली हाथ
—भाजपा के 13सांसद चुनाव जीते
—जनता दल के 11 सांसदो ने जीत दर्ज की
—कम्युनिस्ट पार्टी का 1 सांसद जीता

1991
—कांग्रेस के 13सांसद चुनाव जीते
—मत मिले 50,27,446 मत प्रतिशत-40.88
—भाजपा के 12सांसद चुनाव जीते

1996
—कांग्रेस के 12सांसद चुनाव जीते
—कांग्रेस को मत मिले 52,53,531 मत प्रतिशत-40.51
—भाजपा के 12सांसद जीते
—एक सांसद जीता कांग्रेस तिवारी से

1998
—कांग्रेस के 18सांसदो ने जीत दर्ज की
—कुल मत कांग्रेस को मिले 78,46,072 मत प्रतिशत-44.45
—भाजपा के 5सांसदो ने जीत दर्ज की
—AIIC(S) से एक सांसद ने जीत दर्ज की

1999
—कांग्रेस के 9सांसद चुनाव जीते
—कांग्रेस को मत मिले 74,75,888 मत प्रतिशत-45.12
—भाजपा के 16सांसदो ने जीत दर्ज की

2004
—कांग्रेस के 4सांसद चुनाव जीते
—71,79,939 कुल मत कांग्रेस को मिले
—कांग्रेस का  मत प्रतिशत रहा -41.43
—भाजपा के 21सांसद चुनाव जीते

2009
—कांग्रेस के 20 सांसद चुनाव जीते
—भाजपा के 4 सांसदो ने जीत दर्ज की
—डॉ किरोड़ी लाल मीना बतौर निर्दलीय चुनाव जीते सांसद का

2014
—कांग्रेस का निराशाजनक प्रदर्शन लहर
—मोदी लहर के कारण कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली
—भाजपा के 25 में से 25 सांसद चुनाव जीते

2019
—फिर चली मोदी लहर
—कांग्रेस हाथ नहीं आई 25 में से एक भी सीट
—कांग्रेस को निराशाजनक प्रदर्शन के दौर से गुजरना पडा

कांग्रेस पार्टी को 2014 औऱ 2019 में करारी पराजय के दौर को देखना पड़ा. आपातकाल औऱ राममंदिर मूवमेंट ही ऐसे रहे जब कांग्रेस ने निराशाजनक दौर देखे थे. आजादी के बाद अधिकांश चुनावों में अवाम के बीच हाथ का निशान ही पर्याय बनकर नजर आता रहा है. नरेन्द्र मोदी ही ऐसे नेता के तौर पर उभर कर सामने आये है. जिनके सामने दुनिया की सबसे पुरानी पार्टी बौनी नजर आ रही है. एक व्यक्ति ने पूरी पार्टी को चुनावों में शिकस्त देकर इतिहास रच दिया. इससे उबरने में आत्मचिंतन और मंथन के दौर से गुजरना होगा. 

... संवाददाता नरेश शर्मा के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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