जीवनदाता भाइयों को है मददगार का इंतजार...

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/04 04:04

आगरा। आज हम बताएंगे दो सगे भाइयों की कहानी और उन्हीं की जुबानी।जो दूसरों के लिये मददगार बन जाते हैं। मदद करते समय खुद की जान की बाजी लगा देते हैं। लेकिन मददगार दोनों भाइयों को है आज किसकी मदद का इंतजार। सुनो तो अब इनकी सरकार? 1 मोटर साइकिल के इन दोनों पहियों की तरह इन दोनों भाइयों की जिंदगी भी घूमती है। 

गरीबी में जीवन जीते हुए गाड़ियों में पंचर जोड़कर गुजर-बसर करते हैं और चंद पैसे कमा कर अपने परिवार का पेट पालते है। खुद मुफलिसी में जीने वाले इन दोनों भाइयों ने 300 से ऊपर लोगो को जान बचाकर उन्हें जीवनदान दिया है। एटा के कोतवाली थानाक्षेत्र के आगरा रोड पर दो हजारा नहर पर कमसान का पुल है। अगर हम इसे शमशान का पुल कहें तो कुछ गलत नही होगा। 

इस पुल से कूदकर न जाने कितने लोगों ने अपनी जान दे दी। लोग यहाँ खुदकुशी करने पहुंचते है। लेकिन यहाँ रवेंद्र सिंह और जुगेंद्र सिंह यहाँ मौजूद होते हैं तो खुदकुशी करने वालो की मंशा पूरी नही होती। ये दोनों भाई अपनी जान की बाजी लगाते हुए नहर में छलांग लगा देते है। और तैराकी में महारथ हाशिल किये दोनों भाई जीवन-दाता बन जाते है। 

गरीबी ने इन दोनों भाईयों को अपना जिला फिरोजाबाद छोड़ने को मजबूर कर दिया। परिवार को पालने के लिए पंचर की दुकान का सहारा लिया, जो कमसान के ही पुल पर है। जब जिला प्रशासन को इनकी जरूरत पड़ती है तो ये उनका तुरंत सहारा बन जाते है। लेकिन इन्हें अफसोस इस बात का की दूसरों का सहारा बनने वालों का सहारा कौन बनेगा। 

इन्हें न तो प्रशासन की तरफ कोई मदद मिली और न ही जनता की तरफ से। हालांकि इन दोनों भाइयों को तमाम बड़े अधिकारी व नेतागण इनके इस नेक कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित कर चुके हैं। इन दोनों भाइयों ने दोनों सरकारों के मुखिया से गुहार लगाते हुए देश सेवा में हिस्सेदारी देने की मांग की है।

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in