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Panchayati Raj Election 2020: बंदर और नीलगायों के आतंक से परेशान पूरे गांव ने किया मतदान का बहिष्कार

Panchayati Raj Election 2020: बंदर और नीलगायों के आतंक से परेशान पूरे गांव ने किया मतदान का बहिष्कार

कोटा: मतदान दिवस के दिन कोटा के एक गांव में विकास नही तो वोट नही के नारे लग रहे हैं. कोटा की लाड़पुरा पंचायत समिति के गांव भोजपुरा में पूरे गांव ने मतदान का बहिष्कार इसलिए किया क्यूंकि गांव में मूलभूत ज़रूरतों का अभाव तो एक बड़ा मुद्दा हैं ही लेकिन गांव में बड़ी परेशान बंदरों और नीलगायों का आतंक हैं.  

किसी ने नही दिया विकास पर ध्यान: 
विकास के लिए तरसते गांव भोजपुरा के लोग बताते हैं कि आए दिन गांव में बंदर कई लोगों को घायल कर रहे हैं तो वहीं खेतों में फसलों का अस्तित्व नीलगायों ने खतरे में डाल रखा है. कई बार गांव की पूर्व सरपंच के सामने ग्रामीणों ने अपनी समस्या को रखा लेकिन सरपंच की नज़र अंदाजी ने इनको परेशानी का समाधान नही किया तो मजबूरन अब पूरे गांव ने यही नारा बुलंद किया विकास नही तो वोट भी नही.  

जब तक नही पूरी होगी मांग नही करेंगे मतदान: 
गांव के लोगों ने स्पष्ट किया है कि जब तक इनकी मांग पूरी नही होगी और मांगपत्र में शामिल इनकी समस्याओं का समाधान नही होगा या खुद जिला कलक्टर या प्रशासन का अधिकारी इन्हें आश्वस्त नही करेगा, तब तक गांव में कोई मतदान नही करेगा. 

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जयपुर: भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर शुक्रवार को उनके जयपुर स्थित निवास पर भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश पदाधिकारियों ने मुलाकात की, तो प्रदेशभर के कई कार्यकर्ताओं ने भी माथुर से मिलकर अपने अपने क्षेत्र का संगठनात्मक फीडबैक भी दिया. माथुर से मिलने वालों में भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश उपाध्यक्ष अजय पाल सिंह माधुराम चौधरी प्रदेश मंत्री महेंद्र यादव अशोक सैनी मौजूद रहे.

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भाजपा नेता मुकेश पारीक और सोहनलाल तांबी भी माथुर से मिले. आपको बता दें कि माथुर पिछले दिनों अपने क्षेत्र फालना में थे जहां पर अपने पारिवारिक मित्र पुष्प जैन के पुत्र के निधन के बाद उनके शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की थी और परिवार को ढांढस बंधाया था. उसके बाद माथुर कल जयपुर लौटे और ने दिन भर माथुर के आवास पर मिलने वालों का जमावड़ा रहा कल दिल्ली जाने का प्रस्तावित कार्यक्रम है.

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जैसमलेर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच आज केन्द्रीय मंत्री कैलाश चौधरी का सियासी दौरा चर्चा का विषय रहा. ये साधारण सियासी घटना नहीं हो सकती है जब जैसलमेर में कांग्रेस की बाडेबंदी चल रही हो और उसी वक्त केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी का सियासी दौरा हो जाये. कैलाश चौधरी ने भाजपा की स्थानीय टीम के साथ बैठक कर जैसलमेर-बाड़मेर संसदीय क्षेत्र के विकास के मुद्दों पर गहलोत सरकार को घेरा. 

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कांग्रेस वसुंधरा जी की तारीफ करें तो हमारे लिए यह अच्छी बात: 
वहीं इस दौरान कैलाश चौधरी ने फर्स्ट इंडिया न्यूज से खास बातचीत में कहा कि कांग्रेस वसुंधरा जी की तारीफ करें तो हमारे लिए यह अच्छी बात है. उन्होंने मुख्यमंत्री रहते बेहतर काम किए थे. वहीं कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब तक होटल में है सुरक्षित है. हालांकि सतीश पूनिया को लेकर किए गए सवाल को मंत्री  चौधरी टाल गए. हमारे संवाददाता लक्ष्मण राघव ने उनसे खास बातचीत की...

