सड़क दुर्घटनाओं के प्रति लापरवाह परिवहन और पुलिस विभाग, पिछले साल की तुलना में हुई अधिक मौतें

सड़क दुर्घटनाओं के प्रति लापरवाह परिवहन और पुलिस विभाग, पिछले साल की तुलना में हुई अधिक मौतें

सड़क दुर्घटनाओं के प्रति लापरवाह परिवहन और पुलिस विभाग, पिछले साल की तुलना में हुई अधिक मौतें

जयपुर: प्रदेश में हर साल 10 हजार से अधिक लाेगाें की सड़क हादसों में माैत हाे रही है. इस साल अक्टूबर माह तक पिछले साल की तुलना में सड़क हादसाें में 186 लाेगाें की अधिक माैत हाे चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सड़क हादसों को रोकने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे. परिवहन विभाग क्यों है मौन, क्या विभाग को दिखता है केवल राजस्व, खास रिपोर्ट:

माैताें के प्रति संवेदनशील नहीं है परिवहन और पुलिस विभाग:
सड़क दुर्घटनाओं में हो रही माैताें के प्रति परिवहन और पुलिस विभाग संवेदनशील नहीं हैं. राज्य सरकार ताे हर साल इन्हें राेकने के लिए कराेड़ों रुपए का खर्च फंड जारी कर रही है. फंड खर्च भी हाे रहा है, लेकिन माैताें पर लगाम नहीं लग पा रही है. परिवहन विभाग में राेड सेफ्टी विंग का गठन किया हुआ है. परिवहन विभाग के इस सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ में 30 से अधिक कर्मचारी और अधिकारी काम कर रहे हैं. ये सब हाेने के बावजूद भी सड़क हादसों में कमी ताे दूर अफसर हादसों का कारण बन रहे 700 से अधिक ब्लैक स्पॉट्स काे ठीक तक नहीं कर पाए हैं. इस वजह से आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हाे रही हैं. 

700 से अधिक ब्लैक स्पॉट्स:
हालत यह है कि हाल में परिहवन विभाग की तरफ से जारी सर्कुलर में बताया गया है कि प्रदेश में करीब 700 से अधिक ब्लैक स्पॉट्स हैं. ब्लैक स्पॉट उन जगहों को कहा जाता है, जहां पर पिछले कुछ वर्षों में खराब सड़क या खतरनाक मोड़ की वजह से सड़क हादसे हो रहे हैं. इनमें से 552 नेशनल हाईवेज और 187 ब्लैक स्पॉट स्टेट हाईवेज पर हैं. बाकी 66 अन्य सड़कों पर हैं. तीन साल बाद भी ये ब्लैक स्पॉट्स ठीक नहीं हाे पाए हैं. जानकारी के मुताबिक नेशनल हाईवेज पर सबसे अधिक ब्लैक स्पॉट्स अजमेर जिले में हैं. यहां पर 40 ब्लैक स्पाट चिन्हित किए गए हैं. दूसरे नंबर पर राजसमंद में 35 हैं. तीसरे नंबर पर उदयपुर ताे चौथे नंबर पर जयपुर ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं. वहीं स्टेट हाईवेज में ब्लैक स्पॉट पर पहले नंबर पर अलवर ताे दूसरे नंबर पर सीकर जिला शामिल हैं. तीसरे नंबर पर सवाईमाधोपुर ताे चौथे नंबर पर धौलपुर जिला शामिल हैं. नेशनल हाईवेज पर सबसे कम ब्लैक स्पॉट्स काेटा शहर और चूरू में हैं. यहां पर मात्र एक-एक ब्लैक स्पॉट हैं. इसके बावजूद भी ठीक नहीं हुए हैं. वहीं चूरू में 3, काेटा ग्रामीण में 4, बांसवाड़ा में 3, जालाैर में 3, नागाैर में 5, हनुमानगढ़ में 4, श्रीगंगानगर में 3 और बीकानेर में 6 हैं. परिवहन विभाग इन ब्लैक स्पॉट्स को ठीक नहीं करवा पा रहा है. कुल मिलाकर यदि परिवहन विभाग स्थिति सुधारे तो प्रदेश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और हादसों में हो रही मौतों को कम किया जा सकता है. 

... संवाददाता काशीराम चौधरी की रिपोर्ट  

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