VIDEO : रेवेन्यू के मामले में फिसड्डी साबित हो रहा परिवहन विभाग

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/22 08:58

जयपुर (काशीराम चौधरी)। राज्य सरकार के टॉप-5 कमाई वाले विभागों में शामिल परिवहन विभाग पिछले साल अपने लक्ष्य से आगे रहा था, लेकिन इस बार ये राज्य सरकार की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। राज्य सरकार की ओर से दिए गए लक्ष्य की तुलना में परिवहन विभाग की आय बहुत कम रही है। फर्स्ट इंडिया न्यूज की इस रिपोर्ट से जानते हैं प्रदेश का कौनसा आरटीओ कार्यालय है आगे, और कौन साबित हो रहा है फिसड्डी।

राज्य सरकार के लिए आय एकत्र करने वाले विभागों में परिवहन विभाग का एक अपना महत्व है। खास बात यह है कि पिछले साल परिवहन विभाग को जो राजस्व लक्ष्य राज्य सरकार ने दिया था, विभाग ने उससे ज्यादा हासिल करके दिखाया था। पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में परिवहन विभाग को 4300 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य दिया गया था और इसके विपरीत विभाग ने 4362 करोड़ रुपए अर्जित किए थे। यह लक्ष्य की तुलना में 101.44 फीसदी था, लेकिन इस बार परिवहन विभाग इसमें पिछड़ता नजर आ रहा है।

परिवहन विभाग ने दिसंबर माह तक के राजस्व लक्ष्य की समीक्षा की है और इसमें सामने आया है कि राज्य सरकार की ओर से दिए गए अब तक के लक्ष्य की तुलना में विभाग की परफॉर्मेंस खराब साबित हुई है। परिवहन विभाग को दिसंबर तक 3090 करोड़ रुपए अर्जित करने थे, जिसकी तुलना में विभाग ने 2780 करोड़ रुपए ही अर्जित किए हैं। यानी दिए गए लक्ष्य की तुलना में परिवहन विभाग ने 89.96 फीसदी राजस्व अर्जित किया है। परिवहन विभाग की इस परफॉर्मेंस से राज्य सरकार नाखुश दिख रही है।

ये हैं आरटीओज की रैंकिग :

रैंक

आरटीओ कार्यालय

लक्ष्य

अर्जित राजस्व

आरटीओ कौन

1

चित्तौड़गढ़

210 करोड़

201 करोड़

प्रवीणा चारण

2

अलवर

182 करोड़

173 करोड़

अनिल जैन

3

सीकर

250 करोड़

230 करोड़

ज्ञानदेव विश्वकर्मा

4

भरतपुर

115 करोड़

105 करोड़

सतीश चौधरी

5

जोधपुर

320 करोड़

290 करोड़

फतेह मोहम्मद खान

6

जयपुर

660 करोड़

590 करोड़

कल्पना अग्रवाल

7

उदयपुर

310 करोड़

280 करोड़

मन्नालाल रावत

8

दौसा

95 करोड़

85 करोड़

राजीव कुमार

9

बीकानेर

250 करोड़

220 करोड़

नेमीचंद पारीक

10

कोटा

220 करोड़

195 करोड़

प्रकाश सिंह राठौड़

11

पाली

180 करोड़

160 करोड़

जगदीश बैरवा

12

अजमेर

290 करोड़

245 करोड़

कुसुम राठौड़

अगर पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 के राजस्व लक्ष्य और उसके अर्जन से तुलना की जाए तो काफी अंतर देखने को मिल रहा है। पिछले वित्त वर्ष में सर्वाधिक राजस्व लक्ष्य कोटा आरटीओ ने हासिल किया था, लेकिन अब तक की परफॉर्मेंस में चित्तौड़गढ़ आरटीओ पहले स्थान पर है और कोटा आरटीओ पहले स्थान से फिसलकर 10वें स्थान पर आ गया है। वर्तमान में चित्तौड़गढ़ आरटीओ की कमान संभालने वाली प्रवीणा चारण पिछले साल पाली में थीं और तब यह चौथे स्थान पर रही थीं।

कोटा में नए आरटीओ लगाए गए प्रकाश सिंह राठौड़ राजस्व के मामले में बुरी तरह पिछड़े हैं। पिछले साल राजस्व लक्ष्य में पिछड़ने वाले सीकर और भरतपुर आरटीओ के हाल इस बार सुधरे हैं। भरतपुर में सतीश चौधरी और सीकर में ज्ञानदेव विश्वकर्मा पहली बार आरटीओ लगाए गए हैं और इन्होंने राजस्व की स्थिति सुधारी है, जिससे दोनों जिले बाॅटम से उठकर टॉप पर आने में कामयाब हुए हैं।

राज्य सरकार ने और बढ़ाया लक्ष्य :
- राज्य सरकार ने इस वित्त वर्ष में दिया था 4900 करोड़ का लक्ष्य
- परिवहन विभाग ने अब तक की खराब स्थिति का दिया हवाला
- कहा, इसे घटाकर 4600 करोड़ किया जाए
- लेकिन राज्य सरकार ने बताई वित्तीय स्थिति कमजोर
- इस साल 5000 करोड़ कर दिया लक्ष्य
- अब 3 माह में अर्जित करने होंगे 2025 करोड़
- हालांकि पिछले साल अंतिम 3 माह में विभाग ने जुटाए थे 1523 करोड़
- जो कि परिवहन विभाग की सबसे बेस्ट परफॉर्मेंस थी
- ऐसे में इस बार 4650 करोड़ पर अटक सकता है परिवहन विभाग

कुल मिलाकर अब तक हुई राजस्व आय से लग रहा है कि परिवहन विभाग अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएगा। 5000 करोड़ के लक्ष्य के विपरीत विभाग 4650 करोड़ रुपए पर अटक सकता है। हालांकि आरटीओज के बीच आगे निकलने की होड़ अभी जारी है, ऐसे में अंतिम 3 माह में अभी रैंकिंग में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कुल मिलाकर देखना होगा कि अब तक फिसड्डी रहा कोटा आरटीओ क्या अपनी इज्जत बचा पाएगा या फिर विभाग की महिला अधिकारी प्रवीणा चारण सबसे अव्वल साबित होंगी।

  
First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in