 

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जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच भाजपा विधायकों की भी बाड़ेबंदी की तैयारियां चल रही है. नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने 1st इंडिया से खास बातचीत करते हुए कहा कि अभी हमे आवश्यकता नहीं है लेकिन हमें पता लगा है कि हमारे MLA से सम्पर्क करने की कोशिश की जा रही है. ऐसे में हम भी अपने विधायकों को एकत्रित करके प्रशिक्षण देंगे. हमने अपनी तैयारियां कर रखी है.

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जिस दिन से जैसलमेर शिफ्ट हुए बहुमत खो दिया सरकार ने: 
उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस दिन से जैसलमेर में शिफ्ट हुए सरकार ने बहुमत खो दिया. सरकार निश्चित रूप से अल्पमत में आ गई है. पायलट के कुछ लोग जैसलमेर में भी है. ऐसे में इस बार सत्र निर्णायक व हंगामेदार होगा. हम जनता के विषय सदन में लाने की कोशिश करेंगे. इस समय प्रदेश में कानून व्यवस्था व कोरोना को देखने वाला कोई नहीं है. कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति कैदी की तरह जिंदगी जी रहे हैं. बिजली के बिल ने करंट मारा है घर का बिल भी आपके सामने हैं. ऐसे में हमारा काम जब शुरू होगा जब हाउस जुड़ेगा. 

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हमें अभी पायलट ग्रुप की गणित देखनी है:
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि हमें अभी पायलट ग्रुप की गणित देखनी है. इसके साथ ही इस दौरान उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव लेकर आने की तैयारियों के भी संकेत दिए. कटारिया ने कहा कि सही रिपोर्ट इकट्ठा करें तो उनके विधायक भगोड़े हैं. वहीं वसुंधरा राजे पर बोलते हुए कहा कि राजे हमारी लीडर और 2 बार की मुख्यमंत्री है. केंद्र क्या सोचता है उनका केंद्र से मिलना भी उसी दृष्टि से रहा है. अध्यक्ष पूनिया ने भी मुलाकात की है तो उसी दृष्टि से की है. हम जो एक्शन प्लान करेंगे तो उन्हें साथ लेकर ही फैसला करेंगे. 

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जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच शुक्रवार को जैसलमेर के सूर्यगढ़ होटल में ही बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए छह विधायकों को कोर्ट के नोटिस दिए गए. जैसलमेर डीजे के रीडर ने होटल में नोटिस तामील करवाए. नोटिस तामील होने से राजनैतिक क्षेत्रों में आश्चर्य का माहौल है. पहले कांग्रेस द्वारा बसपा से शामिल हुए विधायकों को कहीं और शफ्ट किए जाने की खबर थी ताकि नोटिस तामील न होने पर कोर्ट की कार्यवाही आगे न बढ़ सके. लेकिन गहलोत कैम्प ने आज सभी को एक "सरप्राइज" दिया है और न्यायिक जगत में गहलोत के रणनीतिकारों की प्रतिष्ठा बढ़ी है. 

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सभी विधायक एक ही जगह मिले टीम को: 
नोटिस मिलने के बाद बसपा विधायकों ने कहा कि हमने सहर्ष नोटिस स्वीकार किये हैं. उन्होंने कहा कि हमने टीम से एक ही नोटिस लिए हैं. सभी विधायक टीम को एक जगह ही मिले. लेकिन अब सभी नोटिस महेश जोशी को सौंपने की खबर है. सभी विधायकों ने जोशी के हाथ नोटिस दिए हैं. 6 विधायकों को नोटिस मिलने के दौरान एसपी भी मौके पर मौजूद रहे. वहीं कोर्ट का नोटिस तामील कराने के मामले पर होटल में हलचल बढ़ गई है. वहीं सीएम गहलोत भी आज शाम जैसलमेर जाएंगे. 

