दो दिवसीय 16 वें अखिल भारतीय TDS सम्मेलन की शुरुआत, अधिकारियों को दी व्यवहार में बदलाव की सीख

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/20 05:31

जयपुर: देश की कुल आयकर वसूली में 43 फीसदी की भागीदारी देने वाले स्रोत पर कर की कटौती अर्थात TDS संग्रहण की अगुवाई करने के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार अधिकारियों का आज से जयपुर में समागम हुआ. जयपुर में शुक्रवार से शुरू हुए आयकर विभाग के 16 वें अखिल भारतीय TDS सम्मेलन में देश भर के 45 TDS आयुक्त व प्रधान आयुक्तों ने शिरकत की. 

पारम्परिक तरीकों से कर संग्रहण अब कठिन होता जा रहा: 
सम्मेलन का उदघाटन केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड अर्थात CBDT के मैम्बर ऑडिट एण्ड ज्यूरिडिक्शन P.K. दास ने किया. मेजबान राज्य होने के नाते राजस्थान की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त श्रीमती नैना निगम ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि पारम्परिक तरीकों से कर संग्रहण अब कठिन होता जा रहा है. कर संग्रहण के लक्ष्यों का दवाब झेल रहे आयकर अधिकारियों को उन्होंने तकनीक का उपयोग बढ़ाने की सलाह दी. उन्होंने करदाता को स्वत: कर भुगतान के लिए प्रेरित करने व राष्ट्र निर्माण के लिए दिए जा रहे उनके योगदान का सद उपयोग होने की बात भी कही. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि CBDT के मैम्बर ऑडिट एण्ड ज्यूरिडिक्शन P.K. दास ने अच्छे कार्य के लिए जहां मौजूद अधिकारियों की तारीफ की, वहीं उनकी खामियों के लिए खिंचाई भी की. 

पिछले साल की तुलना में TDS संग्रहण में 20% से अधिक की कमी: 
दास ने TDS संग्रहण के क्षेत्रवार उपलब्ध आंकड़ों की जानकारी देते हुए कहा कि अनेक क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां पिछले साल की तुलना में TDS संग्रहण में 20% से अधिक की कमी है. उन्होंने स्वीकार किया कि आर्थिक मंदी का दौर चल रहा है, लोगों की आय में कमी भी हुई है, लेकिन फिर भी पिछड़ रहे अधिकारियों को सबक लेना चाहिए और अपनी खामियों को दूर कर TDS संग्रहण के लक्ष्य पाने चाहिए. आयकर अधिकारियों की ओर से आयकर वसूली के लिए बनाए जा रहे दवाब की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आम करदाता आयकर अधिकारियों को पहले टैक्स टेररिस्ट मानता था, लेकिन अब यह परिभाषा भी टैक्स जैहादी के रूप में बदल चुकी है. दास का कहना है कि आयकर कानून में आए बदलाव की जानकारी करदाता को देकर बिना दवाब बनाए उससे स्वेच्छा से आयकर चुकाने को प्रेरित किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए अधिकारियों को अपनी सोच बदलनी होगी.

करदाता को भरोसा दिलाए कि उनका आयकर राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा: 
उन्होंने चिकित्सकीय कार्य में उपयोग लिए जाने वाले चाकू का उदाहरण देते हुए कहा कि सर्जन डॉक्टर भी मरीज के शरीर पर चाकू से चीरा लगाता है, लेकिन वह मरीज को भरोसा दिलाता है कि इससे उसका नुकसान नहीं होगा. यहीं सोच आयकर अधिकारियों को विकसित करने की जरूरत है, जिसमें वे करदाता को भरोसा दिलाए कि उसकी ओर से चुकाया जाने वाला आयकर राष्ट्र निर्माण में उपयोग होगा. आयकर अधिकारियों की फील्ड और नॉन फील्ड पोस्टिंग की मानसिकता पर भी उन्होंने तंज कसा और कहा कि इस संबंध में अधिकारियों को अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है. बाद में पत्रकारों को संबोधित करते हुए दास ने राजस्थान के TDS संग्रहण पर संतोष जताया और कहा कि राजस्थान में संग्रहण राष्ट्रीय औसत से कुछ अधिक ही है. 

आयकर रिटर्न नहीं भरने वाले करदाताओं की खोज जारी: 
फर्स्ट इण्डिया न्यूज के सवाल के जवाब में दास ने कहा कि आयकर रिटर्न नहीं भरने वाले करदाताओं की खोज जारी है. लेकिन विभाग आय में कमी, आयकर दाता की मृत्यु आदि करदाता के रिटर्न नहीं भरने के कारणों का भी विश्लेषण कर रहा है. फिर भी जानबूझ कर ITR नहीं जमा कराने वालों की पहचान की जा रही है. ऐसे सभी करदाताओं के खिलाफ विभाग कार्रवाई भी करेगा. राज्य की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त श्रीमती नैना निगम ने राज्य सरकार को अच्छे करदाता का सर्टिफिकेट दिया. उन्होंने कहा कि TDS कटौती व संग्रहण को लेकर राज्य सरकार से नहीं समस्या नहीं है. 

....विमल कोठारी, फर्स्ट इण्डिया न्यूज

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