VIDEO: 'घाटे के दलदल' में पर्यटन निगम, बाजार की देनदारी बढ़कर हुई 110 करोड़ 

Nirmal Tiwari Published Date 2019/04/02 05:05

जयपुर। पर्यटन सत्र का अंतिम महीना शुरू हो गया है और पर्यटन निगम हाशिये पर नजर आने लगा है। पर्यटन निगम की होटलों की दीवारें दरकने लगी हैं, बुकिंग धड़ाम से नीचे गिरी है और देनदारी इतनी बढ़ गई है कि पर्यटन निगम को बेचकर भी बाजार का कर्ज नहीं चुकाया जा सकता है। सरकारी उदासीनता से बेहाल पर्यटन निगम की माली हालत पर 'फर्स्ट इंडिया न्यूज़' की खास रिपोर्ट: 

चार दशकों से ज्यादा समय से देश विदेश के सैलानियों को बजट होटल और राजस्थानी खान-पान परोस मेहमान-नवाजी का अलग ही अहसास देता रहा है पर्यटन निगम। दशकभर पहले तक फायदे में चल रहे पर्यटन निगम की होटलों की बीते दस वर्षों में मरम्मत के अभाव में हालत खस्ता हो गई। नतीजे में पर्यटन निगम अर्थव्यवस्था की पटरी से बेपटरी हो गया और बाजार की देनदारियां बढ़ती चली गई। पिछले दो दशकों में पर्यटन निगम की 73 में से 40 ईकाई या तो बंद हो गई या फिर घाटे के दलदल में डूब गई। इस दौरान सरकार ने कुछ इकाइयों को बेचने और कुछ को पीपीपी पर देकर बकायादरों की राशि चुकता करने के प्रयास किए, लेकिन न तो इकाई बिकी और न ही पीपीपी पर दी जा सकी। ऐसे में पर्यटन निगम पर बाजार की देनदारी बढ़कर 110 करोड़ से ज्यादा की हो गई। 

बढ़ती देनदारी के बोझ तले इकाइयों में कर्मचारियों का तीन-तीन महीने तक वेतन नहीं मिल रहा। चालू इकाइयों में मरम्मत व रखरखाव कार्य नहीं करवाए जा रहे। देनदारी का ब्याज भी काफी बढ़ गया है। पिछले दिनों सरकार ने पेंशनर्स के लिए जरूर एसआरएफ फंड से 16 करोड़ 65 लाख रुपए जारी किए हैं। कर्मचारियों का पिछले 11 महीने से ईपीएफ जमा नहीं हुआ है। अब पर्यटन निगम प्रबंधन को कर्मचारियों के ईपीएफ के पेटे साढ़े पांच करोड़ रुपए की जरूरत है। 

सूत्रों की मानें तो अब पर्यटन निगम सरकार को एक प्रस्ताव देने जा रहा है, जिसमें रनिंग यूनिट्स के रखरखाव के पेटे 10 करोड़ और देनदारियों के पेटे 30 करोड़ रुपए अनुदान मांगा जाएगा। लोकसभा चुनाव के बाद पर्यटन निगम की 15 इकाइयों को बेचा जाएगा। अब देखना यह है कि पर्यटन निगम की बेशकीमती इकाइयों को बचाने और बाजार की देनदारियों को लेकर सरकार किस फार्मूले पर काम करती है।

... संवाददाता निर्मल तिवारी की रिपोर्ट 

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