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मामले को एक बार फिर से एकलपीठ को भेज दिया:
इससे पहले गुरुवार को राजस्थान हाईकोर्ट ने बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय के मामले को एक बार फिर से एकलपीठ को भेज दिया. मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने बसपा और भाजपा विधायक मदन दिलावर की अपील पर सुनवाई करते हुए 8 अगस्त तक बसपा के सभी 6 विधायकों को नोटिस सर्व कराने की व्यवस्था की है. लेकिन साथ ही एकलपीठ को निर्देश दिये है कि वो 11 अगस्त का सुनवाई करते हुए उसी दिन बसपा और मदन दिलावर की याचिकाओं पर फैसला भी दे. खण्डपीठ के इस फैसले के बाद फिलहाल तो मुख्यमंत्री खेमे को राहत मिल गई है लेकिन अब 11 अगस्त को एकलपीठ का फैसला ही सरकार का भाग्य तय कर सकता है. बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर स्टे एप्लीकेशन पर एकलपीठ उसी दिन फैसला सुनाएगी. 

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जैसलमेर: सूर्यगढ़ में कांग्रेस की किलेबंदी को 7 दिन हो चले हैं. आज सियासत दानों की नजर हाई कोर्ट पर भी है. दरअसल, वहां बसपा मामले पर आज सुनवाई होनी है. first India News से खास बातचीत में संयम लोढ़ा ने कहा कि किसी को वोट से वंछित करने का अधिकार माननीय न्यायालय को नहीं है इस तरह की मंशा रखना ही ही गैरकानूनी है. चुने हुए जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र का विकास करवाना होता है. ऐसे में जनप्रतिनिधि सरकार को सहयोग देकर ऐसा करते रहे है इसमें आपत्तिजनक क्या है.

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सदन के बाहर और बेहतर इसका जवाब भाजपा को देना ही होगा: 
पायलट के खेमे के विधायकों के गुजरात शिफ्ट होने की चर्चा पर संयम लोढ़ा ने कहा कि वे भाजपा की शरण मे हैं. गुजरात चले जाए या दिल्ली चले जाए पर अच्छा ये ही होगा कि वे घर लौट जाएं. भारतीय जनता पार्टी को देश की जनता को आने वाले वक्त में जवाब देना पड़ेगा. जिस तरह से लगातार निर्लज्जता से धन के बल पर लोभ के बल पर चुनी हुई गैर भजापा सरकारों को गिराने का उपक्रम को भाजपा नेशुरु किया है उसका जवाब सदन में भी देना पड़ेगा सदन के बाहर भी देना पड़ेगा आज नहीं तो कल. वहीं समय समय पर सुप्रीम कोर्ट के जो फैसले आए है उच्च न्यायालयों को भी उसकी पालना करनी पड़ेगी. नम्बर गेम में हम पूरी तरह आश्वस्त है भारतीय जनता पार्टी का सपना धूलधूसरित करेंगे रहेंगे. संवाददाता लक्ष्मण राघव ने की संयम लोढ़ा से खास बातचीत....

 

बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय का मामला, हाई कोर्ट विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी कर कल सुबह 10.30 बजे तक मांगा जवाब

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जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी संकट के बीच बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय मामले पर आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. मदन दिलावर की ओर से हरीश साल्वे ने बहस की है. हरीश साल्वे लंदन से VC के जरिए जुड़े थे. हाई कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस जारी कर कल सुबह 10.30 बजे तक जवाब मांगा है. ऐसे में अब इस मामले पर कल सुनवाई होगी. 

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बता दें कि बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ के 30 जुलाई के आदेश को अब खण्डपीठ में चुनौती दी गयी थी. अपील पेश करने के साथ बसपा और भाजपा विधायक मदन दिलावर के अधिवक्ताओं की ओर से शीघ्र सुनवाई की अर्जी भी पेश की गयी. इसी के चलते हाईकोर्ट ने दोनों ही अपीलों पर शीघ्र सुनवाई की अर्जी मंजूर करते हुए बुधवार को सुनवाई के लिए रखा. मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ बुधवार को इन अपीलों पर सुनवाई हुई. 

