VIDEO: राजस्थान में RSS के प्रति बढ़ता लोगों का 'रुझान', संघ की शाखाओं में 10 फीसदी बढ़त

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/14 10:03

जयपुर (योगेश शर्मा)। राजस्थान के संघ के लिये अच्छी खबर है। राष्ट्रवादी सोच को आगे बढ़ाते हुये संघ ने शहरी और ग्रामीण इलाकों में 10फीसदी तक अपनी शाखाओं का विस्तार किया है। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की रिपोर्ट को राजस्थान में संघ की मजबूती के तौर पर देख जा रहा। तकरीबन 2 हजार 363 स्थानों पर कुल 4 हजार 862  शाखाएं लगती है। राष्ट्रीय स्तर पर करीब 60 हजार शाखाएं प्रतिदिन संघ के स्वयंसेवकों की ओर से लगाई जाती है। तीन प्रांतो में बीते साल में सर्वाधिक शाखाएं लगी है चितौड़ प्रांत में। सेवा कार्यो में भी संघ ने प्रगति दर्ज की है। खास रिपोर्ट-

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को दुनिया और देश का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी संगठन कहा जाता है। शाखाएं संघ की बैकबॉन कही जाती है। शाखा में भाग लेने वाले स्वयंसेवक कहे जाते है। स्वयंसेवक शाखाएं लगाने का कार्य करते है। 

संघ शिक्षा वर्गों में क्या होता है:

यहां नि़त्य शाखा और ध्वज वंदन की परम्पराओं का निर्वहन किया जाता है। संघ की बेसिक शिक्षा स्वयंसेवकों को नित्य लगने वाली शाखाओं से ही मिलती है। शारीरिक दमखम से जुड़े खेलों के आयोजन भी यहां किये जाते है, तो वहीं नैतिक,राष्ट्रवादी और समसामयिक विषयो पर शिक्षा दी जाती है। संघ की पहली सीढ़ी शाखा ही कही जाती है। यहां बाल, किशोर और युवा स्वयंसेवको की पहली दीक्षा होती है। ऐसा कहा जाता है कि संघ की पहली शाखा नागपुर के मोहितेबाड़े में साल 1925 के दरम्यान लगी थी। यहीं कारण है कि आर एस एस का पहला ध्येय रहता है शाखाओं की मजबूती। हाल ही में ग्वालियर में आयोजित संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की रिपोर्ट में संघ की शाखाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है। राजस्थान में भी पिछले साल के मुकाबले इस बार संघ स्थान और शाखाएं बढ़ी है। 10 फीसदी तक संघ की शाखाएं बढ़ना उपलब्धि है। 

आर एस एस राजस्थान का वार्षिक आकलन:
-राजस्थान क्षेत्र को संघ नजरिये से चितौड़, जयपुर और जोधपुर प्रांत कहा जाता है

जयपुर प्रांत:
- शाखा स्थान रहे- 920
-इस प्रांत में कुल शाखाएं लगी -1840
-साप्ताहिक मिलन कार्यक्रमों की संख्या रही -528
-212संघ मंडलियों की संख्या रही
-365सेवा कार्य जयपुर में प्रांत में किये गये

चितौड़ प्रांत:
- शाखा स्थान रहे- 590
-कुल शाखा-1985
-साप्ताहिक मिलन कार्यक्रम-590
-संघ मंडली-628
-सेवा कार्य-1418

जोधपुर प्रांत:
-शाखा स्थान-853
-कुल शाखा-1037
-साप्ताहिक मिलन-249
-संघ मंडली-147
-सेवा कार्य-237

तीन प्रांतो का योग:
-शाखा स्थान-2363
-कुल शाखा-4862
-साप्ताहिक मिलन-1367
-संघ मंडली-987
-सेवा कार्य-2020

राष्ट्रीय स्तर पर संघ:
-शाखा स्थान-37011
-कुल शाखा-59266
-साप्ताहिक मिलन-17229
-संघ मंडली-8328
-सेवा कार्य-130032

संघ की वार्षिक रिपोर्ट पर गौर किया जाये तो इस बार चितौड़ प्रांत में सर्वाधिक शाखाएं बढ़ी है। चितौड़ प्रांत में राजस्थान का दक्षिणी इलाका आता है यूं कहे है कि आदिवासी -वनवासी क्षेत्र। यहां आदिवासियों के बीच संघ कार्यो का बढ़ना काफी अहम है। आदिवासी इलाकों में क्रिश्चियन मिशनिरी के प्रभाव को रोकने के लिये यहां क्षेत्रों में संघ ने बीते कई सालों से गतिविधियां तेज कर रखी है। शायद यही कारण है यहां संघ की शाखाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इन सबके बीच खास तथ्य यह है कि युवाओं का रुझान संघ के प्रति बढ़ा है। 

 

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