VIDEO: पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने अपने ही विभाग की खोली 'जन्मपत्री', मुख्यमंत्री से विभाग में बदलाव की मांगी अनुमति

जयपुर: यूं तो पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह की अपने विभाग के अधिकारियों से अदावत कई बार कई मंचों पर खुलकर सामने आई है लेकिन गुरुवार रात को विश्वेंद्र सिंह विभाग के जन्मपत्री ही खोल कर रख दी. विश्वेंद्र सिंह ट्विटर पर मुख्यमंत्री से विभाग में बदलाव के लिए कठोर फैसले लेने तक की अनुमति ही मांग ली. 

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विश्वेंद्र सिंह न तो अपने विभाग से खुश हैं और ना ही विभाग के अधिकारियों से: 
गहलोत कैबिनेट के वरिष्ठ दम मंत्रियों में से एक विश्वेंद्र सिंह न तो अपने विभाग से खुश हैं और ना ही विभाग के अधिकारियों से. कभी अपने पुत्र अनिरुद्ध को विभाग की मीटिंग में ले जाकर विवाद में आए तो कभी पर्यटन निगम के टेंडर्स को निरस्त करने के लिए मोर्चा खोलने को लेकर लाइमलाइट में रहे. बहरहाल ताजा मामले आगे बढ़ने से पहले गुरुवार देर रात विश्वेंद्र सिंह ने एक के बाद एक 9 ट्वीट किए इन ट्वीट्स को आपके साथ साझा करना जरूरी है. 

एक के बाद एक 9 ट्वीट किए: 
'मैंने बहुत लंबे समय तक, अपने स्वभाव और कार्य नैतिकता के खिलाफ जा कर  बहुत सारी चीजों पर चुप्पी बनाए रखी थी लेकिन मेरे सीएम @ashokgehlot ने हमेशा पारदर्शिता और ईमानदारी की वकालत की है और मैं अब पर्यटन विभाग की कमियों को साझा करने के लिए मजबूर हूं.'

'विभाग के अधिकारी मेरे निरंतर प्रयासों और पहलों के बावजूद उच्च पर्यटन वृद्धि प्राप्त करने और नए उत्पादों को पेश करने के प्रति उदासीन हैं पिछले डेढ़ वर्षों में, विभाग एक नई नीति पेश करने में असमर्थ रहा है'.

'यहाँ नए गाइड्स की कोई भर्ती नहीं हुई है और विभाग को पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार से एक भी स्वदेश दर्शन परियोजना नहीं मिल पाई है'. 'एक भी राज्य पर्यटन परियोजना का उद्घाटन नहीं किया गया है और न ही पर्यटन अधिकारियों की कोई नई भर्ती हुई है दो एमडी बदले जाने के बावजूद, आरटीडीसी की पुनरुद्धार योजना का कोई ठिकाना नहीं'.

'विभाग की वित्तीय स्थिति बेहद चिंतनीय है पर्यटन विभाग के अधिकारियों और पर्यटन उद्योग के हितधारकों के लिए कोई प्रशिक्षण या पुनर्विन्यास नहीं किया गया है'. 'अधिकारी इस बात को लेकर अंधेरे में हैं कि #Covid19 के बाद पर्यटन पुनरुद्धार की दिशा में क्या होना चाहिए और इस संबंध में मेरे प्रयासों के बावजूद, निजी क्षेत्र से हितधारकों की भागीदारी को शामिल करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है'.

'पर्यटकों के आगमन के आंकड़े पहले ही गंभीर रूप से गिर चुके हैं और राजस्थान में पर्यटन उद्योग की दुर्दशा लगातार बढ़ रही है फिर भी अधिकारी आंखें मूंदे हैं' यह स्थिति है (पर्यटन विभाग) जो की प्रदेश के सबसे अधिक प्रासंगिक विभागों में से एक है अतएव कुछ  बदलाव लाने  की जरूरत है'.

'अशोक गहलोत जी, मैं राजस्थान में पर्यटन और उससे सम्बंधित उद्योगों में लगे लाखों लोगों के हितों और आजीविका को बचाने के लिए निकट भविष्य में कुछ कठोर लेकिन आवश्यक फैसलों में आपके समर्थन के लिए तत्पर हूं'.

विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा बैठकों में नहीं हो रही शामिल:
पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह इन ट्वीट्स के जरिए जो संदेश सरकार तक पहुंचाना चाह रहे हैं या पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं वह स्पष्ट है. पिछले काफी समय से विभाग की प्रमुख सचिव श्रेया गुहा पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह की बैठकों मैं शामिल नहीं हो रही हैं. कमोबेश यही स्थिति अन्य अधिकारियों की भी है. दरअसल विभाग की बैठक में मंत्री पुत्र के दखल के चलते श्रेया गुहा ने अपने आप को बैठकों से दूर कर लिया था. पिछले दिनों पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के निवास पर हुई बैठक में अभी उनके पुत्र अनिरुद्ध और विभाग के निदेशक डॉ भंवरलाल व अन्य अधिकारियों के बीच तू तू मैं मैं की खबरें भी छन कर बाहर आई.

मंत्री और उनके पुत्र को लेकर मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा:
इसके बाद अधिकारियों ने मुख्य सचिव डीबी गुप्ता से मुलाकात कर मंत्री और उनके पुत्र को लेकर शिकायत की और मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा. इससे पहले भी मंत्री विश्वेंद्र सिंह पर्यटन निगम के लाइट एंड साउंड शो से संबंधित टेंडर निरस्त करवा चुके हैं. हालांकि यह बात अलग है कि मंत्री खुद कई बार सार्वजनिक मंच पर कह चुके हैं कि पर्यटन निगम उनके क्षेत्राधिकार में नहीं. बावजूद इसके वह क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर पर्यटन निगम की फाइलें मंगाने से लेकर टेंडर निरस्त करने तक की कार्रवाई करवा चुके हैं. 

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विभाग के अधिकारियों से तालमेल नहीं बैठा पा रहे:
अब एक बार फिर मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने अपने ही विभाग के खिलाफ मोर्चा खोला है दरअसल उनके ट्वीट्स से जो मनसा झलक रही है. वह स्पष्ट है कि वह विभाग के अधिकारियों से तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं और बदलाव चाहते हैं. ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री से मांग की है कि वह विभाग के प्रमुख सचिव से लेकर निदेशक तक के अहम पदों पर अपनी पसंद के अफसर चाहते हैं. मंत्री विश्वेन्द्र सिंह की मोर्चाबंदी को लेकर उन्हें सरकार में किस स्तर पर समर्थन मिलता है यह कहना तो संभव नहीं लेकिन यह जरूर है कि विभाग में किसी भी स्तर पर अब बदलाव जरूरी है ताकि मंत्री अफसरों के बीच की रस्साकशी रुके और कोविड-19 के दौर में दरक चुके पर्यटन ढांचे को एक बार फिर से खड़ा किया जा सके.
 

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