विलय को लेकर कोई अंतरिम राहत नहीं: 
बहुजन समाज पार्टी और भाजपा विधायक मदन दिलावर की ओर से अपील पेश कर विलय को रद्द करने की भी गुहार लगायी गयी है. अपील में कहा गया है कि एकलपीठ ने उनकी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विलय को लेकर कोई अंतरिम राहत नहीं दी है. विधानसभा अध्यक्ष सचिव और बसपा विधायकों को केवल नोटिस ही जारी किये गये है. जबकि वर्तमान हालात में बसपा के सभी 6 विधायक जैसलमेर की एक होटल में है और उन्हे नोटिस सर्व कराना आसान नहीं है. उनके परिजन भी नोटिस प्राप्त कर रहे हैं. गौरतलब है कि 30 जुलाई को जस्टिस महेन्द्र गोयल की एकलपीठ ने मदन दिलावर और बसपा की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष, सचिव और बसपा के 6 विधायकों को नोटिस जारी कर 11 अगस्त तक जवाब पेश करने के आदेश दिये है. लेकिन एकलपीठ ने बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी. 

क्या है मामला:
18 सितंबर 2019 को बसपा के 6 विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के आदेश जारी हुए थे. जिस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए भाजपा विधायक मदन दिलावर ने 16 मार्च 2020 को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत में बसपा विधायको का कांग्रेस में विलय को अमान्य करार देते हुए रद्द करने की मांग कि गई. 4 माह तक जब शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं की गई तो 17 जुलाई केा पुन: विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर कार्यवाही करने की मांग की. विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं करने पर राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर कि गई. 

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बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को अमान्य करार देने की मांग: 
याचिका की सुनवाई के दौरान विधानसभा अध्यक्ष की ओर से जानकारी दी गयी की 24 जुलाई को ही शिकायत खारिज कर दी गयी है. विधानसभा अध्यक्ष के जवाब के आधार पर याचिका को सारहीन मानते हुए हाईकोर्ट ने मदन दिलावर की याचिका को खारिज कर दिया. लेकिन साथ ही मदन दिलावर को मामले में नयी याचिका पेश करने की छूट दी. बाद में सशोधित याचिका पेश कर मदन दिलावर ने बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को अमान्य करार देने की मांग की. बहुजन समाज पार्टी ने भी इसमें शामिल होते हुए अलग से याचिका दायर की. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 30 जुलाई को दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष, सचिव और बसपा के 6 विधायकों को नोटिस जारी किये. लेकिन बसपा विधायकों के विलय को अमान्य घोषित करने के मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी. 

दीया कुमारी बोलीं, मैं वसुंधरा राजे का बहुत सम्मान करती हूं, पहली बार संगठन में मंत्री उन्होंने ही बनाया

जयपुर: पिछले दिनों लगातार सोशल मीडिया में दीया कुमारी के महामंत्री बनाए जाने को लेकर कई तरह की चर्चाएं थी लेकिन जब दिया कुमारी से मंगलवार को वसुंधरा राजे को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह उनका बहुत सम्मान करती है पहली बार संगठन में मंत्री उन्हें वसुंधरा राजे ने ही बनाया था. साथ ही विधायक बनने के पीछे भी दीया कुमारी ने वसुंधरा राजे को श्रेय दिया. उन्होंने सोशल मीडिया से लेकर पार्टी के गलियारों में चल रही चर्चाओ को सिरे से खारिज किया. नई जिम्मेदारी मिलने पर जेपी नड्डा सतीश पूनियां व चंद्रशेखर का खास आभार जताया.

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हम राम के वंशज है हमारे लिए यह गर्व की बात:
इस दौरान उन्होंने प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्र शेखर से भी मुलाकात की और  आभार जताया. पूनिया और चंद्रशेखर ने उन्हें नई जिम्मेदारी की बधाई और शुभकामनाएं दी. दिया कुमारी ने कहा की पार्टी ने मुझे जो इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी है. मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगी जितना भी मुझे पार्टी की और काम दिया जाएगा उसको पूरी तरह से निभाउंगी. वहीं दीया कुमारी ने राम मंदिर के शिलान्यास को लेकर कहा की हम राम के वंशज है हमारे लिए यह गर्व की बात है की पांच सौ साल बाद राम मंदिर बनेगा.

