पुलिस की अनदेखी के चलते दबंगों ने दो सगी बहनों को बनाया हवस का शिकार

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/02 03:31

कानपूर देहात। दिल दहला देने वाली दहशत की दास्तान कानपुर देहात से आई है, जहां दबंगों ने कक्षा 7 में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया। जब पीड़ित परिवार शिकायत लेकर थाने पहुंचा तो पुलिस ने थाने से बैरंग लौटा दिया। लिहाजा दबंगों के हौसले बुलंद हो गए और उन्होंने रेप पीड़िता की बड़ी बहन की पहले अस्मत लूटी, फिर उसे जमकर मारा पीटा। दरिंदे यहीं नहीं रुके, दबंगों ने रेप पीड़िता को अपना पेशाब पिलाया। 

रेप पीड़िता अस्पताल में ज़िन्दगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है और कानपुर देहात पुलिस कार्यवाही करने की बजाए तमाशाबीन बनी हुई है। दरअसल मामला कानपुर देहात के अमरौधा ब्लाक के ट्यूंगा गांव का है। गांव के वहशी युवक दीपू ने अपने परिवार के दो सदस्यों के साथ मिलकर इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया। पीड़िता का बाप नहीं है, घर में दो बहने रहती थी। रेप के बाद पीड़िता बदहवास हालत में थाने पहुंची और अपने साथ हुई दरिन्दगी की दास्तान सट्टी थाने के इंस्पेक्टर दिग्विजय सिंह को बताई। इंस्पेक्टर दिग्विजय सिंह ने दोनों बहनों के साथ हुई दरिंदगी के बाद भी उनकी एक नहीं सुनी और थाने से बैरंग लौटा दिया। पीड़ित की हालत बिगड़ती देख उसके परिजनों ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया जहा उसकी हालत नाज़ुक बनी हुयो है। 

मामला जब मीडिया के संज्ञान में आया तो इंस्पेक्टर सट्टी दिग्विजय सिंह आफ द रिकार्ड सफाई देने में जुट गए और खुद को बेदाग बता डाला और महज़ मामूली विवाद बता कर पल्ला झाड़ लिया। दिखाने लगे की देखो मैंने दोनों की एफआईआर दर्ज कर दी है और मेडिकल के लिए भी भेज दिया है, लेकिन ये नहीं बताया कि ये सब कार्यवाही 5 दिन बाद की है, जब मीडिया के संज्ञान मामला आया है। 

मामला सत्तारूढ़ पार्टी का था, लिहाज़ा विपक्ष का सवाल उठाना लाज़मी था। कांग्रेस ज़िला अध्यक्ष फौरन बोले ये प्रशासन की नाकामी है। क़ानून व्यवस्था नाम की कोई चीज सूबे में नहीं रह गई है। सूबे में जंगल राज कायम है, तभी दो सगी बहनों के साथ रेप होता है और पुलिस तमाशबीन बनकर बैठी है। इस घटना ने कानपुर देहात पुलिस प्रशासन पर सवालिया निशान लगा दिया है। सवाल ये उठता है कि आखिर पुलिस ने रेप पीड़िता के परिवार की फ़रियाद क्यों नहीं सुनी? आखिर पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर मेडिकल क्यों नहीं कराया? अगर मेडिकल रिपोर्ट में रेप की पुष्टि हो जाती तो पुलिस मुकदमा दर्ज करती, वरना पुलिस मुकदमा स्पंज कर सकती थी जो पुलिस ने नहीं किया। 

... कानपूर देहात से संवाददाता विवेक कुमार त्रिवेदी की रिपोर्ट 

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