अभयारण्यों की बुरी स्थिति को लेकर नाराजगी भी जताई:
कल देश में एतिहासिक काम होने जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर भी प्रहार करते हुए कहा कि सरकार ज्यादा दिन नहीं चलने वाली है और प्रदेश की जो वर्तमान में स्थिति है वह जनता के सामने है साथ ही उन्होंने कहा कि 2 दिनों में बाघों की मौत होने को लेकर वह प्रकाश जावड़ेकर से बातचीत करेंगे और उन्हें पत्र भी लिखेंगी. प्रदेश के अभयारण्यों की बुरी स्थिति को लेकर नाराजगी भी जताई. दीया कुमारी ने कहा है कि अब वह समयबद्ध रूप से पार्टी कार्यालय आती रहेंगी. प्रदेश अध्यक्ष द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के लिहाज से संगठन में सतत मेहनत और परिश्रम करेंगे. दीया कुमारी से संवाददाता ऐश्वर्य प्रधान ने खास बातचीत की .

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Rajasthan Political Crisis: विधायकों के वेतन भत्ते रोकने से जुड़ी जनहित याचिका खारिज

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जयपुर: प्रदेश के सियासी संकट के बीच विधायकों के वेतन भत्ते रोकने से जुड़ी पत्रकार विवेक सिंह जादौन की जनहित याचिका को राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने संबंधित अथॉरिटी के समक्ष प्रतिवेदन पेश करने की छूट दी है. सीजे इंद्रजीत महांति, जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने याचिका को खारिज किया है. 

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प्रदेश में वित्तीय हालात सही नहीं:  
इससे पहले पत्रकार विवेक सिंह जादौन ने जनहित याचिका दायर कर होटलों में रुके विधायकों को वेतन भत्ते रोकने को लेकर यह कहते हुए चुनौती दी थी कि कोरोना संक्रमण के चलते प्रदेश में वित्तीय हालात सही नहीं है. लेकिन फिर भी एमएलए अपने मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों में नहीं जा रहे हैं. जनहित याचिका में कहा गया कि विधायक ना ही अपने क्षेत्र में जा रहे है और ना ही विधायी कार्य कर रहे है ऐसे में उन्हें वेतन-भत्तों का भुगतान क्यों किया जाए. 

एमएलए आमजन के धन का दुरुपयोग कर रहे:  
पीआईएल में कहा कि प्रदेश में एक ही राजनीतिक दल से जुड़े ये एमएलए आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते आमजन के धन का दुरुपयोग कर रहे है. इसलिए जयपुर व मानेसर की होटलों में रुके हुए एमएलए के वेतन-भत्तों को रोका जाए. याचिका में सीएम सहित विधानसभा स्पीकर, विधानसभा सचिव व मुख्य सचिव को पक्षकार बनाया है. मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति की खण्डपीठ में याचिका पर सुनवाई होगी. 

राज्यपाल को पद से हटाने से जुड़ी याचिका को खारिज किया: 
वहीं इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने आज राज्यपाल से जुड़ी 2 महत्वपूर्ण जनहित याचिकाओं को भी खारिज कर दिया. राज्यपाल को पद से हटाने से जुड़े मामले में हाई कोर्ट ने जनहित याचिका को सारहीन बताया. शांतनु पारीक द्वारा लगाई गई याचिका को सीजे इंद्रजीत महांति ने सारहीन बताते हुए खारिज किया. याचिका में विधानसभा सत्र नहीं बुलाने को लेकर राज्यपाल को हटाने की गुहार की गई थी. इसके साथ ही केंद्र सरकार को राष्ट्रपति को सिफारिश भेजने के निर्देश देने की भी मांग की गई थी. 

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राज्यपाल से जुड़ी दूसरी जनहित याचिका भी खारिज: 
इसके साथ ही राज्यपाल से जुड़ी दूसरी जनहित याचिका भी हाई कोर्ट ने खारिज कर दी. एडवोकेट एसके सिंह की जनहित याचिका को विड्रॉ करने पर हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह जनहित याचिका राज्यपाल को सत्र आहूत करने के निर्देश देने को लेकर दायर की गई थी. 

 
 

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